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Bhopal News: आसाराम आश्रम की बाउंड्रीवॉल पर क्यों चला बुलडोजर, जेसीबी के सामने हंगामा, जानिए पूरा मामला

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गांधीनगर स्थित संत आसाराम बापू के आश्रम में 31 जुलाई 2025 को जमीन विवाद को लेकर जिला प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई ने तूल पकड़ लिया। बैरागढ़ तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम JCB मशीनों के साथ आश्रम की बाउंड्रीवॉल तोड़ने पहुंची, लेकिन आश्रम में पढ़ने वाले बच्चों और संस्कृति बचाओ मंच के कार्यकर्ताओं के तीव्र विरोध के बाद कार्रवाई रोकनी पड़ी।

बच्चों ने JCB के सामने खड़े होकर दीवार तोड़ने से रोका, जिससे करीब तीन घंटे तक हंगामा चला। इस दौरान कुछ बच्चों को मामूली चोटें भी आईं। प्रशासन ने इसे कोर्ट के आदेश पर की गई कार्रवाई बताया, जबकि आश्रम प्रबंधन और समर्थकों ने इसे बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया।

Bulldozer on boundary wall of Asaram Ashram in Gandhinagar uproar due to children front of JCB

गांधीनगर आश्रम में हंगामा: क्या हुआ?

31 जुलाई 2025 को दोपहर करीब 12 बजे बैरागढ़ तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह के नेतृत्व में जिला प्रशासन की टीम, जिसमें चार मजिस्ट्रेट, राजस्व निरीक्षक, पटवारी, और भारी पुलिस बल शामिल था, गांधीनगर के आसाराम बापू आश्रम पहुंची। टीम ने आश्रम की 10 फीट ऊंची बाउंड्रीवॉल के 20-25 फीट हिस्से को JCB मशीनों से ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई एक जमीन विवाद से जुड़े कोर्ट के आदेश के तहत की गई थी, जिसमें विवादित जमीन का कब्जा संबंधित पक्षकार को दिलवाना था।

हालांकि, कार्रवाई शुरू होते ही आश्रम में पढ़ने वाले बच्चे और स्टाफ विरोध में उतर आए। बच्चों ने JCB मशीनों को घेर लिया और दीवार तोड़ने से रोकने के लिए उनके सामने खड़े हो गए। इस दौरान कुछ बच्चों को मामूली चोटें आईं, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। संस्कृति बचाओ मंच के संयोजक चंद्रशेखर तिवारी भी मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का विरोध जताया। आश्रम सेवक राहुल सिंह ने कहा, "बाउंड्रीवॉल तोड़ने से बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। यह आश्रम बच्चों के लिए गुरुकुल है, जहां वे पढ़ाई और संस्कार सीखते हैं।" करीब तीन घंटे के हंगामे के बाद प्रशासनिक टीम को कार्रवाई रोककर वापस लौटना पड़ा।

जमीन विवाद की जड़: क्या है मामला?

गांधीनगर में आसाराम बापू के आश्रम का यह विवाद 11 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिस पर आश्रम ने कथित तौर पर अतिक्रमण किया है। 2013 में तहसीलदार आकाश श्रीवास्तव के कार्यालय में शिकायत दर्ज की गई थी कि आश्रम ने दो भूस्वामियों की जमीन पर कब्जा किया है। तहसीलदार कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर आश्रम को अतिक्रमण का दोषी पाया था, लेकिन आश्रम प्रबंधन ने इस फैसले को SDO (लैंड रेवेन्यू) कोर्ट, बैरागढ़ में चुनौती दी। यह मामला अभी विचाराधीन है।

संस्कृति बचाओ मंच के संयोजक चंद्रशेखर तिवारी ने दावा किया कि यह जमीन संत आसाराम बापू को भोपाल के व्यवसायी दिलीप कुकरेजा के पिता ने दान में दी थी। उन्होंने कहा, "यह कीमती जमीन है, इसलिए कुछ लोग इसे हड़पने के लिए कोर्ट में केस दर्ज कर रहे हैं। यह कार्रवाई बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा है।" तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का दुरुपयोग किया और बिना पूरी सुनवाई के कार्रवाई शुरू कर दी।

वहीं, बैरागढ़ तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह ने कहा, "हम कोर्ट के आदेश पर जमीन का कब्जा दिलवाने पहुंचे थे। आश्रम प्रबंधन ने बच्चों को आगे करके शासकीय कार्य में बाधा डाली। इस मामले में आश्रम प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई में किसी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई, और प्रशासन ने सुरक्षा के सभी इंतजाम किए थे।

आसाराम बापू और उनके आश्रम का विवादित इतिहास

आसाराम बापू, जिन्हें 2013 से दो अलग-अलग बलात्कार मामलों में आजीवन कारावास की सजा काटनी पड़ रही है, का भोपाल में गांधीनगर आश्रम कई बार विवादों में रहा है। 2008 में अहमदाबाद के मोतरा आश्रम में दो नाबालिग लड़कों, दीपेश वाघेला (10) और अभिषेक वाघेला (11), की रहस्यमय मौत के बाद उनके समर्थकों ने पत्रकारों पर हमला किया था, जिसके लिए सात लोगों को 2021 में एक साल की सजा सुनाई गई थी।

भोपाल के आश्रम पर 2013 में भी 11 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण का आरोप लगा था, और तहसीलदार कोर्ट ने इसे प्रारंभिक तौर पर सही पाया था। इसके अलावा, 2014 में दिल्ली के करोल बाग में आसाराम के आश्रम की अवैध संरचनाओं को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने ध्वस्त करने का आदेश दिया था, साथ ही 1,000 पेड़ लगाने का निर्देश दिया था। आसाराम का साम्राज्य, जिसमें 450 आश्रम, 17,000 बाल संस्कार केंद्र, और 40 से अधिक गुरुकुल शामिल हैं, 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का बताया जाता है, जो उनकी पत्नी और बेटी से अलग उनके अनुयायियों द्वारा संचालित होता है।

बच्चों का विरोध: सुरक्षा या भावनात्मक मुद्दा?

आश्रम में पढ़ने वाले बच्चों का JCB के सामने खड़े होना इस कार्रवाई का सबसे चर्चित पहलू रहा। बच्चों ने "हमारा आश्रम बचाओ" और "दीवार मत तोड़ो" के नारे लगाए। आश्रम सेवक राहुल सिंह ने कहा, "ये बच्चे गुरुकुल में पढ़ते हैं और आश्रम को अपना घर मानते हैं। बाउंड्रीवॉल टूटने से उनकी सुरक्षा को खतरा है।" कुछ समर्थकों ने इसे प्रशासन की "बुलडोजर नीति" का हिस्सा बताया, जो बच्चों के भविष्य को नजरअंदाज कर रही है।

हालांकि, प्रशासन ने दावा किया कि बच्चों को आश्रम प्रबंधन ने जानबूझकर आगे किया, ताकि कार्रवाई रोकी जा सके। तहसीलदार ने कहा, "यह शासकीय कार्य में बाधा डालने की रणनीति थी। हमने बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा था।" इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात था, और कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से रोक दिया गया।

कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, "BJP सरकार बुलडोजर नीति के तहत चुन-चुनकर कार्रवाई कर रही है। बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालना गलत है।" जवाब में BJP प्रवक्ता आलोक दुबे ने कहा, "यह कोर्ट के आदेश पर की गई कार्रवाई है। कांग्रेस इसे सियासी रंग दे रही है।"

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