NCPI किसकी पार्टी है? जिसमें शामिल हुए TMC के बागी सांसद बोले- 'PM मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ करेंगे काम'
Nationalist Citizens Party of India: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में चल रही अंदरूनी बगावत अब खुलकर सामने आ गई है। रविवार को टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इसके बाद बागी सांसदों केंद्र में सत्ता पर काबिज भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को अपना समर्थन देने का ऐलान कर दिया। बागी गुट के नेताओं ने एक सुर में कहा कि वो सभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के लिए काम करेंगे।
बता दें बागी सांसदों की अगुवाई कर रही सांसद काकोली घोष दस्तिदार के साथ असंतुष्ट सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की है और बागी धड़े ने संसद के भीतर अपने लिए अलग बैठने का इंतजाम करने की मांग की। स्पीकर को इस संबंध में अपना औपचारिक पत्र भी सौंपा है।

ओम बिरला से मुलाकात के बाद काकोली घोष ने ऐलान किया कि सभी बागी 20 सांसद नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए हैं और एनडीए का समर्थन करते हुए पीएम मोदी के प्रतिनिधित्व में काम करेंगे। काकोली घोष के ऐलान के बाद एआईटीसी पार्टी लाइम लाइट में आ चुकी है। आइए जानते हैं क्या है ये NCPI किसकी पार्टी है, जिसमें ममता बनर्जी से बगावत करने वाले20 सांसद शामिल हुए हैं....
Nationalist Citizens Party of India: NCPI किसकी पार्टी है?
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) त्रिपुरा की भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त लेकिन एक रजिस्टर्ड गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। मुख्य रूप से त्रिपुरा केंद्रित इस पार्टी का राष्ट्रीय स्तर पर बहुत बड़ा जनाधार नहीं है, लेकिन इसकी अपनी एक विशिष्ट पहचान और संविधान मौजूद है। यह मुख्य रूप से बंगाली भाषी समुदायों के प्रतिनिधित्व के लिए बनाई गई एक कम चर्चित पार्टी है, जिसे एनडीए (NDA) का मित्र दल माना जाता है।
पूर्वोत्तर के राज्य त्रिपुरा से संचालित इस पार्टी के पास एक रजिस्टर्ड चुनाव चिन्ह भी मौजूद है। जब भी कोई राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल बगावत से जूझता है, तो ऐसे छोटे और रजिस्टर्ड दल बागी नेताओं के लिए एक सुरक्षित राजनीतिक मंच के रूप में काम करते हैं जहां वे तकनीकी रूप से शरण ले सकते हैं।
टीएमसी के कई नेताओं का त्रिपुरा के साथ पुराना और काफी सक्रिय राजनीतिक नाता रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने खुद राज्य में अपना संगठन बढ़ाने के लिए लंबे समय तक काम किया था। इस दौरान बंगाल के कई बड़े बागी नेताओं ने वहां स्थानीय स्तर पर अपने गहरे संपर्क और प्रभाव स्थापित कर लिए थे।
बागी सांसदो के लिए NCPI कैसे बनी सुरक्षा कवच बनीं
भारतीय संसद के नियमानुसार दल-बदल विरोधी कानून के तहत यदि कोई निर्वाचित सांसद अपनी मूल पार्टी को स्वेच्छा से छोड़ता है, तो उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है। टीएमसी के बागी सांसद इस कड़े कानून से बचने के लिए सीधे किसी बड़ी विरोधी पार्टी जैसे भाजपा में शामिल होने से बचते हैं।
इस कानूनी संकट के समय नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) जैसी छोटी पार्टी एक ढाल की तरह काम करती है। यदि बागी सांसद इस पार्टी के साथ खुद को जोड़ते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष चलने वाली अयोग्यता की प्रक्रिया काफी जटिल हो जाती है, जिससे उन्हें पर्याप्त राहत मिल जाती है।
इस कानूनी दांवपेच के जरिए बागी सांसदों को संसद में अपनी बातें रखने और अयोग्यता की प्रक्रिया को लंबा खींचने का मौका मिलता है। जब तक इस पर अंतिम निर्णय आता है, तब तक सदन का कार्यकाल समाप्त होने के करीब पहुंच जाता है और वे बिना सदस्यता गंवाए अपना कार्यकाल पूरा कर लेते हैं।
TMC के बागी सांसदों को क्या मिलेगा ये मौका?
TMC के बागी सांसदों (कुल संख्या का दो-तिहाई से अधिक) ने ममता बनर्जी से अलग होकर जून 2026 में आधिकारिक तौर पर इस पार्टी में विलय कर लिया। टीएमसी से अलग हुए इन 20 लोकसभा सांसदों ने एनसीपीआई के बैनर तले संसद में अलग बैठने की मांग की है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) को समर्थन दिया है। ओम बिरला को लिखित पत्र सौंपा है, अगर वो अनुमति दे देते हैं तो आगामी मानसून सत्र में ये 20 सांसद एडीए के सांसदों के साथ बैठे नजर आएंगे।














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