'रोमांटिक और इंटीमेट होने से पहले मेरी हालत', 44 साल की एक्ट्रेस ने सरेआम बताया अपना हाल, खोला फीलिंग का राज
Archana Shastry: फिल्मों और वेब सीरीज में जब रोमांटिक या इंटीमेट सीन स्क्रीन पर आते हैं, तो दर्शकों को अक्सर लगता है कि स्टार्स के बीच वास्तविक भावनाएं भी मौजूद होंगी। हालांकि साउथ फिल्मों की फेमस एक्ट्रेस अर्चना शास्त्री ने इस धारणा को पूरी तरह गलत बताते हुए फिल्म इंडस्ट्री के एक ऐसे पहलू से पर्दा उठाया है, जिसके बारे में आम लोग बहुत कम जानते हैं।
रोमांस और बोल्ड सीन को लेकर अर्चना शास्त्री का बड़ा खुलासा
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस अर्चना शास्त्री ने खुलकर बताया कि कैमरे पर दिखने वाला रोमांस, बोल्ड सीन और शूटिंग के दौरान का माहौल एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होते हैं। एक्ट्रेस के अनुसार बोल्ड सीन शूट करते समय कलाकारों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

'कैमरे के सामने सिर्फ किरदार होते हैं'
-अर्चना शास्त्री का कहना है कि किसी भी रोमांटिक या बोल्ड सीन की शूटिंग के दौरान कलाकारों का पूरा ध्यान सिर्फ अपने किरदार और परफॉर्मेंस पर होता है। उन्होंने बताया कि सेट पर दर्जनों लोग मौजूद रहते हैं जिनमें निर्देशक, कैमरा टीम, लाइटिंग स्टाफ और अन्य क्रू मेंबर्स शामिल होते हैं।
-एक्ट्रेस ने कहा- ऐसे माहौल में किसी तरह की निजी भावनाओं या रोमांटिक एहसास के लिए कोई जगह नहीं होती। कलाकार केवल अपने रोल को विश्वसनीय तरीके से निभाने की कोशिश करते हैं और उनका फोकस सीन को बेहतर बनाने पर रहता है। मैं भी फिल्म के सीन में रोमांटिक और इंटीमेट होने से पहले फीलिंग लेस हो जाती हूं।
'एक सीन के पीछे छिपी होती है बड़ी टीम की मेहनत'
-अर्चना शास्त्री ने बताया कि दर्शकों को जो कुछ मिनटों का रोमांटिक सीन स्क्रीन पर दिखाई देता है, उसके पीछे पूरी टीम की मेहनत होती है। शूटिंग के दौरान कलाकार लगातार निर्देशक के निर्देशों का पालन करते हैं और हर टेक के बाद ये सुनिश्चित करते हैं कि सीन अपेक्षित स्तर का बना है या नहीं। उनके अनुसार किसी भी सीन को परफेक्ट बनाने के लिए कई बार दोबारा टेक लेने पड़ते हैं और कलाकार उसी प्रक्रिया में बिजी रहते हैं।
-अर्चना ने कहा- जब हम कोई रोमांटिक सीन कर रहे होते हैं, तो हमारे आसपास बहुत सारे क्रू मेंबर होते हैं। इतने सारे लोगों के बीच रोमांटिक फीलिंग्स होना मुमकिन नहीं है। ये बस एक सीन है। वहां मैं एक ऑब्जेक्ट हूं और मेरे साथ एक्टिंग करने वाला इंसान किसी और ऑब्जेक्ट की तरह है। इसके आगे किसी भी इमोशन के लिए कोई जगह नहीं है।
रोमांटिक सीन में सबसे बड़ा दबाव होता है परफॉर्मेंस का
अर्चना शास्त्री ने ये भी बताया कि रोमांटिक सीन्स को निभाते समय कलाकारों पर एक अलग तरह का दबाव होता है। दर्शक ऐसे सीन्सको बहुत बारीकी से देखते हैं और अगर अभिनय स्वाभाविक न लगे तो वह तुरंत लोगों की नजर में आ जाता है। उन्होंने कहा कि कलाकारों की सबसे बड़ी चिंता ये होती है कि सीन वास्तविक और प्रभावशाली लगे। यही कारण है कि उनका पूरा ध्यान अभिनय पर केंद्रित रहता है, न कि किसी व्यक्तिगत भावना पर।
बोल्ड सीन्स के दौरान कैसा होता है अनुभव?
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या बोल्ड या चुनौतीपूर्ण सीन के दौरान कलाकार किसी तरह का रोमांटिक एहसास महसूस करते हैं, तो अर्चना ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसा नहीं होता। उन्होंने बताया कि ऐसे सीन्स में सबसे ज्यादा महसूस होने वाली चीज असहजता और जिम्मेदारी होती है। बड़ी संख्या में मौजूद क्रू के सामने अभिनय करना आसान नहीं होता और कलाकारों का ध्यान केवल अपने काम को पेशेवर तरीके से पूरा करने पर रहता है।
पर्दे और हकीकत के बीच बड़ा अंतर
-अर्चना शास्त्री के इस बयान ने एक बार फिर ये स्पष्ट कर दिया है कि फिल्मों में दिखाई देने वाले रोमांटिक और इंटीमेट सीन पूरी तरह पेशेवर प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। दर्शकों को जो भावनात्मक जुड़ाव स्क्रीन पर दिखाई देता है, वह कलाकारों की अभिनय क्षमता और निर्देशक की प्रस्तुति का परिणाम होता है। यही वजह है कि कई बार पर्दे पर दिखने वाली शानदार केमिस्ट्री का वास्तविक जीवन की भावनाओं से कोई संबंध नहीं होता।
-अर्चना शास्त्री के खुलासे ने फिल्म इंडस्ट्री के उस पहलू को सामने रखा है, जिसे लेकर अक्सर दर्शकों के मन में कई तरह की धारणाएं बनी रहती हैं। एक्ट्रेस के अनुसार रोमांटिक और बोल्ड सीन्स के दौरान कलाकारों का मुख्य उद्देश्य केवल बेहतर अभिनय करना होता है। कैमरे के पीछे की दुनिया में भावनाओं से ज्यादा पेशेवर जिम्मेदारियां और परफॉर्मेंस का दबाव काम करता है।













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