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Ajmer Dargah News: यूपी के संभल के बाद अजमेर दरगाह पर सियासत, कश्‍मीर से लेकर हैदराबाद तक से उठ रहे सवाल

Ajmer Dargah News: उत्‍तर प्रदेश के संभल की शाही जामा मस्जिद की तरह अब अजमेर दरगाह को लेकर नया विवाद खड़ा होता जा रहा है। अजमेर दरगाह की जगह संकट मोचन महादेव मंदिर होने को दावा करने वाली याचिका निचली अदालत ने मंजूर कर ली है। इसके बाद से अजमेर दरगाह विवाद पर सियासत हो रही है। जम्‍मू कश्‍मीर से लेकर हैदराबाद व देश के अन्‍य हिस्‍सों से हिंदू-मुस्लिम नेताओं की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

सबसे पहले जानिए आखिर अजमेर दरगाह विवाद क्‍या है? दरअसल, राजस्‍थान के अजमेर शहर में करीब 800 साल से सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है, जिसमें मुस्लिम ही नहीं बल्कि अन्‍य धर्मों के लोगों की भी गहरी आस्‍था है। अब हिंदू सेना के अध्‍यक्ष विष्‍णु गुप्‍ता ने अजमेर सिविल कोर्ट ने याचिका दायर कर दावा किया है कि अजमेर दरगाह की जगह शिव मंदिर हुआ करता था। इसलिए अजमेर दरगाह का अगर कोई पंजीकरण हो तो उसे रद्द करके यहां हिंदुओं को पूजा की इजाजत दी जाए। विष्‍णु गुप्‍ता की याचिका पर अगली सुनवाई 20 दिसंबर को है।

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Politics on Ajmer Dargah after Sambhal

जम्‍मू कश्‍मीर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती

जम्‍मू कश्‍मीर के पूर्व सीएम व डीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर लिखा कि 'सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 1947 में मौजूद सरंचनाओं पर यथास्थिति रहेगी, इसके बावजूद उनके आदेश ने इन स्थानों के सर्वे का रास्ता तैयार कर दिया। इससे हिंदुओं और मुसलमान के बीच तनाव की संभावना बढ़ गई है। महबूब ने सीधे पूर्व सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ की ओर इशारा कर रही थी, जिन्होंने ज्ञानव्यापी के वैज्ञानिक सर्वे की अनुमति दी थी। महबूबा मुफ्ती ने यह भी लिखा कि संभल में हुई ताजा हिंसा उसे फैसले का नतीजा है। पहले अन्‍य मस्जिद और अब अजमेर शरीफ जैसे मुस्लिम दरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। इससे खून खराबा हो सकता है। अब सवाल बना हुआ है कि विभाजन के दिनों को याद दिलाने वाली सांप्रदायिक हिंसा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

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AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी

अजमेर दरगाह मामले में AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने न्‍यूज एजेंसी एएनआई से अजमेर शरीफ़ दरगाह पिछले 800 सालों से हैं। यहाँ प्रधानमंत्री मोदी खुद चादर भेजते हैं, आखिर क्यों BJP-RSS के लोग मस्जिदों और दरगाहों के ताल्लुक से इतनी नफरत पैदा कर रहे हैं ? जो सियासत नरेंद्र मोदी और RSS कर रही है उससे देश कमज़ोर हो रहा है। पीएम मोदी को इस पर जवाब देना चाहिए।

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ओवैसी ने यह भी कहा कि जिस दिन बाबरी मस्जिद-राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया था, उस दिन ही मैंने कह दिया था कि अब इस फैसले के बाद कई और मामले सामने आएंगे। देश में 15 दरगाह और मस्जिद पर केस दायर हो चुका है। मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट में 1991 वर्शिप एक्ट पर दायर केस पर जवाब ही दायर नहीं कर रही है। इस एक्ट का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। इस बात का ताजा उदाहरण यूपी की संभल मस्जिद है।

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी

अजमेर उत्‍तर से विधायक व राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अजमेर शरीफ दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे पर कहा कि "यह विवाद अभी कोर्ट में है। कोर्ट ने अभी नोटिस जारी किए हैं। उसके बाद कोर्ट फैसला करेगा और सर्वे के बारे में जो भी कहेगा, सभी को उसका पालन करना चाहिए... मैं सभी से आग्रह करता हूं कि इस मामले का राजनीतिकरण न करें... पिछले 1100-1200 सालों में आस्था के कई केंद्रों के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन केंद्रों पर कोर्ट को फैसला करने दें..."

राजस्थान के मंत्री जवाहर सिंह बेधम

अजमेर शरीफ दरगाह के भीतर शिव मंदिर का दावा करने वाले मुकदमे पर राजस्थान के मंत्री जवाहर सिंह बेधम ने कहा, "...कांग्रेस ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति करके लोगों को बांटा है...अदालत द्वारा जो भी फैसला लिया जाएगा, राज्य सरकार उसका पालन करेगी..."

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