नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी का फर्जीवाड़ा, शिकायतों के बावजूद दी गई मान्यता, भोपाल क्राइम ब्रांच पहुंची NSUI
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार ने एक बार फिर से सिर उठाया है। छात्र संगठन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) ने गुरुवार को एमपी नगर स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचकर एक विस्फोटक शिकायत दर्ज कराई।
संगठन ने एनआरआई नर्सिंग कॉलेज के संचालकों, फर्जी फैकल्टी सदस्यों और मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार के नेतृत्व में यह धरना-प्रदर्शन न केवल एक कॉलेज तक सीमित है, बल्कि पूरे राज्य में फैले 'घोस्ट फैकल्टी' के नेटवर्क को उजागर करने का प्रयास है।

यह घटना मध्य प्रदेश के नर्सिंग शिक्षा घोटाले की उस कड़ी का हिस्सा है, जो वर्ष 2020 से लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। जबलपुर हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों और सीबीआई की जांच के बावजूद, फर्जी मान्यताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। एनएसयूआई की शिकायत के अनुसार, एनआरआई नर्सिंग कॉलेज ने 2025-26 सत्र की मान्यता के लिए ऐसी फर्जी फैकल्टी लिस्ट प्रस्तुत की है, जिसमें प्राचार्य एनसी थामस कई वर्षों से विदेश में रह रहे हैं, जबकि ट्यूटर रश्मि ठाकुर पिछले चार वर्षों से भोपाल के एएसजी आई हॉस्पिटल में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत हैं। इन 'घोस्ट फैकल्टी' के नाम पर काउंसिल से मान्यता प्राप्त कर ली गई, जो छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
एनएसयूआई टीम ने अपनी जांच में पाया कि यह फर्जीवाड़ा केवल एनआरआई कॉलेज तक सीमित नहीं है। प्रदेश के करीब 50 प्रतिशत नर्सिंग कॉलेजों में इसी तरह की अनियमितताएं हैं। रवि परमार ने क्राइम ब्रांच में शिकायत सौंपते हुए कहा, "यह केवल एक कॉलेज का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम का घोटाला है। शिकायतों के बावजूद काउंसिल की मान्यता शाखा की प्रभारी माधुरी शर्मा, डिप्टी रजिस्ट्रार धीरज गोविन्दानी और रजिस्ट्रार मुकेश सिंह द्वारा कॉलेज संचालकों से मिलीभगत कर फर्जी मान्यताएं दी जा रही हैं। अगर सरकार ने इस पर कठोर कार्रवाई नहीं की, तो एनएसयूआई राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ देगी।"
क्राइम ब्रांच के सहायक पुलिस आयुक्त सुजित तिवारी ने एनएसयूआई प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि शिकायत की गहन जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। तिवारी ने कहा, "हम इस मामले को प्राथमिकता देंगे। भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के इन मामलों में कोई ढील नहीं बरती जाएगी।" यह आश्वासन एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह का संचार करने वाला था, लेकिन संगठन ने चेतावनी दी कि अगर 48 घंटों के अंदर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सड़क पर उतरने का फैसला लिया जाएगा।
नर्सिंग शिक्षा में फैला जाल: एक पुरानी बीमारी का नया चेहरा
मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज घोटाला कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान यह घोटाला पहली बार बड़े पैमाने पर उजागर हुआ था। जबलपुर हाईकोर्ट में वकील विशाल बघेल की याचिका पर सीबीआई ने जांच शुरू की, जिसमें पाया गया कि राज्य के 800 से अधिक नर्सिंग कॉलेजों में से सैकड़ों केवल कागजों पर मौजूद थे। इनमें फर्जी फैकल्टी, अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और किराए के कमरों में संचालन जैसी अनियमितताएं आम थीं। सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 1,000 फर्जी फैकल्टी सदस्यों के नाम पर मान्यताएं जारी की गईं, जिससे 1.25 लाख छात्रों के एग्जाम अटक गए।
2023 में हाईकोर्ट के आदेश पर मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी ने 19 नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता रद्द की, जिनमें ग्वालियर के छह और भोपाल के तीन कॉलेज शामिल थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 66 हो गई, जब 31 जिलों में चिन्हित अनफिट कॉलेजों को बंद करने के निर्देश जारी हुए। नवंबर 2024 में सीबीआई की एक और जांच में 700 कॉलेजों की पड़ताल के बाद 500 को बंद करने का सुझाव दिया गया, क्योंकि केवल 200 ही संचालन योग्य पाए गए। फिर भी, 2025 में नए सत्र की मान्यताओं में वही पुरानी खामियां नजर आ रही हैं।
एनआरआई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, जो भोपाल में इंजीनियरिंग, फार्मेसी और नर्सिंग जैसे कोर्स संचालित करता है, का नाम इस घोटाले में आना चौंकाने वाला नहीं है। संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, एनआरआई इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड रिसर्च (NINR) 2020 में स्थापित हुआ था और मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल व इंडियन नर्सिंग काउंसिल से मान्यता प्राप्त है। लेकिन एनएसयूआई का दावा है कि यह मान्यता फर्जी दस्तावेजों पर आधारित है। कॉलेज में बीएससी नर्सिंग और जीएनएम कोर्स चलते हैं, लेकिन फैकल्टी की कमी के कारण छात्रों को उचित प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा। एक पूर्व छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "कक्षाएं अनियमित चलती हैं और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के नाम पर केवल थ्योरी पढ़ाई जाती है।"
कांग्रेस का हमला और सरकार की चुप्पी
कांग्रेस ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है। पार्टी प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी, जो एनएसयूआई के धरने में मौजूद थे, ने कहा, "यह मामला मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों में फर्जी फैकल्टियों का खेल जारी होने का प्रमाण है। शिकायतों के बावजूद काउंसिल के अधिकारी कॉलेज संचालकों से सांठ-गांठ कर फर्जी मान्यताएं दे रहे हैं। यह वीआईपीएएम का नया संस्करण है।" त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर निशाना साधते हुए पूछा, "क्या सरकार इस घोटाले को संरक्षण दे रही है? छात्रों का भविष्य दांव पर लगाकर क्या हासिल हो रहा है?"
वहीं, एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने चिकित्सा शिक्षा विभाग और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "एक ही व्यक्ति का रजिस्ट्रेशन दो संस्थानों में उपयोग हो रहा है। एएसजी हॉस्पिटल में रश्मि ठाकुर स्टाफ नर्स हैं, लेकिन कागजों पर वे एनआरआई में ट्यूटर। यह फर्जी नेटवर्क सक्रिय है। सवाल यह है कि आखिर कब तक यह खेल चलेगा?" तोमर ने मांग की कि पूरे प्रकरण की भोपाल क्राइम ब्रांच द्वारा जांच हो और एनआरआई संचालकों, फर्जी फैकल्टी व दोषी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार व धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया जाए।
सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विपक्ष का दबाव बढ़ रहा है। फरवरी 2025 में एनएसयूआई ने सीबीआई को पत्र लिखकर सभी सीएमएचओ पर एफआईआर की मांग की थी, जबकि अप्रैल में राज्य उपाध्यक्ष रवि परमार ने मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा था। जुलाई 2025 में पैरामेडिकल कॉलेजों में भी फर्जीवाड़े के आरोप लगे, जहां एनएसयूआई ने मेयो मान पैरामेडिकल कॉलेज पर शिकायत की। इन घटनाओं से साफ है कि नर्सिंग शिक्षा में सुधार की प्रक्रिया अभी अधर में लटकी हुई है।
छात्रों का भविष्य खतरे में, स्वास्थ्य सेवा पर संकट
यह घोटाला न केवल शिक्षा प्रणाली को कमजोर कर रहा है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी गहरा असर डाल रहा है। फर्जी फैकल्टी पर प्रशिक्षित नर्सें अस्पतालों में पहुंच रही हैं, जो मरीजों की जान जोखिम में डाल सकती हैं। जनवरी 2025 में काउंसिल ने 294 कॉलेजों को मान्यता दी, जिसमें 14,680 सीटें थीं, लेकिन देरी के कारण सत्र प्रभावित हो गया। मई 2025 में नए कॉलेजों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें आधार-आधारित सत्यापन अनिवार्य किया गया, लेकिन अमल में कमी बरकरार है।
एनएसयूआई ने मांग की है कि:
- सभी फर्जी कॉलेजों की तत्काल जांच हो।
- दोषी अधिकारियों को निलंबित किया जाए।
- छात्रों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
- सीबीआई को पूरे मामले की फिर से जांच सौंपी जाए।
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