Karnataka Election 2023: कर्नाटक में इस साल शहर से ज्यादा गावों में वोटिंग, जानिए किसको फायदा, किसको नुकसान?
Karnataka Legislative Assembly election 2023: कर्नाटक की सभी 224 विधानसभा सीटों पर 10 मई 2023 को वोटिंग हुई। कनार्टक चुनाव के नतीजे 13 मई को आएंगे।

Karnataka Legislative Assembly election 2023: कर्नाटक विधानसभा चुनावों के नतीजे 13 मई को आएंगे। कर्नाटक में इस साल 72 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हुई है, जो अब तक राज्य का सबसे ज्यादा मतदान रिकॉर्ड है। 42.5 लाख नए वोटर्स ने पहली बार वोट किया है। वहीं इस कर्नाटक चुनाव-2023 में इस साल शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मतदान दर्ज किया गया है।
ऐसे में ये सवाल उठ रहे हैं कि आखिर रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग से किस पार्टी को फायदा होगा और किस पार्टी को नुकसान...? ज्यादा वोटिंग का क्या मतलब होता है...? इसपर चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि अगर किसी चुनाव में वोटिंग प्रतिशत ज्यादा या रिकॉर्ड दर्ज की गई हो तो इसे ' एंटी एनकंबैसी फैक्टर' कहा जाता है यानी सत्ता में मौजूदा पार्टी से लोग नाराज हैं इसलिए उन्होंने परिवर्तन के लिए वोट डाला है।
चुनावी विश्लेषकों के मुताबिक कम वोटिंग या सामान्य वोटिंग में ज्यादातर कहा जाता है कि वोटर्स उदासीन हैं यानी वो जो जैसे चल रहा है, वैसे ही चलने देना चाहते हैं...उसमें कोई भी बड़ा बदलाव वह नहीं चाहते हैं।
अगर इस लिहाज से देखा जाए तो कर्नाटक में सत्तारुढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए खतरे की घंटी है। वहीं इससे कांग्रेस और जेडीएस को फायदा हो सकता है। लेकिन किसी भी अनुमान लगाने से पहले कर्नाटक विधानसभा चुनाव-2018 के आंकड़े भी जान लेने चाहिए।
भारतीय चुनाव आयोग के मुताबिक कर्नाटक विधानसभा चुनाव-2023 में 72.81 फीसदी वोटिंग हुई है। जो कर्नाटक के इतिहास में 1957 के बाद सबसे ज्यादा है। जबकि पिछले चुनाव विधानसभा चुनाव-2018 में वोटिंग प्रतिशत 72.13 फीसदी थे। अगर आंकड़ों से हिसाब से देखा जाए तो पिछले चुनाव के मुकाबले इस साल के चुनाव के वोटों में कोई बड़ा बदलाव नहीं है। इसलिए ज्यादा वोटिंग का फायदा किसे मिलेगा...इसका अनुमान लगाना मुश्किल है।
कर्नाटक में शहर से ज्यादा गांवों में हुई वोटिंग, जानिए आंकड़े
कर्नाटक के मांड्या जिले में मुख्य रूप से ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र मेलुकोटे में चुनावों में सबसे ज्यादा 90 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हुई। जनता दल (सेक्युलर) का गढ़ माने जाने वाले इस सीट पर 2018 के विधानसभा चुनावों में भी 90 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था।
वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्र बेंगलुरु क्षेत्र की 28 सीटों में से एक सीवी रमन नगर में इस साल सबसे कम 47.4 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। 2018 में इस सीट पर 51 फीसदी वोटिंग हुई थी। भारतीय जनता पार्टी ने लगातार तीन बार इस सीट पर जीत हासिल की है।
कर्नाटक में ग्रामीण क्षेत्रों में हमेशा अधिक मतदान दर्ज किया गया है। शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए बहुत कम उत्साह देखा जाता है। डेटा से पता चलता है कि 2023 और 2018 दोनों में ग्रामीण क्षेत्रों में औसत मतदान शहरी केंद्रों की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा था।
ग्रामीण पुराने मैसूरु क्षेत्र में औसतन 83 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है। वहीं बेंगलुरु क्षेत्र में सबसे कम 55 प्रतिशत मतदान हुआ। दरअसल, इस बार बेंगलुरु रीजन में 2018 के मुकाबले कम वोटिंग हुई है।












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