Amethi : मात्र 34 सेकंड में गिना दिए यूपी के 75 ज़िलों के नाम, कक्षा 5 की अद्भुत छात्रा का वीडियो वायरल
हम बात कर रहे हैं कक्षा 5 में पढ़ने वाली अंकिता की जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अंकिता ने मात्र 34 सेकंड में उत्तर प्रदेश के 75 ज़िलों के नाम गिना कर सभी को हैरान कर दिया है।

आज भारत विश्व गुरु बनने की ओर निरंतर आगे बढ़ रहा है और सबसे ज्यादा युवा शक्ति हमारे देश में है। विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियों के सीईओ, इंजीनियर, डॉक्टर और नासा के वैज्ञानिक हमारे देश से हैं। हमारे युवा सक्षम हैं और उनमें प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आज हम आपको उत्तर प्रदेश के अमेठी ज़िले की ऐसी ही एक बच्ची से रूबरू करवाएंगे जिसने अपने हुनर से सभी को चकित कर दिया है। हम बात कर रहे हैं कक्षा 5 में पढ़ने वाली अंकिता की जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अंकिता ने मात्र 34 सेकंड में उत्तर प्रदेश के 75 ज़िलों के नाम गिना कर सभी को हैरान कर दिया है।
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34 सेकंड में गिना दिए 75 ज़िलों के नाम
दरअसल, अंकिता उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद में प्राथमिक विद्यालय सीतारामपुर में पढ़ने वाली कक्षा 5 की छात्र हैं। इस बच्ची का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है। वीडियो में यह छोटी सी लड़की एक ही सांस में प्रदेश के सभी जिलों के नाम मात्र 34 सेकंड में बोल देती है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं जिस्नका नाम मु जुबानी रटना किसी व्यस्क के लिए भी आसान बात नहीं है। वही मात्र 8-9 साल की इस बच्ची को न सिर्फ सभी ज़िलों के नाम याद हैं बल्कि मात्र आधे मिनट में आपको सारे नाम गिना भी सकती है।
अंकिता से जब पूछा गया कि उनको यह नाम कैसे याद हुए तो उसने बताया कि उन्हें पढ़ा बहुत अच्छा लगता है। इसलिए वह दिन भर कोई न किताब लेकर पढ़ती रहती है। यही नहीं, अंकिता बड़े होकर एक अफसर बनना चाहती हैं और देश के विकास में अपना योगदान भी देना चाहती हैं।

"प्रतिभा की नहीं, अवसर की कमी"
वही अंकिता के स्कूल टीचर्स का कहना है कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी है तो वह अवसर की है। पर्याप्त अवसर और सही दिशा-निर्देश व मार्गदर्शन मिले तो भारत के होनहार पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं। भारत में कई ऐसे बच्चे भी होते हैं, जिनमें योग्यता और प्रतिभा कूट-कूट कर भरी है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए उनके पास कोई संसाधन नहीं है। ऐसे बच्चों को यदि सही संसाधन उपल्ब्ध कराए जाएं तो वहीं बच्चे किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने का माद्दा रखते हैं।












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