बिहार में आतंकवादियों की मजबूत होती जड़ें

पटना। आतंकवदी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के सह-संस्थापक और भारत सहित दूसरे कई देशों की एजेंसियों द्वारा वांछित यासीन भटकल और असादुल्लाह अख्तर उर्फ हड्डी की गिरफ्तारी से बिहार-नेपाल सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों में बाढ़ की खबर को बल मिला है। वैसे सीमांचल के इलाकों से आतंकवादियों की गिरफ्तारी का यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी कई आतंकवादियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, परंतु भटकल जैसे बड़े आतंकवादी की गिरफ्तारी ने बिहार में आतंकवादियों की जड़ें मजबूत होने की आशंका बढ़ा दी है।

आतंकवादियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे सबूत मिले हैं, जिससे इस बात की ताकीद हो जाती है कि नेपाल के रास्ते आतंकवादी बिहार की सीमा में प्रवेश करते हैं। इसके कुछ दिनों पूर्व दिल्ली पुलिस ने भारत-नेपाल सीमा से लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के 'बम मशीन' कहे जाने वाले अब्दुल करीम टुंडा को गिरफ्तार किया था।


सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में घटी आतंकवादी घटनाओं के बाद संदिग्धों की तलाश में एजेंसियां अन्य राज्यों के साथ-साथ बिहार भी आती रही हैं। बिहार और नेपाल की सीमा खुले रहने के कारण आतंकवादी इसका इस्तेमाल देश में आने-जाने के लिए करते रहे हैं।

वर्ष 2010 में बांग्लादेश भागने की फिराक में एक संदिग्ध तालिबानी आतंकी गुलाम रसूल उर्फ मिर्जा खान को पूर्णिया पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वैसे एजेंसियां इस बात को लेकर आश्वस्त थीं कि बिहार में आतंकवादी घटनाएं नहीं होंगी, लेकिन बोधगया में सिलसिलेवार विस्फोट के बाद एजेंसियों की यह धारणा भी बदल गई।

एजेंसियों के सूत्रों का दावा है कि भटकल देश में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने के बाद दरभंगा और मधुबनी में पनाह लेता था। कुछ दिनों पूर्व ऐसे ही पनाहगाह पर छापा मारकर कई सुरक्षा एजेंसी ने संदिग्ध वस्तुएं भी बरामद की थी। पिछले 10 वर्षों के दौरान आतंकी गतिविधियों मंे शामिल होने के आरोप में विभिन्न इलाकों से सीमांचल क्षेत्रों से 10 से अधिक संदिग्धों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

दरभंगा जिले के लहेरियासराय थाना क्षेत्र से भटकल के सहयोगी माने जाने वाले मोहम्मद दानिश अंसारी को इसी वर्ष जनवरी महीने में गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2000 में सीतामढ़ी जिले से आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सदस्य मकबूल और जहीर को गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिली थी, जबकि 20 जुलाई, 2006 को मुंबई एटीएस की टीम ने मधुबनी जिले के बासोपटी गांव से मोहम्मद कमाल अंसारी को मुंबई में हुए श्रृंखलाबद्ध विस्फोट के आरोप में गिरफ्तार किया था।

इसके बाद 12 नवंबर, 2007 को मधुबनी के रहने वाले मोहम्मद सबाउद्दीन उर्फ फरहान को जयपुर के रामपुर स्थित केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) शिविर पर गोलीबारी करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद दिल्ली में सरोजनी नगर में हुए विस्फोट के मामले में नौ जुलाई, 2008 को उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने लखनऊ से मधुबनी जिले के रहने वाले पप्पू खान को गिरफ्तार किया था।

कुछ ही समय बाद 14 अक्टूबर, 2008 को उत्तर प्रदेश एटीएस ने मधुबनी के ही रहने वाले मोहम्मद खलील को धर दबोचा था और 17 अगस्त, 2009 को आतंकवादी संगठन एलईटी के आतंकवादी उमर मदानी (मधुबनी के बासोपटी निवासी) को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया था।

पुलिस आंकड़े के अनुसार, रामपुर में सीआरपीएफ के शिविर पर हमले के आरोप में 2010 में मधुबनी के गंधवारी से मोहम्मद शबाउद्दीन की गिरफ्तारी की गई थी। वर्ष 2010 के प्रथम महीने में ही गुप्त सूचना के आधार पर पूर्णिया रेलवे स्टेशन से अलकायदा आंतकी मिर्जा खान को गिरफ्तार किया गया, तो 17 अगस्त, 2011 को हुजी के आतंकी रियाजुल को किशनगंज से दबोचा गया था।

एक बार फिर एटीएस की टीम को उस समय सफलता मिली, जब मधुबनी से 24 नंवबर, 2011 को इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी अहमद जीमल और मोहम्मद अजमल को गिरफ्तार किया गया। इन दोनों की तलाश कई आतंकी घटनाओं में थी।

पिछले नवंबर महीने में ही चेन्नई पुलिस की विशेष शाखा ने इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादी और समस्तीपुर के रहने वाले इरशाद खान को गिरफ्तार कर लिया, जबकि 12 जनवरी, 2012 को इंडियन मुजाहिदीन के नकवी और नदीम को दरभंगा से गिरफ्तार किया गया। इसी तरह छह मई, 2012 को आतंकवादी घटनाओं के आरोप में कर्नाटक पुलिस ने दरभंगा से कफील अख्तर को गिरफ्तार किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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