ग्रेजुएट चाय वाली के बाद अब सुर्खियों में Matric Fail Chai Wala, पढ़िए संघर्ष भरी कहानी
Matric Fail Chai Wala नाम रखने के लिए पंकज शर्मा (शानू) को लोगों ने मना किया था, लेकिन कुछ अलग नाम रखने की चाह में शानू ने इस नाम से टी-स्टॉल खोला है। नालंदा ज़िले में युवक सुर्खियों में छाया हुआ है।
Matric Fail Chai Wala: बिहार में ग्रेजुएट चाय वाली, कैदी चाय वाला, एमबीए चाय वाला और बेवफा चाय वालों ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं। वहीं अब बिहार के नालंदा जिले में मैट्रिक फेल चाय वाला की चर्चा ज़ोरों पर है। पंकज शर्मा शिक्षा में तो ज्यादा कामयाब नहीं हो पाए लेकिन उन्होंने चाय के व्यापार से अपनी एक अलग पहचान ज़रूर बना ली है। पढ़ाई में नाकाम होने के बाद बाद काफी मुश्किलों से उन्होंने टी-स्टॉल तक का सफर तय किया है। बिहार शरीफ मुख्यालय (नालंदा ज़िला) के नई सराय मोहल्ले के निवासी राम रतन शर्मा के बेटे पंकज शर्मा (शानू) के संघर्ष भरे सफर से हम आपको रूबरू करवाने जा रहे हैं।

‘मैट्रिक फेल चाय वाला’ के नाम से चला रहे टी स्टॉल
मैट्रिक फेल चाय वाला के नाम से पंकज शर्मा उर्फ़ शानू क़रीब डेढ़ साल से टी स्टॉल चलाकर अपने घर की ज़िम्मेदारी उठा रहे हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की वजह से शानू सही से पढ़ाई नहीं कर सके। 2019 में मैट्रिक की परीक्षा दी लेकिन फेल हो गए। घर की परेशानी को देखते हुए उन्होंने स्वरोज़गार का फ़ैसला लिया। शानू ने पिता के इलाज से बचे पैसे से सोहसराय के जलालपुर से टी स्टॉल की शुरुआत की। ज्यादा दिनों तक वहां कारोबार नहीं कर सके, उनके टी स्टॉल को जलालपुर से हटा दिया गया।
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चाय पीने वालों की लगती है कतार
जलालपुर से टी स्टॉल हटाने के बाद उन्होंने सरकारी बस पड़ाव काशितकिया मोहल्ले में चाय की दुकान खोली। एक साल तक वहां पर कारोबार करने के बाद उनके टी स्टॉल को वहां से भी हटा दिया गया। नए साल के मौके पर शानू ने भराव पर स्थित एलआईसी ऑफिस के बगल में अतिथि रेस्टुरेंट के बाहर टी स्टॉल खोला है। ठंड ज़्यादा होने के की वजह से चाय पीने वालों की वहां कतार लग रही है। दोपहर से लेकर देर शाम तक शानू क़रीब 40 लीटर दूध की चाय बेच लेते हैं। रोज़ाना वह डेढ़ सौ से दो सौ कप चाय बेच ले रहे हैं। इससे उनकी आमदनी भी अच्छी हो रही है। टी स्टॉल से हो रही इनकम से ही शानू अपने परिवार की देख भाल कर रहे हैं।

घर की ज़िम्मेदारियों को देखते हुए लिया फ़ैसला
शानू के परिवार में माता पिता और एक छोटा भाई है, वह अपने कारोबार से हो रहे इनकम से शानू अपने भाई की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। पंकज शर्मा (शानू) ने बताया कि पिता राम रतन शर्मा कार्पेंटर का काम करते थे। दमागी हालत ठीक नहीं होने की वजह से वह काम नहीं कर पा रहे हैं। घर में बड़ा होने की वजह से सारी जिम्मेदारियां उन्हीं पर ही आ गई। मैट्रिक का इम्तेहान सिर पर था, मां ने किसी तरह जमा पूंजी से घर चलाया। इम्तेहान ख़त्म होने के बाद पिता के इलाज में कुछ वक्त गुजर गया। मैट्रिक परीक्षा का परिणाम आया तो उसमें भी फेल हो गए। बीमार पिता का इलाज, छोटे भाई की पढ़ाई के साथ घर की ज़िम्मेदारियों को देखते हुए चाय बेचने की शुरुआत की।

टी स्टॉल का मैट्रिक फेल चाय वाला क्यों रखा नाम ?
शानू ने बाताया कि मैट्रिक फेल चाय वाला नाम से टी स्टॉल खोलने से कुछ जानने वाले लोगों ने मना किया था। लेकिन सोनू ने सोचा कि अपने नाम से ज्यादातर लोग दुकान खोलते हैं, इसलिए वह कुछ अलग नाम रखना चाहते थे। मैट्रिक फेल होने का टेंशन भी था, बस इसलिए उन्होंने मैट्रिक फेल चाय वाला नाम से दुकान खोल ली। आज इस नाम से ही टी स्टॉल चला रहे हैं। शानू टी स्टॉल के चलाने के साथ ही कंप्यूटर से रिलेटेड कुछ टेक्निकल डिग्री भी ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि टी स्टॉल से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी तरह से लोगों का प्यार मिलता रहा तो स्टॉल को और बढ़ाऊंगा, जिसमें चाय के दूसरे फ्लेवर और फ़ास्ट फ़ूड जैसे खाने पीने की चीज़ों को भी रखूंगा।
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