Bankipur Upchunav: कौन हैं BJP उम्मीदवार अभिषेक कुमार बंटी? किस जाति से? बांकीपुर में PK को देंगे चुनौती?
Bankipur Upchunav Abhishek Kumar Bunty: बिहार की राजनीति में इस समय पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट टॉक ऑफ द टाउन बनी हुई है। बीजेपी के कद्दावर नेता और मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस हॉट सीट पर उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने लंबी माथापच्ची के बाद आखिरकार अपने एक जमीनी और युवा चेहरे अभिषेक कुमार 'बंटी' पर दांव लगा दिया है।
30 जुलाई को होने जा रहे इस मतदान में मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय हो चला है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार मैदान में सिर्फ पारंपरिक पार्टियां नहीं हैं, बल्कि खुद जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) ताल ठोक रहे हैं, तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी अपनी मजबूत दावेदार रेखा कुमारी गुप्ता को उतारकर मुकाबले को कांटे का बना दिया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक कुमार बंटी कौन हैं?

कौन हैं बीजेपी के नए चेहरे अभिषेक कुमार बंटी? (Who is BJP Candidate Abhishek Kumar Bunty)
- बीजेपी ने बांकीपुर के रण को फतह करने के लिए किसी बड़े बाहरी चेहरे के बजाय अपने एक कर्मठ और स्थानीय संगठनकर्ता पर भरोसा जताया है। 40 साल से कम उम्र के युवा नेता अभिषेक कुमार उर्फ बंटी लंबे समय से पटना की जमीनी राजनीति में एक्टिव रहे हैं। अभिषेक सिन्हा बंटी लगभग 27 सालों से बीजेपी के सक्रिय कार्यकर्ता हैं।
- बंटी को पूर्व विधायक और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन का सबसे भरोसेमंद और राइट हैंड माना जाता है। उन्होंने नितिन नबीन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर क्षेत्र के कई बड़े कार्यक्रमों और चुनावी मैनेजमेंट को संभाला है।
- सांगठनिक अनुभव की बात करें तो बंटी फिलहाल बिहार प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा (भाजयुमो) के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वे पटना महानगर युवा मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में युवाओं को पार्टी से जोड़ने का बड़ा काम कर चुके हैं। संगठन में उनके काम को देखते हुए वे पटना महानगर के मंडल मंत्री और महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं।

किस जाति से हैं अभिषेक कुमार बंटी? बांकीपुर का क्या है जातीय समीकरण? (Caste Equation of Bankipur)
बांकीपुर सीट की सबसे खास बात यह है कि यहां का चुनावी गणित बिहार के बाकी हिस्सों जैसा नहीं है। यहां 'लाला (कायस्थ) बनाम ग्वाला (यादव)' जैसी कोई लड़ाई नहीं दिखती, बल्कि फॉरवर्ड यानी सवर्ण मतदाता ही यहां की जीत-हार तय करते हैं।
- बीजेपी ने टिकट बांटते समय इस समीकरण का पूरा ख्याल रखा है। अभिषेक कुमार सिन्हा बंटी कायस्थ समाज से आते हैं, जिसे बिहार की स्थानीय बोलचाल में 'लाला' भी कहा जाता है।
- बांकीपुर में करीब 3,79,420 कुल वोटर्स हैं, जिनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी लगभग 70,000 वोटों के साथ कायस्थ समाज की ही है。 इसी वजह से 1995 से लेकर अब तक यहां लगातार कायस्थ उम्मीदवार ही जीतते आए हैं।
- कायस्थों के अलावा इस शहरी विधानसभा में भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य समाज के मतदाता भी बहुत बड़ी तादाद में हैं, जो सालों से बीजेपी का सबसे पक्का और पारंपरिक वोट बैंक रहे हैं।
- वैश्य समुदाय यहां दूसरे नंबर पर सबसे प्रभावी भूमिका में है। इसके अलावा अतिपिछड़ा वर्ग में चंद्रवंशी समाज, ओबीसी में यादव और कुर्मी, करीब 31 हजार दलित-महादलित और 30 हजार से ज्यादा मुस्लिम मतदाता भी चुनावी गणित को प्रभावित करने का दम रखते हैं।

तीन दशक पुराना बीजेपी का अभेद्य किला है बांकीपुर
साल 2010 में नए परिसीमन के बाद वजूद में आई बांकीपुर सीट को बीजेपी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। अगर इतिहास पर नजर डालें तो पिछले तीन दशकों से इस सीट पर एक ही परिवार का एकछत्र राज रहा है।
- नितिन नबीन परिवार का दबदबा: नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा यहां से लगातार 4 बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते। उनके बाद उनके बेटे नितिन नवीन ने इस विरासत को आगे बढ़ाया और लगातार 5 बार विधायक बनकर रिकॉर्ड बनाया।
- रिकॉर्ड वोट शेयर: नवंबर 2025 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को यहां एकतरफा जीत मिली थी। पार्टी को कुल 63.25% वोट (98,299 वोट) मिले थे, जबकि उस वक्त जन सुराज के पाले में सिर्फ 5% के आसपास यानी 7,717 वोट ही आ पाए थे। अब जब नितिन नवीन ने मार्च 2026 में राज्यसभा सांसद बनने के बाद यह सीट खाली की है, तो बंटी के सामने इस पारिवारिक और पार्टी के गढ़ को बचाए रखने की बड़ी चुनौती है।

'मोदी ब्रांड' के सामने क्या टिक पाएंगे प्रशांत किशोर?
इस बार का मुकाबला आम चुनावों से बिल्कुल अलग है क्योंकि चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने सीधे बीजेपी के इस सबसे मजबूत किले को ही ढहाने की चुनौती चुन ली है। प्रशांत किशोर का पूरा फोकस रोजगार, बेहतर शिक्षा और साफ-सुथरे प्रशासन जैसे मुद्दों को उठाकर सवर्ण वर्ग के पढ़े-लिखे युवाओं और प्रोफेशनल वोटर्स को अपनी तरफ खींचने पर है। इस वजह से यह लड़ाई किसी पार्टी के मुकाबले से ऊपर उठकर 'मोदी ब्रांड बनाम प्रशांत किशोर ब्रांड' की शक्ल ले चुकी है।
आरजेडी के फैसले से कांग्रेस में भारी नाराजगी
एक तरफ जहां एनडीए के साझा उम्मीदवार के रूप में अभिषेक कुमार बंटी मजबूती से खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन में टिकट को लेकर रार मच गई है। आरजेडी ने वैश्य समाज से आने वाली रेखा कुमारी गुप्ता को फिर से अपना कैंडिडेट बनाया है, जो पिछले चुनाव में भी नितिन नवीन से हार चुकी थीं।
आरजेडी के इस एकतरफा फैसले से कांग्रेस बुरी तरह भड़की हुई है, क्योंकि कांग्रेस बांकीपुर को अपनी पारंपरिक सीट मानती आ रही थी और वह यहां से एक साझा उम्मीदवार उतारना चाहती थी। सिर्फ गठबंधन ही नहीं, बल्कि खुद आरजेडी के अंदर भी रेखा गुप्ता के नाम को लेकर भारी विरोध देखने को मिल रहा है। पटना पहुंचे आरजेडी के सीनियर नेता सुरेंद्र यादव ने सरेआम पत्रकारों से कह दिया, "हम उनको जानते ही नहीं हैं। जब नहीं जानते हैं तो काहे जबरदस्ती बोल रहे हो।" विपक्ष की इस आपसी कलह और कमजोर चुनावी मैनेजमेंट का सीधा फायदा बीजेपी के युवा चेहरे अभिषेक कुमार बंटी को मिलता हुआ दिख रहा है।














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