बाराबंकी: नहीं मिली एंबुलेंस तो पत्नी के शव को ठेले पर लाद डेढ किली मीटर पैदल चला पति
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में बदतर स्वास्थ्य सेवा की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो दिल को झकझोर कर रख देगी। दरअसल, बाराबंकी जिले में एक युवक को अस्पताल से एंबुलेंस नहीं मिली तो अपनी पत्नी के शव को ठेले पर लादकर घर लाना पड़ा।
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मामला बाराबंकी जिले के थाना दरियाबाद इलाके के गांव सुरजवापुर का है। गांव केनिवासी देशराज शर्मा की पत्नी गर्भ से थी तो उन्होंने उसे स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया दिया। अस्पताल में उनकीं पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया। लेकिन महिला की हालत बिगड़ गई और महिला ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने जब जांच की तो उसे मृत घोषित कर दिया। देशराज ने अस्पताल से शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस मांगी, लेकिन शव को ले जाने के लिए एंबुलेंस न होने की बात कह कर डॉक्टरों ने एंबुलेंस देने से इनकार कर दिया।
देशराज अपनी पत्नी के शव को एक ठेले पर रख कर लगभग ढाई किलोमीटर दूर तक अपने घर लेकर आया। इस संबंध में देशराज शर्मा ने बताया कि उसकी पत्नी गर्भ से थी और उसका प्रसव कराने वह स्थानीय अस्पताल लेकर गया था। जहां उसकी पत्नी को सामान्य प्रसव हुआ और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चा रो नहीं रहा था इसके लिए उसने डॉक्टरों से बताया और डॉक्टर आते इससे पहले ही उसकी पत्नी की हालत खराब हो गई और जब डॉक्टरों ने उसे देखा तो मृत घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, शव को लाने के लिए एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
मजबूर होकर देशराज ने एक ठेले से अपनी पत्नी के शव को लादकर घर लेकर आया। इस संबंध में बाराबंकी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉक्टर बीके एस चौहान ने बताया कि पहली बात तो एंबुलेंस जीवित व्यक्ति के लिए होती है मृतक के लिए नहीं। मृतक के लिए शव वाहन होता है और वह सीएचसी पर नहीं होता, जिले पर जरूर होती है। लेकिन शव को ठेलिया से ले जाना गलत है इसके लिए डॉक्टरों को किसी शव वाहन या किसी अन्य वाहन की व्यवस्था करनी चाहिए थी। इसके लिए सीएचसी अधीक्षक से पूछताछ जरूर की जाएगी।












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