साथियों को छ़ड़ाने के लिए बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं नक्सली

डीजीपी कहते हैं कि नक्सली मूवमेंट को लेकर यूपी पुलिस सतर्क है। कुछ जिले हैं जहां गतिविधियों की सूचनाएं हैं। फिलहाल पूरे प्रदेश में अलर्ट घोषित कर सतर्कता बरती जा रही है। चंदौली, सोनभद्र, मिजार्पुर व इलाहाबाद के लालापुर और शंकरगढ़ आदि इलाकों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है और चैकसी भी बढ़ा दी गयी है। नक्सल प्रभावित इलाकों के थानों में अतिरिक्त पुलिस बल भेजा जा रहा है। खुफिया एजेंसियों से सीधे बातचीत कर जानकारी भी हासिल की जा रही है। उन्होंने अपराधियों के खिलाफ युद्ध स्तर पर कार्रवाई का निर्देश दे रखा है।
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के घने जंगलों में छिपे नक्सलियों के कुछ शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली बातचीत सुनी है जिससे यह रहस्योघाटन हुआ है कि वे प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों को अपना निशाना बना सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई एक दीर्घकालिक लक्ष्य है और इसके लिए अर्धसैनिक बलों के 27 हजार जवानों की और जरूरत पड़ेगी।
छत्तीसगढ़ की घटना के बाद अब प्रदेश की अतिसंवेदनशील तीन जेलें नक्सलियों के निशाने पर हैं। खुफिया एजेंसियों की मानें तो नक्सली मिजार्पुर, बनारस व इलाहाबाद के नैनी सेंट्रल जेल में बंद अपने साथियों को छुड़ाने के लिए किसी बड़ी घटना को भी अंजाम दे सकते हैं। इस खुफिया जानकारी के मिलने पर सभी गुप्तचर एजेंसियों को सतर्क कर संवेदनशील जेलों की चैकसी बढ़ा दी गई है।
प्रदेश के मिजार्पुर, बनारस और इलाहाबाद के नैनी सेंट्रल जेल में लगभग 76 नक्सली बंद हैं। इन्हें छुड़ाने की नीयत से ही नक्सलियों ने मिजार्पुर, सोनभद्र, चंदौली, बनारस और नैनी में जाल बिछाना शुरू कर दिया है। इस समय मिजार्पुर में 36, बनारस में 25 और नैनी में 15 नक्सली बंद है।
नक्सलियों की मंशा को खुफिया एजेंसियों ने सरकार तक पहुंचा दिया है। शासन ने जेल अफसरों को नक्सलियों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। खुफिया एजेंसियों ने लगभग एक दर्जन नक्सली गुप्तचरों की पहचान कर उनका ब्यौरा शासन को भेजा है। पुलिस और एसटीएफ की टीमें भी उन पर निगाह रखे हुए हैं।
आईजी जेल आर.पी. सिंह बताते हैं कि जेलों में चैकसी बरती जा रही है। नक्सल प्रभावित जिलों के जेल अधीक्षकों को जेलों में बंद नक्सलियों पर निगाह रखने, स्पेशल हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद करने, स्वयं देर रात तक गश्त करने और मुलाकातियों का ब्यौरा तैयार करने के लिए कहा गया है। पुलिस विभाग भी कुछ जेल परिसरों में बंकर तैयार करा रहा है।
अब अगला निशाना बड़े शहर
नक्सलियों के संदेश से भी सुरक्षा एजेंसियां काफी गहरा मतलब निकाल रही हैं। उनका मानना है कि मीडिया चैनलों को भेजे ई-मेल में अफसोस जताना नक्सलियों की सोची समझी चाल है। नक्सलियों ने हमला करके अपनी व्यापक योजना का लंबा सफर तय कर लिया है। अगर नक्सलियों को कारगर तरीके से नहीं दबोचा गया तो वह अगला निशाना बड़े शहरों को बनाएंगे। नक्सलियों ने हमले करने के लिए अत्याधुनिक हथियारों और सटीक सूचना तकनीक से लैस एक नया दस्ता बनाया है।
उनकी भावी रणाीति में उनके संघर्ष का अंतिम लक्ष्य लांग मार्च है जिसके तहत वह दिल्ली पर लाल झंडा फहराने का सपना देख रहे। नक्सलियों की सबसे बड़ी कमजोरी शहरी मध्यम वर्ग की सहानुभूति नहीं होना है। एजेंसियों को गंभीर अंदेशा है कि इन्होंने शहरों की तरफ लांग मार्च के अंतिम लक्ष्य के लिए काम करना शुरू कर दिया है।
नक्सलियों का फ्री जोन
झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के जंगलों में अबूजमाड़ और दंडकारण्य जैसे फ्री जोन घोषित करना नक्सलियों की पहली कामयाबी थी। नक्सली भाषा में फ्री जोन वह है जहां इनकी हुकूमत चलती है और जहां केंद्र और राज्य सरकारें जाने में सक्षम नहीं है। यह फ्री जोन दरअसल नक्सलियों का किला है जो दुर्गम और खतरनाक जंगलों से घिरा है। नक्सली अब हरेक प्रभावित राज्य के चुनावों में असर डालते हैं। वे पैसे और ताकत के खेल में माहिर हो चुके है और उनका इरादा खतरनाक दिखई दे रहा है।












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