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अजमेर दरगाह शिव मंदिर विवाद: दीवान जैनुअल आबेदीन बोले-नींद से उठकर दावा करने वालों पर लगे बैन

ajmer Dargah News: अजमेर दरगाह के नीचे संकट मोचन महादेव मंदिर होने दावा किए जाने के बाद देशभर में नया विवाद खड़ा होता दिख रहा है। हिंदू सेना अध्‍यक्ष विष्‍णु गुप्‍ता के दावे वाली याचिका को अजमेर की निचली अदालत ने मंजूर कर लिया है। इस फैसले के बाद से भाजपा-कांग्रेस के नेता समेत अन्य पार्टियों के नेता अपने अलग-अलग बयान दे रहे हैं। पूरे मामले में दरगाह दीवान जैनुल आबेदीन की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दरगाह दीवान जैनुल आबेदीन ने अजमेर दरगाह का इतिहास 800 साल पुराना है। उस समय यहां कच्‍चा मैदान था। मैदान में कब्र थी। जहां कच्‍ची कब्र होगी, वहां पक्‍का निर्माण का दावा कैसे कर सकते हैं? कच्‍ची कब्र के नीचे मंदिर कहां से आएगा?

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Ajmer Dargah Shiva Temple Dispute

आबेदीन ने दरगाह की जगह मंदिर होने का दावा करने वाला बैकग्राउंड देखा जाना चाहिए। वह खुद क्रिमिनल है। ऐसे लोगों पर बैन लगना चाहिए कि नींद से उठकर आ गए और कह दिया कि वहां पर ये हो गया। फिर दावा करने लगे। बस ये लोग नपया विवाद पैदा कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट को इसमें एक्‍शन लेना चाहिए।

आबेदीन ने बताया कि ख्वाजा साहब के वंशजों सहित दरगाह के हितधारकों को कोई कानूनी नोटिस नहीं दिया गया। उन्होंने 1991 के पूजा स्थल अधिनियम का हवाला दिया, जिसके अनुसार भारत में 15 अगस्त, 1947 तक के सभी धार्मिक स्थल अपरिवर्तित रहेंगे। यह कानून दरगाह की स्थिति में किसी भी तरह के बदलाव के खिलाफ उनके तर्क का समर्थन करता है।

ऐतिहासिक साक्ष्य और कानूनी ढांचा
अजमेर दरगाह अंजुमन कमेटी के सचिव आबेदीन और सरवर चिश्ती ने अपने रुख का समर्थन करने के लिए कई ऐतिहासिक संदर्भ प्रस्तुत किए। इनमें जस्टिस गुलाम हसन द्वारा 1950 में की गई जांच और 1829 में अजमेर के कमांडर और कर्नल जेम्स टॉड की रिपोर्ट शामिल हैं। इसके अलावा, 1716 का एक विश्वकोश और 1961 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला बिना किसी मंदिर का उल्लेख किए उनके दावों का समर्थन करता है।

विवाद तब शुरू हुआ जब हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दो साल के शोध और सेवानिवृत्त न्यायाधीश हरबिलास शारदा के लेखन के आधार पर एक याचिका दायर की। गुप्ता का दावा है कि दरगाह बनने से पहले एक ब्राह्मण दंपति ने इस जगह पर एक महादेव मंदिर में पूजा की थी। अजमेर सिविल कोर्ट ने अगली सुनवाई 20 दिसंबर को तय की है।

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