MP News: विजयपुरा के आदिवासी मजदूरों की घर वापसी, सिंधिया की मदद से टूटी बंधुआगिरी की बेड़ियां, जानिए कैसे
MP News Tribal: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के रन्नौद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम विजयपुरा के करीब 80 आदिवासी मजदूरों की सकुशल वापसी से गांव में राहत और खुशी का माहौल है। महिला, पुरुष और बच्चों सहित ये सभी मजदूर महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में फंसे हुए थे, जहां उन्हें काम दिलाने के नाम पर ले जाकर अमानवीय हालात में रखा गया था।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हस्तक्षेप और दोनों राज्यों की पुलिस के समन्वय से सभी मजदूरों को सुरक्षित मुक्त कराकर उनके गांव वापस लाया गया।

इंदौर में काम का झांसा, महाराष्ट्र में बंधक बना लिए गए
वापस लौटे मजदूरों ने बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें इंदौर में रोजगार दिलाने का भरोसा दिया था। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र के सोलापुर जिले ले जाया गया, जहां एक फार्म पर बंधक जैसे हालात में रखा गया। मजदूरों के अनुसार उनसे सुबह 6 बजे से लेकर रात करीब 8 बजे तक जबरन काम कराया जाता था। काम के दौरान लाठियों के बल पर निगरानी रखी जाती थी और जरा सी गलती पर मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं।
महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा
मजदूरों का आरोप है कि फार्म पर महिलाओं और बच्चों को भी साथ रहने के लिए मजबूर किया गया। बाहर जाने या किसी से संपर्क करने की इजाजत नहीं थी। कई बार भोजन और मजदूरी के नाम पर भी उन्हें धोखा दिया गया। भय और दबाव के कारण मजदूर वहां से भाग भी नहीं पा रहे थे।
सूचना मिलते ही सक्रिय हुए सिंधिया
मामले की जानकारी सामने आते ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तत्काल संज्ञान लिया और मजदूरों की सुरक्षित वापसी के निर्देश दिए। उनके हस्तक्षेप के बाद प्रशासन हरकत में आया। रन्नौद थाना प्रभारी अरविंद चौहान ने महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी साझा की।
दोनों राज्यों की पुलिस का समन्वय
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र पुलिस के आपसी समन्वय से सोलापुर जिले में कार्रवाई कर सभी मजदूरों को वहां से मुक्त कराया गया। इसके बाद उन्हें सुरक्षित साधनों से मध्य प्रदेश लाकर उनके गांव विजयपुरा पहुंचाया गया।
जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं की अहम भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में कोलारस विधायक महेंद्र सिंह यादव, भाजपा नेता योगेंद्र रघुवंशी (बंटी भैया), अरविंद दांगी सरपंच और रन्नौद थाना प्रभारी अरविंद चौहान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन सभी के प्रयासों से प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हुई और मजदूरों की घर वापसी संभव हो सकी।
गांव में राहत, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
मजदूरों की वापसी के बाद विजयपुरा गांव में राहत का माहौल है। परिजन भावुक नजर आए और प्रशासन का आभार जताया। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मामले में शामिल एजेंटों और फार्म संचालकों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी भी गरीब मजदूर के साथ ऐसा अन्याय न हो।
यह मामला एक बार फिर बताता है कि किस तरह रोजगार के नाम पर आदिवासी और गरीब मजदूरों को बंधुआ श्रम के दलदल में धकेल दिया जाता है, और समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप ही उन्हें इस शोषण से मुक्त करा सकता है।
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