Chirag Pawan यूं ही नहीं Bihar Chunav में दिखा रहे दम, 3 साल में अकेले तय किया फर्श से अर्श तक का सफर
Chirag Pawan Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार चिराग पासवान एनडीए के साथ हैं। पिछले चुनाव में वह अलग हो गए थे, लेकिन इस बार उनकी स्थिति काफी अलग है। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी का स्ट्राइक रेट 100 फीसदी रहा है। एनडीए में इस बार उन्हें सम्मानजनक सीटें दिया जाना भी लगभग तय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार उनकी खुले आम सराहना कर चुके हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए चिराग का उत्साह और मेहनत भी जमीन पर दिख रही है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक उन्हें महत्वाकांक्षी बता रहे हैं, लेकिन चिराग के आत्मविश्वास के पीछे उनकी फर्श से अर्श तक की यात्रा भी अहम रही है।
चिराग पासवान के पिता रामविलास पासवान देश के कद्दावर नेताओं में शुमार थे। साल 2020 में उनकी मौत के बाद चिराग ने अपने जीवन का सबसे मुश्किल दौर देखा। साल 2021 में कोविड के दौर में उन्हें अपना घर खाली करना पड़ा और पार्टी भी टूट गई। उस दौरान बिल्कुल अकेले थे और वहां से उन्होंने नए सिरे से संघर्ष कर वापसी की।

Chirag Pawan ने 3 साल में तय की बड़ी दूरी
परिवार और पार्टी टूटने के बाद चिराग पासवान बिल्कुल अकेले थे। एलजेपी के सभी सांसद उनके चाचा पशुपति पारस के साथ चले गए। चिराग के पास न पार्टी बची थी और न संगठन का ही आधार बचा था। उनके पास सिर्फ अपनी सांसदी थी और सामने फिर से पार्टी खड़ी करने की चुनौती।
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तीन साल के अंदर ही उन्होंने अपनी पार्टी खड़ी की और फिर पारिवारिक विवाद को दरकिनार कर आगे बढ़ने में कामयाब रहे। बीजेपी और पीएम मोदी ने भी चिराग की क्षमता पर भरोसा जताया और 2024 लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी एलजेपी (रामविलास) के साथ ही गठबंधन किया। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी का स्ट्राइक रेट 100 फीसदी रहा और उन्हें केंद्रीय मंत्रीमंडल में भी जगह मिली।
चिराग पासवान ने चक्रव्यूह से निकल खुद को किया साबित
चिराग पासवान ने खुद को चक्रव्यूह से निकालकर साबित कर दिया है कि वह अपनी पार्टी चलाने में सक्षम हैं। पिता से मिली राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने के लिए तैयार हैं। उन्हें संगठन खड़ा करने से लेकर उसे आगे बढ़ाना और नेतृत्व देने का हुनर आता है। चिराग की तारीफ पीएम नरेंद्र मोदी भी कई बार कर चुके हैं और अब फिलहाल वह बिहार विधानसभा चुनाव में जोर आजमाइश करने में जुटे हैं।
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Bihar Chunav में चिराग को नजरअंदाज करना BJP के लिए मुश्किल
बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान बार-बार दोहरा रहे हैं कि गठबंधन में सभी पार्टियों को सम्मानजनक सीटें मिलनी चाहिए। उन्होंने एनडीए से बाहर जाने की बात कभी नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा है कि सम्मान के साथ समझौता नहीं होगा। इस चुनाव में बीजेपी और जेडीयू के लिए भी चिराग को नजरअंदाज करना मुमकिन नहीं है। समझें पीछे का सियासी खेल...
⦁ चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस और उनकी पार्टी इस वक्त अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। रामविलास पासवान के उत्तराधिकारी के तौर पर पासवान वर्ग चिराग को स्वीकार कर चुका है। पासवान जाति के वोट प्रदेश में 4 फीसदी के करीब हैं। यह वोट बैंक 18 से 20 सीटों पर चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
⦁ चिराग पासवान सिर्फ अपनी जाति के ही नेता नहीं हैं। अपनी युवा और सौम्य छवि की बदौलत उनकी एक फैन फॉलोइंग पूरे बिहार के युवाओं के बीच है। तेजस्वी यादव के विकल्प के रूप में वह खुद को विकास और रोजगार जैसे मुद्दों को उठाकर पेश कर रहे हैं। 'बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट' जैसे उनके नारों की चर्चा आम लोगों के बीच है।
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NDA में एलजेपी को मिलेगी सम्मानजनक जगह
यही वजह है कि इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी उन्हें अपने साथ लेकर चलना चाहती है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि चिराग अपनी पार्टी के लिए 25 से 30 सीटें मांग रहे हैं। बीजेपी उन्हें 20 सीटें दे सकती है। कुछ सीटों पर समझौते के तहत चुनाव लड़ा जा सकता है, जहां बीजेपी उम्मीदवार एलजेपी के चुनाव चिह्न से लड़ सकते हैं।
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