पिंजरे से आजाद होने के लिए और अधिकार चाहती है सीबीआई

cbi
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को पिजरे में बंद तोता करार दते हुए उसकी आजादी की मांग की। कोर्ट से अपनी आलोचना सहने के बाद सीबीआई ने पूर्ण स्वायत्तता और आजादी के लिए और अधिकार दिए जाने की मांग की है। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर सरकार के नियंत्रण से मुक्त होने में बाधा बन रहे सरकारी प्रस्ताव के बिंदुओं को गिनाया है।

इस हलफनामे में सीबीआई ने सीबीआइ निदेशक का कार्यकाल न्यूनतम 3 वर्ष किए जाने की मांग की है। इसके अवाला सीबीआई निदेशक को सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी का दर्जा देने और वित्तीय अधिकार बढ़ाए जाने का अनुरोध किया है।

एजेंसी ने उसके खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए जवाबदेही आयोग गठित करने के सरकार के प्रस्ताव का भी विरोध किया है। सीबीआई ने निदेशक की नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति द्वारा किए जाने का समर्थन किया गया है। लेकिन कहा है कि नए निदेशक की नियुक्ति पर विचार करते समय समिति को सेवानिवृत्त हो रहे निदेशक की राय पर भी विचार करना चाहिए।

इसके अलावा सीबीआई ने मांग की है कि जांच में किसी तरह का हस्तक्षेप न हो, इसके लिए सीबीआइ निदेशक को और अधिक प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार दिए जाए। सीबीआई ने अपने हलफनामे में इस बात का भी जिक्र किया है कि सीबीआई जांच कार्य मंत्रालय के नियंत्रण से मुक्त हो और सीधे मंत्री के प्रति जवाबदेह तय की जाए।

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