Indore Honeytrap-2: पूर्व BJP नेत्री रेशु चौधरी कौन है, जिसने खोली सियासत की गंदी पोल? MP-MLA से तगड़े कनेक्शन
Indore Honey Trap-2: इंदौर का हनीट्रैप-2 मामला अब मध्य प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत को हिला देने वाला हाईप्रोफाइल कांड बन चुका है। शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर को कथित हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने की कोशिश ने न सिर्फ स्थानीय पुलिस को सक्रिय किया, बल्कि दिल्ली तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की टीम को इंदौर भेज दिया।
इस पूरे साजिश की कथित मास्टरमाइंड के रूप में सामने आई है रेशु उर्फ अभिलाषा चौधरी, जो मध्य प्रदेश की सागर जिले की रहने वाली पूर्व भाजपा नेत्री है। पुलिस के अनुसार, रेशु न सिर्फ हनीट्रैप-2 नेटवर्क की अहम कड़ी है, बल्कि उसके कनेक्शन बड़े तबके के नेताओं, MP, विधायकों, सांसदों और प्रभावशाली कारोबारियों तक बताए जा रहे हैं।

Indore Honeytrap-2 Case Studey: मामला क्या है?
शराब कारोबारी चिंटू ठाकुर पर आरोप है कि उसे महिलाओं के जरिए फंसाया गया, निजी वीडियो-फोटो बनाए गए और फिर 1 करोड़ रुपये की मांग की गई। वीडियो वायरल करने की धमकी दी गई। पुलिस ने इस सिलसिले में रेशु चौधरी और इंदौर पुलिस इंटेलिजेंस विंग के हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को गिरफ्तार किया। दोनों को 25 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह सिर्फ एक शराब कारोबारी तक सीमित नहीं है। इस नेटवर्क में कई प्रभावशाली नामों को निशाना बनाने की प्लानिंग थी।
Who Is Reshu Chaudhary: रेशु चौधरी कौन है? पूरी बायोग्राफी
रेशु उर्फ अभिलाषा चौधरी मध्य प्रदेश के सागर जिले की निवासी है। भाजपा के विभिन्न प्रकोष्ठों में सक्रिय रही और स्थानीय स्तर पर अच्छी पहचान बनाई। कोविड काल में उसने भाजपा नेताओं और एक विधायक के साथ सामाजिक कार्यों में हिस्सा लिया। इतना ही नहीं, उसने नरयावली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी भी की थी। इलाके में अपने होर्डिंग्स लगवाए गए थे। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रदीप लारिया को टिकट दिया, जिसके बाद रेशु की प्रत्यक्ष राजनीतिक महत्वाकांक्षा अधूरी रह गई।
BJP और बड़े नेताओं से जुड़े तार!
पुलिस जांच के मुताबिक, राजनीतिक और सामाजिक संपर्कों का इस्तेमाल रेशु ने कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क को मजबूत करने में किया। सागर, भोपाल, उज्जैन, इंदौर और दिल्ली तक उनके संपर्क बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों को सूचना मिली है कि रेशु का एक केंद्रीय राज्य मंत्री से करीबी रिश्ता रहा है।
कैसे बना हनीट्रैप-2 का पूरा नेटवर्क?
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क की मुख्य कड़ियां हैं:-
- श्वेता विजय जैन (कथित मुख्य मास्टरमाइंड)
- अलका दीक्षित (कथित लेडी तस्कर)
- रेशु चौधरी
- लाखन चौधरी, जयदीप, जितेंद्र पुरोहित आदि
क्राइम ब्रांच ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। श्वेता जैन ने सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है और महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। डीसीपी राजेश त्रिपाठी के अनुसार, रेशु ने श्वेता के जरिए अलका दीक्षित से संपर्क साधा। तीनों महिलाओं की दोस्ती कोर्ट परिसर और जेल के दौरान हुई। यहीं से कथित साजिश की शुरुआत हुई। प्रभावशाली लोगों को दोस्ती के जाल में फंसाना, उनके निजी वीडियो-फोटो-चैट हासिल करना और फिर ब्लैकमेल करना। अलका दीक्षित के ड्रग्स और अवैध हथियार तस्करी से जुड़े कनेक्शन भी सामने आए हैं, जिस पर अलग से जांच चल रही है।
हनीट्रैप-1 से हनीट्रैप-2 तक: पुरानी कहानी नया रूप
2019 में इंदौर का पहला हनीट्रैप कांड काफी चर्चित हुआ था। नगर निगम इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर खुलासा हुआ कि 1000 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो तैयार किए गए थे, जिनमें नेता, अधिकारी और कारोबारी शामिल थे। उस मामले में भी श्वेता विजय जैन समेत कई महिलाएं गिरफ्तार हुई थीं। हनीट्रैप-2 उसी नेटवर्क का विस्तार माना जा रहा है। अंतर सिर्फ इतना है कि इस बार नेटवर्क ज्यादा संगठित, राजनीतिक रूप से बेहतर कनेक्टेड और बड़े लक्ष्यों वाला दिख रहा है।
कैसे काम करता था कथित गैंग?
- टारगेट सिलेक्शन: प्रभावशाली नेता, अधिकारी, कारोबारी या रसूखदार व्यक्ति को चुना जाता।
- दोस्ती का जाल: सोशल मीटिंग्स, पार्टी या व्यक्तिगत संपर्क के जरिए नजदीकियां बढ़ाई जातीं।
- ट्रैप: महिलाओं के जरिए अंतरंग वीडियो-फोटो बनाए जाते।
- ब्लैकमेल: वीडियो वायरल करने की धमकी देकर मोटी रकम वसूली जाती।
पुलिस का कहना है कि इस बार टारगेट बहुत बड़े थे, इसलिए केस की गंभीरता बढ़ गई।
राजनीतिक कनेक्शन: BJP और उससे आगे
रेशु चौधरी के भाजपा प्रकोष्ठ में पदाधिकारी रहने और कोविड काल में नेताओं के साथ तस्वीरें वायरल होने के कारण राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। हालांकि भाजपा ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
जांच एजेंसियों को शक है कि रेशु ने अपने पुराने राजनीतिक संपर्कों का फायदा उठाया। दिल्ली में केंद्रीय राज्य मंत्री से बताए जा रहे संबंध इस केस को राष्ट्रीय स्तर का बना सकते हैं। IB की टीम इंदौर पहुंचकर पुलिस से पूरी फाइल मांग चुकी है।
क्या कहती है पुलिस जांच?
- रेशु, श्वेता और अलका एक-दूसरे के पूरक थे।
- रेशु का रोल मुख्य रूप से हाई-प्रोफाइल टारगेट तक पहुंच बनाने का था।
- हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा की भूमिका नेटवर्क को पुलिस प्रोटेक्शन देने या जानकारी लीक करने की बताई जा रही है।
- ड्रग्स और हथियार तस्करी का एंगल भी जुड़ने से केस और जटिल हो गया है।
Madhya Pradesh Honeytrap Culture : एक गहरी समस्या
मध्य प्रदेश में पिछले एक दशक में कई हनीट्रैप मामले सामने आए हैं। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे शहरों में यह ट्रेंड बार-बार दोहराया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया, आसान संपर्क और पैसे की लालच ने ऐसे नेटवर्क को बढ़ावा दिया है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि ऐसे रैकेट अक्सर राजनीतिक सेटलमेंट या बिजनेस राइवलरी के लिए इस्तेमाल होते हैं।
आगे क्या?
25 मई तक रिमांड पर पूछताछ जारी है। पुलिस अन्य आरोपियों और टारगेट्स की सूची तैयार कर रही है। अगर रेशु चौधरी के केंद्रीय नेताओं से संबंध साबित होते हैं तो यह केस मध्य प्रदेश की सियासी तस्वीर बदल सकता है।
श्वेता जैन के सरकारी गवाह बनने से कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। IB की निगरानी में चल रही यह जांच सिर्फ ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं रहने वाली दिख रही है।
इंदौर हनीट्रैप-2 मामला सिर्फ एक अपराध कांड नहीं, बल्कि सत्ता, पैसे, सेक्स और राजनीति के गठजोड़ की कहानी बनता जा रहा है। रेशु चौधरी जैसी महिला, जो कभी भाजपा की स्थानीय कार्यकर्ता और संभावित उम्मीदवार के रूप में देखी जाती थी, आज हनीट्रैप की कथित मास्टरमाइंड बनकर जेल की सलाखों के पीछे है। यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि सत्ता के गलियारों में कितने खतरे छिपे होते हैं और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं कैसे बड़े नेटवर्क में बदल जाती हैं।
जांच अभी जारी है। नतीजे आने तक सावधानी बरतना जरूरी है। लेकिन एक बात तय है - इंदौर का यह हनीट्रैप अब सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं रहा। यह मध्य प्रदेश की राजनीति की गहराइयों को छू रहा है।













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