Mamata का एक और मजबूत पिलर ढहा? 10वीं पास TMC सांसद June Maliah बनीं बागी? Satabdi Roy के घर गुटबाजी की कहानी

Bengal Politics TMC Crisis : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में भारी भूकंप आया हुआ है। 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के नेतृत्व में सुवेंद्र अधिकारी मुख्यमंत्री बने। इस हार के बाद पार्टी के अंदरूनी टूट अब लोकसभा तक पहुंच गई है। करीब 20 TMC लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए में शामिल होने या समर्थन देने की इच्छा जताई है। इस विद्रोह में ममता बनर्जी की एक और करीबी और भरोसेमंद नेता जून मालिया भी शामिल हो गई हैं।

देर रात दिल्ली में TMC सांसद शताब्दी रॉय के आवास पर बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंद्र अधिकारी पहुंचे। वहां जून मालिया, बापी हलदार, अबू ताहिर खान, असित कुमार मल समेत कई बागी सांसद मौजूद थे। यह बैठक TMC के टूटने की दिशा में एक और बड़ा कदम मानी जा रही है। ममता बनर्जी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 अब एनडीए के साथ जाने को तैयार दिख रहे हैं। इससे पहले 11 सांसदों ने BJP के बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर बैठक की थी।

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यह सिर्फ संख्या का खेल नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के बाद टीएमसी के अंदर जमा असंतोष, परिवारवाद, भ्रष्टाचार के आरोपों और संगठनात्मक कमजोरियों का फूटना है। आइए इस पूरे संकट को गहराई से समझते हैं - खासकर जून मालिया की भूमिका, उनका सफर और TMC पर क्या असर पड़ेगा...

TMC का संकट: विधानसभा से लोकसभा तक टूट

2026 विधानसभा चुनाव टीएमसी के लिए विनाशकारी साबित हुए। पार्टी 80 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा ने भारी बहुमत हासिल किया। हार के तुरंत बाद 58 TMC विधायकों ने अलग गुट बनाया और निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। अब यही टूट संसद तक पहुंच गई है।

लोकसभा में TMC के पास मूल रूप से 29 सीटें थीं (एक सांसद हाजी नूरुल इस्लाम के निधन के बाद 28)। सूत्रों और बागी नेताओं के दावे के मुताबिक, 20 सांसद अब अलग हो चुके हैं। अगर दो-तिहाई बहुमत (करीब 19) साबित हो गया तो दलबदल विरोधी कानून से बचने का रास्ता बन सकता है, हालांकि TMC नेतृत्व इसे गैर-कानूनी बता रहा है।

Who Is June Maliah: जून मालिया कौन हैं? अभिनेत्री से सांसद तक का सफर

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जून मालिया (June Malia) पश्चिम बंगाल की जानी-मानी चेहरे हैं। उनका जन्म 24 जून 1970 को कोलकाता में हुआ। मूल नाम June Dobe था। उन्होंने कोलकाता के मॉडर्न हाई स्कूल से पढ़ाई की और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ओपन स्कूल से 1988 में 10वीं पास की। यानी औपचारिक शिक्षा सिर्फ 10वीं तक।

1990 के दशक से उन्होंने बंगाली फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में एंट्री की। उनकी लोकप्रिय फिल्मों में Hothat Brishti, The Bong Connection, Zulfiqar, Mitin Mashi, Kishmish जैसी फिल्में शामिल हैं। वे टीवी धारावाहिकों और रियलिटी शोज में भी सक्रिय रहीं। अभिनेत्री के रूप में उनकी पहचान 'मजबूत महिला किरदार' की रही।

राजनीति में एंट्री:

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लंबे समय से महिला मुद्दों और सामाजिक कार्यों से जुड़ी रहीं। पश्चिम बंगाल महिला आयोग से जुड़ाव। ममता बनर्जी की सांस्कृतिक और फिल्मी चेहरे को पार्टी में लाने की रणनीति का हिस्सा बनीं।

  • 2021: मेदिनीपुर विधानसभा सीट से TMC टिकट पर पहली बार विधायक बनीं।
  • 2024: मेदिनीपुर लोकसभा सीट से BJP उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल को हराकर सांसद बनीं। यह सीट BJP का गढ़ मानी जाती थी, इसलिए जून की जीत को ममता बनर्जी की खास पसंद माना गया।

June Maliah Family: जून मालिया की निजी जिंदगी

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TMC सांसद जून मालिया (June Malia) की दो शादियां हुई हैं। हालांकि उनके पहले पति का नाम सार्वजनिक रूप से व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है। जून मालिया की पहली शादी कम उम्र में हुई थी। पहली शादी से जून के दो बच्चे बेटी शिवांगिनी (31 वर्ष) और बेटा शिबेंद्र (30 वर्ष) हैं। दिसंबर 2019 में जून ने व्यवसायी सौरव चटर्जी से दूसरी शादी की। शादी कोलकाता में निजी समारोह में हुई थी।

June Maliah Net Worth: जून मालिया कितनी अमीर?

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  • 2024 लोकसभा हलफनामा के अनुसार:
  • कुल संपत्ति: ₹6.60 करोड़ (लगभग)
  • देनदारियां: ₹1.79 करोड़
  • कोई आपराधिक मामले दर्ज नहीं।

शिक्षा सिर्फ 10वीं होने के बावजूद उनका राजनीतिक प्रभाव और क्षेत्रीय जुड़ाव मजबूत रहा। मेदिनीपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में उनकी पहुंच ने उन्हें ममता के लिए उपयोगी बनाया।

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विद्रोह में जून मालिया की भूमिका को समझें...

शताब्दी रॉय के आवास पर हुई बैठक में जून मालिया की मौजूदगी को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे ममता बनर्जी की करीबी मानी जाती थीं। उनका बागी गुट में शामिल होना ममता कैम्प के लिए बड़ा झटका है।

बैठक में शामिल अन्य सांसद:

  • शताब्दी रॉय
  • बापी हलदार
  • अबू ताहिर खान
  • असित कुमार मल

सुवेंद्र अधिकारी की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि BJP इस विद्रोह को सक्रिय समर्थन दे रही है। इससे पहले भूपेंद्र यादव के घर हुई बैठक में भी कई सांसद शामिल थे।

TMC में विद्रोह की गहराई: कानूनी और राजनीतिक आयाम

बागी सांसदों की रणनीति साफ है - अलग ग्रुपिंग बनाकर एनडीए को समर्थन देना, बिना इस्तीफा दिए। काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि वे अभी भी चीफ व्हिप हैं। TMC का कहना है कि 20 मई को ही उन्हें हटा दिया गया था और कल्याण बनर्जी को नियुक्त किया गया।

दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची):

  • दो-तिहाई बहुमत पर मूल पार्टी में विलय का प्रावधान।
  • अलग गुट बनाकर रहना मुश्किल।
  • TMC ममता गुट के नेताओं का तर्क: सांसद TMC टिकट पर चुने गए, इसलिए इस्तीफा देकर BJP जॉइन करना चाहिए।

महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला और उन्हें 'लालची और गद्दार' कहा। सौगत रॉय ने कहा कि वे TMC के साथ ही रहेंगे। यूसुफ पठान पर भी सवाल उठे। सुखेंदु शेखर रॉय ने पहले ही राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने TMC के '15 साल के अराजक शासन' पर सवाल उठाए।

ममता बनर्जी पर क्या बीत रही है?

ममता बनर्जी इस समय सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। विधानसभा में 58 विधायक विद्रोही। लोकसभा में 20 सांसद बागी। अभिषेक बनर्जी पर परिवारवाद के आरोप। I-PAC जैसी एजेंसियों पर नाराजगी। चुनावी रणनीति की नाकामी। INDIA ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के दौरान ही विद्रोह चरम पर पहुंचा। ममता अब सुलह और समझौते का रुख अपनाती दिख रही हैं, लेकिन टूट की रफ्तार तेज है।

बंगाल राजनीति का बदलता समीकरण

पश्चिम बंगाल में 2011 से TMC का शासन था। शुरू में 'परिवर्तन' का नारा कामयाब रहा, लेकिन बाद में हिंसा, भ्रष्टाचार, संदेशखाली (Sandeshkhali) जैसे मुद्दे, RG Kar कांड और तुष्टीकरण की राजनीति ने जनता को नाराज किया। भाजपा ने 'असली परिवर्तन' का वादा कर फायदा उठाया। सुवेंद्र अधिकारी (पूर्व TMC नेता) अब बीजेपी के टिकट पर मुख्यमंत्री हैं। उनका TMC के पुराने नेताओं से संपर्क विद्रोह को मजबूत कर रहा है।

जून मालिया जैसे चेहरे क्यों टूट रहे हैं?

जून मालिया फिल्मी बैकग्राउंड वाली नेता हैं। ऐसे कई चेहरे (जैसे नुसरत जहां, शताब्दी रॉय आदि) TMC में लाए गए थे। लेकिन हार के बाद असंतोष बढ़ा। वजह है, वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा। अभिषेक बनर्जी का बढ़ता दबदबा। क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान न देना। संगठनात्मक ढांचे का कमजोर होना। जून मालिया का मेदिनीपुर जैसे क्षेत्र से जुड़ाव और उनकी लोकप्रियता उन्हें बागी गुट के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।

TMC का अस्तित्व संकट में

जून मालिया का बागी गुट में शामिल होना ममता बनर्जी के लिए व्यक्तिगत झटका है। वे ममता की करीबी मानी जाती थीं। शताब्दी रॉय के घर हुई बैठक और सुवेंद्र अधिकारी की सक्रियता दिखाती है कि खेल अब सिर्फ दिल्ली तक नहीं, बल्कि कोलकाता की सत्ता तक पहुंच गया है। टीएमसी का भविष्य अनिश्चित है। 15 साल की सत्ता के बाद विपक्ष में बैठकर पार्टी को फिर से खड़ा करना आसान नहीं होगा। दर्शक, कार्यकर्ता और नेता अब बदलाव की मांग कर रहे हैं।

क्या ममता इस संकट को संभाल पाएंगी? क्या जून मालिया जैसे और चेहरे सामने आएंगे? क्या TMC टूटकर दो हिस्सों में बंट जाएगी? बंगाल की राजनीति के ये सवाल आने वाले दिनों में जवाब तलाश रहे हैं।

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