Amit Shah ने भोपाल में मेडिकल की हिंदी किताबों का किया विमोचन, CM Shivraj की जमकर की तारीफ
रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भोपाल में रिमोट का बटन दबाकर मेडिकल की तीन हिंदी किताबों का विमोचन किया। इन तीन किताबों में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री शामिल है।
भारत में अब उन देशों में शामिल हो गया है यहां पर मातृभाषा में मेडिकल की पढ़ाई कराई जाएगी। यानी अब हिंदी मीडियम के विद्यार्थियों को मेडिकल की पढ़ाई के लिए अंग्रेजी का डर नहीं सताएगा। रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भोपाल में रिमोट का बटन दबाकर मेडिकल की तीन हिंदी किताबों का विमोचन किया। इन तीन किताबों में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री शामिल है। इस मौके पर उन्होंने सीएम शिवराज की जमकर तारीफ भी की। विमोचन के कार्यक्रम से पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को एयरपोर्ट लेने खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहुंचे थे। इसके बाद गृहमंत्री वायुसेना के हेलीकॉप्टर से लाल परेड ग्राउंड पहुंचे। उनके साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी थे। भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर देश के गृह मंत्री अमित शाह का ग्रैंड वेलकम किया गया।

इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह क्षण देश में शिक्षा के पुनर्निर्माण का क्षण है। सबसे पहले मेडिकल की शिक्षा हिंदी में शुरू करके शिवराज सिंह चौहान ने मोदी जी की इच्छा पूरी की है। देश भर में 8 भाषाओं में पढ़ाई हो रही है यूजी नीट देश की 22 भाषाओं में हो रही है। आज 10 राज्य इंजीनियरिंग पढ़ाई मातृभाषा में करा रहे हैं।
गृह मंत्री शाह ने कहा कि मेडिकल, इंजीनियरिंग में जो मातृभाषा के समर्थक हैं, उनके लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। अब हमें अपनी भाषा में शिक्षा मिलेगी ।मध्य प्रदेश का चुनाव जब हो रहा था। घोषणापत्र के भीतर यह जिक्र था। मोदी जी की नई शिक्षा नीति को मध्य प्रदेश में सबसे पहले जमीन पर उतारा है। शाह ने कहा कि सोचने की प्रक्रिया अपनी भाषा में होती है, इसलिए नेल्सन मंडेला ने कहा था यदि आप किसी व्यक्ति से उसी की भाषा में बात करते हो तो वे उसके दिमाग में जाता है। अनुसंधान यदि अपनी भाषा में हो तो भारत की युवा भी किसी से कम नहीं है, वह विश्व में भारत का डंका बजाकर आएंगे।
इस मौके पर सीएम शिवराज ने कहा या काम तो आजादी के बाद ही हो जाना था लेकिन यह सब हो रहा है अब अंग्रेज चले गए लेकिन हमें अंग्रेजी का गुलाम बना गए थे अंग्रेजी बोलो तो इंप्रेशन पड़ता है। हमने अपने महापुरुषों को भी अपमानित किया है तात्या टोपे नगर को टीटी नगर कहने लगे हैं। हमारे बच्चों में प्रतिभा है, क्षमता है, योग्यता है। कोई कमी नहीं है, केवल अंग्रेजी भाषा नहीं जानने के कारण वे कुंठित हो जायें, वे यह समझें कि मेरी जिंदगी बेकार है, तो मैं यह समझता हूं कि ऐसी अंग्रेजी को धिक्कार है। मैं मानता हूं कि हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई के रूप में एक नये युग का प्रारंभ हो रहा है, वो भी भोपाल से।
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