Bihar News: छपरा ज़िले में 'Rasgulla Gali' की अनोखी है कहानी, जानिए किस वजह से है मशहूर?
Bihari Rasgulla: बिहार में रसगुल्ला की बात करते ही बढ़इया के रसगुल्ले का ख्याल आता है। छपरा जिला का रसगुल्ला भी स्वाद में लाजवाब है। यहां तक के एक गली का नाम ही लोगों ने रसगुल्ला गली रख दिया।

Chapra Rasgulla: बिहार छपरा जिले में करीब सौ साल से एक बंगाली परिवार रसगुल्ले का कारोबार कर रहा है। इनके रसगुल्ले इतने ज़्यादा मशहूर हैं कि आस-पास के जिले से भी लोग रसगुल्ले का जायका लेने पहुंच जाते हैं। इनके रसगुल्ले इतने मशहूर हुए की जहां उनकी दुकान थी, उस गली का लोगों ने रसगुल्ला गली नाम ही रख दिया।
100 साल से बंगाली परिवार ने घोष मिष्ठान नाम से रसगुल्ले बनाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे छपरा में घोष के रसगुल्ले मशहूर होते गए। दूर दराज़ इलाके से भी लोग घोष मिष्ठान के रसगुल्ले लेने पहुंचते हैं। रसगुल्ला कारोबारी अभिजीत घोष की ने बताया कि, रसगुल्ला बनाने की शुरुआता उनके पिता ने की थी।
Recommended Video

पिता की विरासत को अभिजीत आगे ले जा रहे हैं। अभिजीत की मानें तो उनके पिता के हाथों के बने रसगुल्ले खाने वाले लोग आज भी उनके दुकान पर आते हैं। पिता जी के हाथों से बने से रसगुल्ले का स्वाद आज भी पाकर वह लोग काफी खुश होते हैं। बधाई और शुभकामनाएं देकर जाते हैं।
आपको बता दें कि पहले हाथों से रसगुल्ले बनाए जाते थे, लेकिन अब डिमांड बढ़ने की वजह से रसगुल्ला बनाने वाली ऑटोमेटिक मशीन लगा दी गई है। रोज़ान 1 हज़ार रसगुल्ले बनाए जाते हैं। मशीन से भले ही रसगुल्ले बनाए जा रहे हैं, लेकिन पुराने तरीक़े के साथ शुद्धता और क्वालिटी का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
छपरा में कई लोगों ने घोष मिष्ठान के नाम मिठाई का कारोबार शुरू किया लेकिन लोगों को पसंद नहीं आया। आज भी 100 साल पुराने जायके वाला रसगुल्ला छोटी सी दुकान में मिल रहा है। अभिजीत घोष का कहना है कि छपरा में उन्हें काफी प्यार मिला, इसलिए अब उनका परिवार यही बस गया है। लोगों की बेशुमार मोहब्बत की वजह से रसगुल्ले बनाने का कारोबार जारी रहेगा। अभिजीत खे यहां 10 रुपये प्रति पीस की दर से एक रसगुल्ला मिलता है, वहीं 250 रुपये प्रति किलो छेना रसगुल्ला मिलता है।
छपरा में कई लोगों ने घोष मिष्ठान के नाम मिठाई का कारोबार शुरू किया लेकिन लोगों को पसंद नहीं आया। आज भी 100 साल पुराने जायके वाला रसगुल्ला छोटी सी दुकान में मिल रहा है। अभिजीत घोष का कहना है कि छपरा में उन्हें काफी प्यार मिला, इसलिए अब उनका परिवार यही बस गया है। लोगों की बेशुमार मोहब्बत की वजह से रसगुल्ले बनाने का कारोबार जारी रहेगा। अभिजीत के यहां 10 रुपये प्रति पीस की दर से एक रसगुल्ला मिलता है, वहीं 250 रुपये प्रति किलो छेना रसगुल्ला मिलता है।
ये भी पढ़ें: ग्रेजुएट चाय वाली के बाद अब सुर्खियों में Matric Fail Chai Wala, पढ़िए संघर्ष भरी कहानी












Click it and Unblock the Notifications