MP News: भोपाल में ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़, DRI के ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक ने किए चौंकाने वाले खुलासे

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सनसनीखेज खुलासे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने ऑपरेशन "क्रिस्टल ब्रेक" के तहत एक गुप्त ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया, जो नशे के काले साम्राज्य को चला रही थी।

भोपाल के जगदीशपुरा (इस्लामनगर) में रजक खान के मकान में चल रही इस अवैध फैक्ट्री से 61.2 किलोग्राम मेफेड्रोन (MD ड्रग्स), जिसकी कीमत 92 करोड़ रुपये है, जब्त की गई। सात बड़े गुर्गों की गिरफ्तारी, हवाला के जरिए पैसों का लेन-देन, और विदेशी ड्रग्स माफिया का कनेक्शन-इस मामले ने कई चौंकाने वाले राज खोले हैं।

Drugs factory busted in Bhopal DRI Operation Crystal Break made shocking revelations

लेकिन यह कहानी सिर्फ ड्रग्स तक सीमित नहीं है; आसपास के लोगों की बीमारियाँ, मवेशियों की मौत, और एक सुनियोजित अपराध का जाल इस खबर को और भी रोमांचक बनाता है। आइए, इस ड्रग्स साम्राज्य की पूरी कहानी जानते हैं।

एक सामान्य-सा मकान, जो बना नशे का अड्डा

भोपाल के हुजूर तहसील के ग्राम-जगदीशपुरा में एक साधारण-सा मकान, जो बाहर से देखने में किसी आम घर जैसा था, असल में नशे का एक खतरनाक कारखाना था। इस मकान का मालिक रजक खान था, जिसने इसे पिछले साल 13 लाख रुपये में खरीदा था। सूत्रों के अनुसार, रजक ने मकान मालिक को 1 लाख रुपये एडवांस दिया था, और बाकी रकम सितंबर 2025 तक चुकानी थी। लेकिन इस मकान में जो गतिविधियाँ चल रही थीं, वे सामान्य से कोसों दूर थीं।

यह मकान चारों ओर से जानबूझकर ढका गया था ताकि किसी को शक न हो। अंदर, एक प्रशिक्षित केमिस्ट और उसका साथी मेफेड्रोन, एक साइकोट्रोपिक ड्रग, का उत्पादन कर रहे थे, जो नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत प्रतिबंधित है। 16 अगस्त 2025 को DRI ने जब इस मकान पर छापा मारा, तो वहाँ का नजारा देखकर सभी दंग रह गए। 61.2 किलोग्राम तरल मेफेड्रोन और 541.53 किलोग्राम कच्चा माल-जैसे मिथाइलीन डाइक्लोराइड, एसीटोन, मोनोमिथाइलमाइन (MMA), हाइड्रोक्लोरिक एसिड, और 2-ब्रोमो-के साथ-साथ अत्याधुनिक प्रोसेसिंग उपकरण बरामद हुए।

आसपास के लोगों पर जहरीला असर

इस फैक्ट्री का प्रभाव केवल नशे के व्यापार तक सीमित नहीं था। आसपास के गाँववासियों ने कई महीनों से शिकायत की थी कि उनके इलाके में कुछ गड़बड़ है। लोगों को आँखों में जलन और साँस लेने में तकलीफ हो रही थी। कई परिवारों ने बताया कि उनके पालतू मवेशी अचानक बीमार पड़ रहे थे और कुछ की मौत भी हो गई। एक स्थानीय निवासी, रामलाल साहू ने बताया, "हमें लगा कि कोई फैक्ट्री या प्रदूषण की वजह से ऐसा हो रहा है, लेकिन हमें क्या पता था कि हमारे पड़ोस में ड्रग्स बन रही थीं।"

जाँच में पता चला कि जहरीले केमिकल्स, जो मेफेड्रोन बनाने में इस्तेमाल हो रहे थे, हवा और मिट्टी को दूषित कर रहे थे। इन केमिकल्स की बदबू और जहरीले प्रभाव ने स्थानीय लोगों और उनके पशुओं को बीमार कर दिया था। यह खुलासा सुनकर गाँववाले गुस्से में हैं और प्रशासन से पूछ रहे हैं कि इतनी बड़ी अवैध गतिविधि उनकी नाक के नीचे कैसे चल रही थी।

ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक: एक सुनियोजित प्रहार

DRI की यह कार्रवाई, जिसे "ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक" नाम दिया गया, एक गुप्त सूचना के आधार पर शुरू हुई। सूरत और मुंबई पुलिस के सहयोग से DRI ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, और उत्तर प्रदेश में एक साथ छापेमारी की। भोपाल की फैक्ट्री इस नेटवर्क का मुख्य उत्पादन केंद्र थी, लेकिन इसका जाल कई राज्यों तक फैला हुआ था।

छापेमारी के दौरान, DRI ने दो लोगों को रंगे हाथ पकड़ा, जिनमें से एक प्रशिक्षित केमिस्ट था, जो मेफेड्रोन बनाने की प्रक्रिया में शामिल था। इसके बाद, उत्तर प्रदेश के बस्ती में कार्टेल का एक अहम सदस्य गिरफ्तार किया गया, जो मुंबई के भिवंडी से भोपाल तक कच्चे माल की सप्लाई का प्रबंधन कर रहा था। मुंबई में दो सप्लायर्स और एक ट्रांसपोर्टर को हिरासत में लिया गया, जो केमिकल्स की ढुलाई में शामिल थे। सूरत में एक हवाला ऑपरेटर को पकड़ा गया, जो इस सिंडिकेट के लिए धन का लेन-देन संभाल रहा था।

जाँच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ-सूरत और मुंबई से भोपाल तक हवाला के जरिए लाखों रुपये भेजे जा रहे थे। सूत्रों ने बताया कि भोपाल के लालघटी चौराहे पर एक बड़ा हवाला कारोबारी भी सक्रिय था, जो इस नेटवर्क का हिस्सा था।

विदेशी ड्रग्स माफिया का कनेक्शन

इस मामले ने तब और तूल पकड़ा, जब पता चला कि यह पूरा नेटवर्क एक विदेशी ड्रग्स माफिया के इशारे पर चल रहा था। गिरफ्तार सातों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे सलीम डोला नामक एक विदेशी सरगना के निर्देश पर काम कर रहे थे, जो कथित तौर पर दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क से जुड़ा है और वर्तमान में तुर्की में रहता है। सलीम डोला ने न केवल इस फैक्ट्री के लिए कच्चा माल और धन की व्यवस्था की थी, बल्कि वह भारत में मेफेड्रोन के नेटवर्क का मास्टरमाइंड भी था।

DRI ने बताया कि यह पिछले एक साल में छठा मौका है, जब उन्होंने मेफेड्रोन बनाने वाली अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। इससे पहले नागपुर और लातूर में भी ऐसी कार्रवाइयाँ हो चुकी हैं। एक DRI अधिकारी ने कहा, "हमारा लक्ष्य न केवल इन अवैध फैक्ट्रियों को बंद करना है, बल्कि इनके पीछे के अंतरराष्ट्रीय मास्टरमाइंड तक पहुँचना भी है।"

भोपाल में बढ़ता नशे का खतरा

यह भोपाल में पिछले एक साल में दूसरी बड़ी ड्रग्स से संबंधित कार्रवाई है। अक्टूबर 2024 में, गुजरात एटीएस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने भोपाल के बागरोड़ा औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री पर छापा मारा था, जहाँ 907 किलोग्राम मेफेड्रोन (मूल्य 1800 करोड़ रुपये) जब्त किया गया था। इन घटनाओं ने भोपाल को सिन्थेटिक ड्रग्स के उत्पादन का एक नया गढ़ होने की आशंका को और पुख्ता किया है।

स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता इस बात से चिंतित हैं कि इतनी बड़ी अवैध गतिविधियाँ उनके शहर में कैसे चल रही थीं। सामाजिक कार्यकर्ता शबाना खान ने कहा, "यह डरावना है कि हमारे पड़ोस में ड्रग्स बन रही थीं और हमें कोई जानकारी नहीं थी। प्रशासन को और सख्ती बरतनी होगी।"

सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

इस भंडाफोड़ ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। "भोपाल में 92 करोड़ की ड्रग्स फैक्ट्री! जहरीले केमिकल्स से लोग और मवेशी बीमार पड़ रहे थे। DRI ने भंडाफोड़ किया, लेकिन BJP सरकार की नींद क्यों नहीं खुली?

कांग्रेस ने इस मामले को सरकार की नाकामी से जोड़ा। कांग्रेस ने ट्वीट किया, "BJP राज में भोपाल ड्रग्स का गढ़ बन गया है। जगदीशपुरा में 92 करोड़ की ड्रग्स फैक्ट्री, और सरकार को भनक तक नहीं। यह जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

वहीं, BJP ने जवाब में कहा कि DRI की कार्रवाई केंद्र सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का सबूत है। "DRI ने भोपाल में ड्रग्स माफिया को ध्वस्त किया। यह केंद्र की मजबूत नीति का परिणाम है। विपक्ष बेकार की सियासत न करे।

भविष्य की चुनौतियां

ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक ने भले ही एक बड़े ड्रग्स नेटवर्क का पर्दाफाश किया हो, लेकिन यह भारत में सिन्थेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे की केवल एक झलक है। मेफेड्रोन जैसे ड्रग्स, जो युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, न केवल कानून प्रवर्तन के लिए बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा संकट हैं। DRI अब इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों की जाँच कर रही है, विशेष रूप से सलीम डोला की भूमिका को, ताकि इस काले साम्राज्य को जड़ से उखाड़ा जा सके।

यह मामला भोपाल के लिए एक चेतावनी है। क्या प्रशासन और समाज इस खतरे से निपटने के लिए तैयार है? क्या भोपाल और अन्य शहर ड्रग्स माफिया के चंगुल से बच पाएँगे? इन सवालों का जवाब DRI और अन्य एजेंसियों की सतर्कता और समाज के सामूहिक प्रयासों में छिपा है। यह कहानी न केवल एक पुलिस कार्रवाई की है, बल्कि एक शहर की उस जंग की है, जो नशे के खिलाफ लड़ी जा रही है।

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