Bihar Chunav 2025: ओवैसी के ऑफर को क्यों ठुकरा रही RJD? AIMIM से दूरी के पीछे क्या है इनसाइड गेम

Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अब कुछ ही महीने बचे हैं और राजनीतिक दल चुनावी मूड में नजर आ रहे हैं। एनडीए (NDA) और इंडिया अलायंस के साथ ही प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी मैदान में है। इधर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी जोर आजमाईश कर रही है। एआईएमआईएम (AIMIM) कई बार महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुकी है, लेकिन आरजेडी की प्रतिक्रिया ठंडी रही है।

लालू यादव को आखिर ओवैसी से परहेज क्यों हैं?

बिहार के राजनीतिक समीकरण देखें, तो मुस्लिम समुदाय 90 के दशक से ही आरजेडी के साथ रहा है। ओवैसी को अपने साथ जोड़ना आरजेडी के लिए ज्यादा असुविधाजनक स्थिति है। दूसरी ओर एआईएमआईएम के लिए दोनों ही स्थितियां अनुकूल हैं। अगर उन्हें महागठबंधन में जगह मिलती है, तो भी अच्छा है। अगर वह अकेले चुनाव लड़ते हैं, ऐसी स्थिति में भी वह आरजेडी और कांग्रेस को ही नुकसान पहुंचाएंगे। समझें ओवेसी से राहुल गांधी और तेजस्वी यादव दोनों क्यों कतरा रहे हैं।

Bihar Chunav 2025

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Bihar Chunav 2025: असदुद्दीन ओवैसी के लिए क्यों नहीं राजी लालू?

- AIMIM ने सीमांचल क्षेत्र में 20 सीटों पर चुनाव लड़ा और पांच सीटें जीतीं थी। इस इलाके में आरजेडी का प्रदर्शन कमजोर रहा था और इसकी वजह वोट बैंक में सेंध लगना ही था। आरजेडी और कांग्रेस के वोट बैंक में एआईएमआईएम ने सेंध लगाई जिसका फायदा एनडीए को हुआ था।

- एआईएमआईएम को भाव नहीं देने के पीछे सबसे बड़ी वजह आरजेडी का अपने वोट बैंक को अहम संदेश देना माना जा रहा है। बिहार में लालू यादव की पार्टी का वोट बैंक मुसलमान और यादव हैं। ओवैसी को शामिल करना लालू के लिए इसी वजह से असहज है कि अगर उन्हें गठबंधन में लाते हैं, तो ओवैसी मुसलमानों के सर्वमान्य नेता की तरह खुद को पेश कर सकते हैं।

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- कांग्रेस भी एआईएमआईएम से गठबंधन में ज्यादा रुचि नहीं ले रही है, क्योंकि इसकी वजह है कि ओवैसी को आम तौर पर मुस्लिम वर्ग का नेता माना जाता है। गठबंधन में आने पर रिवर्स पोलराइजेशन की संभावना है और ऐसे में दलितों के वोट की उम्मीद कर रही कांग्रेस और आरजेडी दोनों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

- महागठबंधन में जो भी चल रहा है वह फिलहाल एनडीए के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है। ओवैसी अगर अकेले लड़ेंगे, तो कांग्रेस और आरजेडी के वोट बैंक में सेंध लगाएंगे। अगर महागठबंधन में शामिल होते हैं तब भी रिवर्स पोलराइजेशन का फायदा एनडीए को मिल सकता है।

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