रावण ब्राह्मण था या आदिवासी? मूलनिवासी युवा एवं छात्र संगठन मंडला ने रावण को बताया गोंड़ महापुरुष
मूलनिवासी युवा एवं छात्र संगठन में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए रावण दहन पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने रावण को गोंड़ महापुरुष बताया है
भोपाल,5 अक्टूबर। मंडला में मूल निवासी युवा एवं छात्र संगठन ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। दरअसल बीते दिनों इस संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर रावण दहन पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने रावण को गोंड महापुरुष बताते हुए चेतावनी दी थी कि रावण दहन पर विराम नहीं लगा तो वे विरोध स्वरूप राम दहन करेंगे। हालांकि इस बयान के बाद वहां हालत खराब हो गए थे और संगठन ने मामले को बिगड़ते देख माफी मांग ली थी,लेकिन इसके बाद एक नया सवाल खड़ा हो गया कि रावण ब्राह्मण था या फिर आदिवासी गोंड़।

रावण के पुतले का दहन नहीं बल्कि की जाती है रावण की पूजा
मध्यप्रदेश के मंडला में एक ऐसा गांव है, जहां पर रावण के पुतले का दहन नहीं बल्कि रावण की पूजा की जाती है। यह गांव जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है। ग्राम पंचायत सागर का डूंगरिया गांव रावण की पूजा के लिए जाना जाता है। यहां पर रावण का मंदिर भी है।आदिवासियों के अनुसार रावण उनके पूर्वज थे और जंगलों में वास करते थे जंगलों में रहने वाले राक्षस कुल के लोग ही उनके पूर्वज है। इसलिए उनके पूर्वज रावण की पूजा करते थे।

रावण कोयावंशी है जिसका अर्थ है कि गुफाओं में प्रकट हुआ
मूलनिवासी युवा एवं छात्र संगठन ने कहा कि रावण के जलने से उन्हें दुख होता है। उन्होंने कहा कि रावण गोंड महापुरुष थे और उनका ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए। आदिवासी समाज के लोगों का कहना है कि रावण आदिवासी समुदाय से था। उनका कहना है कि रावण कोयावंशी है जिसका अर्थ है कि गुफाओं में प्रकट हुए। उनका मानना है कि रावण यहां के मूल निवासी और आदिवासियों के पूर्वज है। ग्रामीण रावण कोयावंशी मानकर उसकी पूजा करते हैं।

रावण और रावन के बीच लोगों को गलतफहमी
हालांकि कुछ आदिवासी समाज के नेता रावण को आदिवासी नहीं मानते है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र धुर्वे ने मूलनिवासी संगठन की बातों का खंडन किया और कहा कि रावण नाम का कोई व्यक्ति ना आदिवासी समाज का राजा हुआ है और ना ही देव हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आदिवासी वोट बैंक को पाने के लिए भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि रावण और रावन के बीच लोगों को गलतफहमी है। रावण रामायण का एक पात्र हैं, जबकि रावन गोंडी व्यवस्था का एक हिस्सा है। इसी गलतफहमी की वजह से अक्सर आदिवासी गोंड समाज के लोग रावण को अपना बता देते हैं।

रावण का गोत्र सारस्वत ब्राह्मण
रावण ब्राह्मण था या फिर आदिवासी इसको लेकर जब हमने वेदों के प्रख्यात आचार्य राजेंद्र प्रसाद से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि रावण का गोत्र सारस्वत ब्राह्मण था इसी के कारण हो परम शिव भक्त कूटनीतिक, वेदों शास्त्रों का ज्ञाता, परम प्रतापी और महाज्ञानी था। लेकिन रावण की माता राक्षसी के किसी के कारण उसने राक्षसी प्रवृत्तियों को अपनाया। ये कहना बिल्कुल गलत होगी कि रावण किसी आदिवासी समुदाय से था, क्योंकि रामचरितमानस और वेद व्यास की रामायण दोनों में इसका उल्लेख नहीं मिलता है। रावण रसायन शास्त्र, ज्योतिष का प्रखंड विद्वान था। उन्होंने बताया कि मेघनाथ के जन्म के समय रावण ने सभी ग्रहों का अपने 11वें घर में बंद कर लिया था ताकि उसका पुत्र मेघनाथ का कोई वध ना कर सके।
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