बैंगलोर में बम धमाके के लिये फेवरेट तारीख है 17 अप्रैल
बैंगलोर। तारिख 17 अप्रैल 2013। जगह मलेश्वरम का बीजेपी दफ्तर और समय सुबह के 10 बजकर 30 मिनट। यही वो वक्त था जब आईटी सिटी बैंगलोर धमाके की गूंज से दहल उठी। चारों ओर धूंआ ही धूंआ। रोते-बिलखते लोग। चारों ओर खून ही खून। धमाका इतना तेज की आसपास के घरों और गाडियों के शीशे चकनाचूर हो गए। बीजेपी दफ्तर के सामने बम फटा और अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए भागते रहे। तकरीबन 15 लोग धमाके में घायल हो गए।
5 पुलिसवाले भी घायलों की सूची में शामिल हैं। ब्लास्ट बीजेपी दफ्तर के सामने रखी मोटरसाइकिल में हुआ। पास खड़ी गाड़ियां धू-धू कर जलने लगी। पुलिस कमीश्नर और गृहराज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने भी इसे बम धमाका करार दिया। कर्नाटक के गृहमंत्री ने इसे आंतकी हमला करार दिया और कहा कि आंतकी बीजेपी दफ्तर को निशाना बनाना चाहते थे।

आज कर्नाटक विधानसभा चुनाव में नामांकन की आखिरी तारिख थी। वहां काफी हलचल थी। आंतकियों ने इसी का फायदा उठाया और धमाके को अंजाम दिया। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल को चारों ओर से घेर लिया। ऐंबुलेंस और पुलिस के साइरनों की आवाज चारों ओर गूंजने लगी। आप शायद भूल गए हो, लेकिन तीन साल पहले आज के ही बैंगलुरु एकबार और दहला था। 17 अप्रैल 2010 को बैंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में आंतकियों ने इसी तरह के धमाके को अंजाम दिया था। चिन्नास्वामी स्टेडियम में आईपीएल मैच की तैयारियां चल रही थी। स्टेडियम लोगों से खचाखच भरा था।
तकरीबन 40 हजार दर्शक मैच देखने आए थे कि मैच शुरु होने से चंह मिनट पहले ही स्टेडियम के बाहर दो तेज धमाके हुए। सिरियल ब्लास्ट में 15 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं जिनमें चार पुलिसकर्मी और एक सिक्योरिटी गार्ड शामिल थे। पहला धमाका स्टेडियम के बाहर हुआ और दूसरा स्टेडियम से थोड़ी दूर कुंबले सर्किल पर हुआ। इसे तारिखों का खेल कहें या फिर आंतकियों की गणित, लेकिन 17 अप्रैल आईटी सिटी बैंगलुरु के लिए 'ब्लैक डे' बन चुका है। आंतकी बार-बार 17 तारिख को ही बैंगलुरु को निशाना बनाते हैं। लेकिन ना तो पुलिस आंतकियों की साजिश को नाकाम कर पाती है और ना ही सुरक्षा ऐजेंसियां इस बाबत कोई इत्तलाह कर पाती है।
सवाल उठना लाजमी है कि आखिर क्यों हमारी सुरक्षा तंत्र आंतकियों के इस तारिखों के खेल को नहीं समझ पाती? तीसरी बरसी होने के बाद भी बैंगलोर पुलिस सर्तक क्यों नहीं हो पाई? क्या बैंगलोर पुलिस 26/11 जैसे बड़े आंतकी हमलों का इंतजार कर रही है, अगर हां तो वो कोई बात नहीं और अगर ना तो फिर धमाकों के बाद की बयानबाजी बंद कर सुरक्षा तंत्र को मजबूत क्यों नहीं किया जा रहा है?












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