Bhopal News: खटलापुरा मन्दिर समिति के लिए बड़ी खुशखबरी, जिला न्यायालय ने प्रतिबंधों के साथ दिया बड़ा आदेश

Bhopal News: भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय ने खटलापुरा मन्दिर समिति राजी के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। सिविल जज जूनियर डिविजन, शिवानी अक्षय ताम्रवाल की कोर्ट ने खटलापुरा मन्दिर के अनुमतिधारक मनोज के खिलाफ कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं और उनकी तमाम गतिविधियों पर रोक लगाते हुए स्टे (अस्थायी रोक) दिया है।

इस फैसले से मन्दिर समिति को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि कोर्ट ने यह आदेश दिया है कि मनोज अब मन्दिर के किसी भी प्रशासनिक कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर सकेगा। इसके साथ ही, उन्हें मन्दिर से मिलने वाले दान और चढ़ावे की राशि लेने से भी पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।

Big news for Khatlapura Temple Committee District Court gave big order with restrictions

1. प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप पर रोक

न्यायालय ने आदेश दिया कि प्रतिवादी मनोज, अनुमतिधारक होने के बावजूद, खटलापुरा मन्दिर के किसी भी प्रशासनिक कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर पाएगा, जब तक कि अंतिम आदेश जारी नहीं हो जाता।

2. दान चढ़ावा लेने पर प्रतिबंध

कोर्ट ने प्रतिवादी को मंदिर में मिलने वाले दान या चढ़ावे को प्राप्त करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। यह आदेश मन्दिर समिति के हित में है, ताकि दान का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

3. किराया वसूली पर रोक

मन्दिर के खोलीओं में रह रहे लोगों से किराया वसूलने के मामले में भी कोर्ट ने प्रतिवादी मनोज को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।

4. निर्माण कार्य पर रोक

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि प्रतिवादी किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य मन्दिर में नहीं करवा सकेगा। मन्दिर के विकास और निर्माण कार्यों पर यह रोक सुनिश्चित करती है कि भविष्य में कोई अवैध निर्माण न हो।

5. एनजीटी द्वारा जारी आदेश

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एन.जी.टी) ने भी 8 जनवरी को प्रतिवादी मनोज के खिलाफ स्टे आदेश जारी किया था। एनजीटी न्यायालय ने 3 सदस्यीय समिति का गठन किया था और विभिन्न सरकारी अधिकारियों को नोटिस जारी कर अवैध निर्माण के खिलाफ जल्द से जल्द रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था।

इस फैसले से खटलापुरा मन्दिर समिति को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, और इस आदेश से यह भी स्पष्ट होता है कि मन्दिर प्रशासन की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। यह निर्णय मन्दिर समिति के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है, और भविष्य में मन्दिर के प्रशासनिक कार्यों में सुधार की संभावना है।

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पूरा मामला क्या है?

असल में, खटलापुरा मंदिर समिति के सदस्य कथित पुजारी मनोज उर्फ मन्नू से परेशान थे। उनका कहना था कि मन्नू पहले तो मंदिर में सेवा करने का दिखावा करता रहा, लेकिन अब वह मंदिर का मालिक बनने की कोशिश कर रहा था। मंदिर समिति के सचिव पप्पू विलास राव ने बताया कि मंदिर के पुराने सेवक स्व प्रेम दास वर्मा, जिनकी 10 अगस्त 2024 को मृत्यु हो गई, वे भी मंदिर के अनुमतिधारक थे। हालांकि, मंदिर समिति ने स्व प्रेम दास वर्मा को कभी पुजारी नहीं नियुक्त किया था, वे रोडवेज में काम करते थे। उनके निधन के बाद, मनोज उर्फ मन्नू ने मंदिर के छोटे तालाब के किनारे अतिक्रमण करना शुरू कर दिया था। इस पर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने नोटिस भी जारी किया, लेकिन मन्नू ने इसके बावजूद मंदिर में अपनी मनमर्जी के काम जारी रखे। जब मंदिर समिति ने पुलिस में शिकायत की, तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, और मामला आखिरकार कोर्ट तक पहुंच गया।

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मन्नू की तानाशाही और मंदिर समिति का आरोप

मंदिर समिति के सचिव पप्पू विलास राव का कहना है कि मन्दिर समिति ने कभी भी मनोज उर्फ मन्नू को मंदिर का पुजारी या सहमंत्री नियुक्त नहीं किया था। इसके बावजूद मन्नू ने मंदिर के भीतर सभी फैसले लेने शुरू कर दिए। सवाल उठता है कि मन्नू ने बिना किसी अधिकार के मंदिर के प्रशासन में हस्तक्षेप कैसे किया और मंदिर के कामकाज को अपनी मनमर्जी से क्यों चलाने की कोशिश की?

दान पेटियों से हेराफेरी का आरोप

इसके अलावा, मंदिर समिति पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि मंदिर की दान पेटियों से पैसों की हेराफेरी की जा रही थी। यह आरोप और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि यह सवाल उठता है कि दान के पैसे का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा था और किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए इसका दुरुपयोग किया जा रहा था।

कोर्ट का निर्णय और आगामी कार्रवाई

मंदिर समिति ने अंततः इस मामले को लेकर भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील की। न्यायालय ने खटलापुरा मन्दिर के अनुमतिधारक प्रतिवादी मनोज उर्फ मन्नू की गतिविधियों पर रोक लगाते हुए कई दिशा-निर्देश जारी किए। इनमें प्रमुख रूप से यह आदेश था कि मन्नू अब तक मंदिर के प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, मंदिर के दान चढ़ावे पर प्रतिबंध लगाया गया और मंदिर में किसी भी निर्माण कार्य पर रोक लगाई गई।

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