Bihar Chunav 2025: इन 52 सीटों से ही होगा इस बार भी फैसला! यहीं से निकलेगी सत्ता की चाबी
Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, राजनीतिक संग्राम भी तेज हो रहा है। एनडीए ने सीट शेयरिंग का ऐलान कर दिया है जबकि महागठबंधन में अभी वार्ता ही चल रही है। चुनावी उठा-पटक के दौर के बीच ही एक बार फिर नजरें उन 52 सीटों पर टिक गई हैं, जो इस बार सत्ता की कुंजी साबित हो सकती हैं। 2020 के चुनाव में ये सीटें बेहद करीबी अंतर से जीती गई थीं।
कुछ सीटों पर हार-जीत का फैसला कुछ सौ वोटों से हुआ था। यही सीटें एक बार फिर एनडीए (NDA) और महागठबंधन दोनों के लिए निर्णायक बन सकती हैं। इनमें सीमांचल की सीटों से लेकर नालंदा, शेखपुरा और सिवान की भी कई सीटें शामिल हैं। इस बार दो प्रमुख गठबंधन के अलावा प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज भी मैदान में है। त्रिकोणीय मुकाबला होने की वजह से इसकी आशंका है कि चुनाव में हार-जीत का अंतर और भी कम हो सकता है।

बिहार चुनाव 2020 में 32 सीटों पर जीत का अंतर था बेहद मामूली
2020 के विधानसभा चुनाव में बिहार की हिलसा (Hilsa) सीट सबसे चर्चित रही थी, जहां जेडीयू उम्मीदवार ने महज 12 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। वहीं बरबीघा (Barbigha) में 133 वोटों से और रामगढ़ (Ramgarh) में 189 वोटों से परिणाम तय हुआ। इसके अलावा भोरे, देहरी, बछवारा और चकाई जैसी सीटों पर भी जीत का अंतर 600 वोटों से कम था। कुछ सीटें ऐसी थीं जहां जीत का अंतर 1000 से कम था। कुल 32 सीटें ऐसी थीं जहां जीत का अंतर 1500 से भी कम था।
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Bihar Chunav: 52 सीटें बनेंगी गेंमचेंजर?
⦁ इन 52 सीटों में से 20 पर NDA ने पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में बढ़त हासिल की।
⦁ वहीं महागठबंधन ने उन 6 सीटों पर बढ़त बनाई, जहां 2020 में NDA विजयी रहा था।
⦁ इन सीटों पर जातीय समीकरण, स्थानीय उम्मीदवारों की छवि और गठबंधन का तालमेल अहम भूमिका निभाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इन सीटों पर वोटिंग ट्रेंड पूरे राज्य के चुनाव परिणाम की दिशा तय कर सकता है।
किन जिलों में हैं ये 52 सीटें
⦁ नालंदा, शेखपुरा, औरंगाबाद, और सिवान जिलों की कई सीटें इस लिस्ट में शामिल हैं।
⦁ मगध क्षेत्र की सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देखा जा सकता है।
⦁ कोसी और सीमांचल क्षेत्र में महागठबंधन अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है, जबकि NDA ने यहां नए सामाजिक समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं।
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त्रिकोणीय मुकाबले ने बढ़ाई NDA-महागठबंधन की टेंशन?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2025 के चुनाव में भी इन 52 सीटों का गणित अहम है। यही तय करेगा कि पटना की सत्ता पर NDA काबिज रहेगा या महागठबंधन वापसी करेगा। दलों के लिए यह सिर्फ सीटें नहीं बल्कि सत्ता का समीकरण हैं। पिछली बार मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के ही बीच में था, लेकिन इस बार जनसुराज भी मैदान में है। सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी 24 सीटों पर जीत का दम भर रहे हैं। बिहार की राजनीति के जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला होने की वजह से चुनावी हार-जीत का अंतर बहुत कम रह सकता है।
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