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Bihar Chunav: बिहार की महिला वोटर बनेंगी 'गेम चेंजर'! NDA के 10 हजार 'कैश वादे' के जवाब में अब RJD का नया दांव

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले राज्य में महिला वोटरों को लुभाने की होड़ तेज हो गई है। एनडीए और महागठबंधन (MGB) दोनों गठबंधन महिलाओं के लिए नकद सहायता योजनाओं के जरिये अपना-अपना वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

जहां सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने हाल ही में महिलाओं को ₹10,000 की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है, वहीं विपक्षी महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने इसका तीन गुना यानी ₹30,000 प्रति वर्ष देने का वादा किया है।

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"माई बहिन मान योजना" - महागठबंधन का नया दांव

तेजस्वी यादव ने ऐलान किया कि अगर राजद-कांग्रेस+ गठबंधन सत्ता में आता है, तो "माई बहिन मान योजना" के तहत राज्य की हर महिला को सालाना ₹30,000 की सहायता राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह राशि हर साल 14 जनवरी (मकर संक्रांति) को महिलाओं के खातों में डाली जाएगी ताकि "महंगाई के दौर में दीर्घकालिक आर्थिक राहत" मिल सके।

तेजस्वी ने कहा, एनडीए की योजना दिखावे की है। बताइए, कोई 10 हजार रुपये से व्यवसाय कैसे शुरू कर सकता है? बिहार की महिलाएं अब सब समझ चुकी हैं। तेजस्वी ने यह भी जोड़ा कि इस योजना के तहत पांच साल में महिलाओं को कुल ₹1.5 लाख रुपये का लाभ मिलेगा।

जीविका दीदियों के लिए खास पैकेज

तेजस्वी यादव ने बिहार की 'जीविका दीदियों' (सेल्फ हेल्प ग्रुप्स से जुड़ी महिलाएं) के लिए भी कई वादे किए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सरकार बनी तो इन महिलाओं को हर महीने ₹2,000 की मदद दी जाएगी, साथ ही ₹5 लाख का बीमा कवरेज और लोन ब्याज माफी भी दी जाएगी। उन्होंने एनडीए सरकार को "कॉपीकैट सरकार" बताते हुए कहा कि वे केवल महागठबंधन की नीतियों की नकल कर रहे हैं।

RJD की चुनाव आयोग से शिकायत

महिलाओं को ₹10,000 देने की एनडीए की योजना अब विवादों में घिर गई है। राजद सांसद मनोज झा ने चुनाव आयोग (EC) को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने 17, 24 और 31 अक्टूबर को महिलाओं के खातों में पैसा भेजा, जबकि 6 अक्टूबर को ही आचार संहिता लागू हो चुकी थी।

झा ने दावा किया कि अगला ट्रांजैक्शन 7 नवंबर को निर्धारित है, यानी पहले चरण के मतदान के तुरंत बाद और दूसरे चरण से चार दिन पहले। उन्होंने इसे "मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन" बताते हुए कहा कि यह "स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की भावना को कमजोर करता है।"

जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर (PK) ने इस स्कीम को "चुनावी रिश्वत" करार दिया। उन्होंने कहा "पांच साल तक जनता से भ्रष्टाचार के जरिये पैसा वसूला गया और अब चुनाव से ठीक पहले उन्हीं के पैसे से ₹10,000 बांटे जा रहे हैं। यह रिश्वत है, राहत नहीं।"

महिला वोटर बने बिहार की 'किंगमेकर'

बिहार की सियासत में महिला वोटरों की भूमिका पिछले एक दशक में बेहद निर्णायक रही है। 2010 से लेकर अब तक हर विधानसभा चुनाव में महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा है। 2020 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 59.7% जबकि पुरुषों का 54.7% था।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं को सशक्त करने के लिए कई योजनाएं चलाईं -

  • पंचायत चुनावों में 50% आरक्षण
  • स्कूली छात्राओं के लिए साइकिल योजना
  • महिला समूहों के लिए रोजगार सहायता

महिला वोटरों पर निर्भर बिहार का भविष्य

2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन और एनडीए के बीच का अंतर बहुत मामूली था। आंकड़ों के अनुसार, 18-29 आयु वर्ग की करीब 40% युवा महिलाएं एनडीए को वोट देने पहुंची थीं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के चुनाव में महिला वोटर वही फैक्टर होंगी जो सत्ता का फैसला तय करेंगी।

इस बार मुकाबला सिर्फ घोषणाओं का नहीं बल्कि भरोसे का है क्या महिलाएं नीतीश-मोदी सरकार के विकास मॉडल पर टिकेंगी या तेजस्वी यादव के आर्थिक सशक्तिकरण के वादे पर भरोसा करेंगी? इसका जवाब 14 नवंबर को चुनाव परिणाम के साथ सामने आएगा।

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