"चरणों में गिरने को तैयार हूं, बस इंसाफ चाहिए"- कांग्रेस विधायक, विधानसभा में भावुक हुए मंत्री नरेंद्र शिवाजी

MP News: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन का आगाज बेहद गहमागहमी से हुआ। जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, कांग्रेस विधायकों ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने अपने और बेटे पर दर्ज आपराधिक प्रकरण को लेकर सत्ता पक्ष से सीधे सवाल कर डाले। मिश्रा ने कहा, "क्या मेरा चुनाव लड़ना ही अपराध हो गया है?"

उनकी इस बात पर सदन में माहौल अचानक भावुक हो गया। मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल खुद को रोक नहीं सके और आंखें भर आईं। मंत्री ने तुरंत उच्च स्तरीय जांच और संबंधित थाना प्रभारी के निलंबन का ऐलान कर दिया।

MLA Abhay Mishra Minister became emotional in assembly Congress raised questions on MP government

"आपके चरणों में गिरने को तैयार हूं..."

विधायक अभय मिश्रा ने सदन में खड़े होकर कहा, "न्याय के लिए मैं आपके चरणों में गिरने को तैयार हूं, लेकिन इस अन्याय पर कार्रवाई होनी चाहिए।" उन्होंने अपने और बेटे विभूति नारायण मिश्रा पर थाना चोरहटा में दर्ज केस को झूठा बताते हुए पूरी घटना सदन के सामने रखी।

इस पर मंत्री पटेल ने कहा, "किसी भी विधायक या आम व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। पुलिस का मनोबल भी बना रहे, इसलिए थाना प्रभारी को जिले से हटाकर उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।"

"पहले कार्रवाई होती तो मऊगंज कांड न होता"

विधायक अजय सिंह ने इस बहस में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि ऐसे मामलों में पहले ही सख्त कार्रवाई होती तो हाल ही में मऊगंज में हुई दर्दनाक घटना से बचा जा सकता था। उनके इस बयान के बाद सदन में एक बार फिर हंगामा शुरू हो गया और सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए।

नेता प्रतिपक्ष ने भी साधा निशाना

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। विधायक नारायण सिंह पट्टा के साथ भी इसी तरह का व्यवहार हुआ था। जो अच्छा करे उसे सजा नहीं मिलनी चाहिए और जो गलत करे उसे सजा अवश्य मिले।"

मंत्री के भावुक होने के पीछे की कहानी

विधानसभा में मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का भावुक होना भी चर्चा का विषय बन गया। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा, "मंत्री जी भावुक इसलिए हो गए क्योंकि उनकी खुद की सरकार में उनके परिवार पर भी झूठी FIR दर्ज है। चूंकि वे गृह मंत्री नहीं हैं और न ही सीधे मुख्यमंत्री से सवाल कर सकते हैं, इसलिए वे अपनी बेबसी में भावुक हो गए।"

सरकार विपक्ष के घेरे में

विपक्ष ने सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि जब एक विधायक के परिवार को ही झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है, तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। हेमंत कटारे ने कहा, "सरकार में बैठे लोग जब अपनी ही व्यवस्था पर सवाल नहीं उठा पा रहे हैं, तो ये चिंता का विषय है।"

अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर

अब सभी की निगाहें सरकार की उस जांच पर टिक गई हैं, जिसकी घोषणा सदन में की गई है। क्या जांच निष्पक्ष होगी और क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह कागजों में ही सिमट जाएगा?

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