Bihar Chunav: चिराग पासवान ने 29 सीटें ले जमाई धाक और पशुपति पारस के खाली हाथ! भतीजे ने कैसे दी चाचा को मात?
Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 कई लिहाज से खास है। चुनावी हार-जीत के साथ इस बार कुछ पार्टियों का राजनीतिक भविष्य भी तय होगा। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज पहली बार चुनावी मैदान में है। दूसरी ओर तेज प्रताप यादव का राजनीतिक भविष्य भी दांव पर है। परिवार और पार्टी से बेदखल किए जाने के बाद उनके लिए यह करो या मरो जैसा मुकाबला है। चिराग पासवान के लिए भी यह चुनाव खुद को साबित करने का मौका है।
रामविलास पासवान की मौत के बाद दो धड़ों में बंटी एलजेपी के लिए भी यह निर्णायक चुनाव है। महागठबंधन में पशुपति पारस की एलजेपी के लिए गुंजाइश नहीं है। कहा जा रहा है कि वह अपनी पार्टी आरजेडी में मर्ज कर सकते हैं। उनकी पार्टी के पास अब न जनाधार ही है और न काडर ही बचा है

Chirag Paswan ने सीट शेयरिंग में दिखाया दम
केंद्रीय मंत्री और एलजेपी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान के लिए यह चुनाव शक्ति प्रदर्शन का मौका है। पार्टी टूटने के बाद चिराग अकेले पड़ गए थे। लोकसभा चुनाव 2024 में उन्होंने एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और 100 फीसदी स्ट्राइक रेट के साथ 5 सीटें जीतने में कामयाब रहे। केंद्रीय मंत्री का ओहदा मिला और अब विधानसभा चुनाव में सम्मानजनक सीटें लेने में कामयाब रहे हैं।
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Bihar Chunav 2025 से तय होगा चिराग का राजनीतिक कद
लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी ने पशुपति पारस के बजाय चिराग को तरजीह दी और अब उनके लिए अस्तित्व का संकट बन गया है। सूत्रों की मानें, तो आरजेडी भी उनकी पार्टी को ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं है और कहा तो यहां तक जा रहा है कि चिराग के चाचा अपनी पार्टी आरजेडी में मर्ज कर रहे हैं। इसके बदले में उन्हें महज दो सीटें मिल सकती हैं। दूसरी ओर सीट शेयरिंग से पहले चिराग ने जमकर माहौल बनाया और बीजेपी ने कहीं न कहीं उनकी मंशा का ध्यान रखा है। एलजेपी (आर) को 29 सीटें मिली हैं, जो हर तरह से एक सम्मानजनक आंकड़ा है।
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भतीजे से ही राजनीतिक बाजी हार गए चाचा पशुपति पारस
रामविलास पासवान की मौत के बाद पशुपति पारस को एलजेपी कोटे से मंत्री बनाया गया था। पारिवारिक विवाद की वजह से चिराग और उनकी मां को वह घर भी खाली करना पड़ा जहां उनका परिवार लगभग 3 दशकसे रह रहा था। उस वक्त बहुत से राजनीतिक विश्लेषकों ने चिराग की राजनीति के अंत की भी घोषणा कर दी थी।
हालांकि, खुद को पीएम नरेंद्र मोदी का हनुमान कहने वाले चिराग पासवान ने हार नहीं मानी और वहां से वापसी करके दिखाई है। अब लगभग 4 साल बाद ऐसा लग रहा है कि पशुपति पारस अपने भतीजे से ही राजनीतिक जंग में मात खा गए हैं। चर्चा है कि वह अपने बेटे के लिए आरजेडी से टिकट चाहते हैं और शायद पार्टी मर्जर के बाद वह मिल भी जाए।
Chirag Paswan के सामने अभी कई चुनौतियां
चिराग पासवान के लिए बिहार विधानसभा चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। उन्हें 29 सीटें जरूर मिली हैं, लेकिन यहां बेहतर प्रदर्शन करना काफी मुश्किल रहने वाला है। इसके अलावा, बिहार की राजनीति करने की इच्छा जताने वाले चिराग का भविष्य भी इस पर निर्भर करता है कि इस चुनाव में पार्टी कैसा प्रदर्शन करती है। इस बार बिहार में महागठबंधन के अलावा प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज भी मजबूती से मैदान में है। एनडीए के लिए सत्ता में वापसी चुनौतियों से भरी है, क्योंकि एंटी इनकंबेंसी की काट निकालकर फिर एक बार जनता का विश्वास हासिल करना होगा।
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