केजरीवाल से अन्ना बोले अब अनशन की जरूरत नहीं
सिरसा। केजरीवाल को अनशन नहीं करनी चाहिए था क्योंकि अब वक्त अनशन करने का नहीं बल्कि लड़ाई लडऩे का है। अनशन की जरूरत नहीं है, जनता के बीच जाकर संघर्ष करने की जरूरत है। भ्रष्टाचार में संलिप्त लोगों को अनशन की भाषा समझ में नहीं आती। भ्रष्टाचार के खिलाफ देश की जनता को जगाने निकले गांधीवादी नेता व समाज सेवी अन्ना हजारे ने कहा कि जनतंत्र मोर्चे का मकसद सत्ता परिवर्तन नहीं है, बल्कि संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन है। और, यह आंदोलन संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन तक चलता रहेगा। जनांदोलन सरकार गिराने के लिए नहीं है। यह बात समाज सेवी अन्ना हजारे ने सिरसा के लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही।
अब सता नहीं जन परिवर्तन की जरूरत
अन्ना हजारे ने कहा कि जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले फैसले जनता के अनुसार नहीं लेते। उन्होंने कहा कि अब सता नहीं जन परिवर्तन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनतंत्र यात्रा के दौरान लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है। पंजाब व हरियाणा से मिले जन समर्थन ने उन्हे इस बात की उम्मीद जगा दी है कि परिवर्तन होकर रहेगा। अन्ना ने बताया कि यात्रा के माध्यम से लोगों को परिवर्तन के प्रति जागरूक किया जा रहा है, और आने वाले समय में परिवर्तन होकर रहेगा। उन्होंने कहा कि जनता में जागरूकता आ रही है।
जनता जागेगी, तभी बात बनेगी

अन्ना हजारे ने कहा कि जनता मालिक है और अफसर व विधायक-सांसद सेवक हैं। लेकिन, मालिक सो गया है, इसलिए चोरी, भ्रष्टाचार शुरू हो गया। हम मालिक को जगाने के लिए देश में घूम रहे हैं। मालिक (जनता) जागेगा, तभी बात बनेगी। जनतंत्र नहीं रहा, पार्टी तंत्र-अफसर तंत्र बन कर रह गया। उन्होंने कहा कि जनतंत्र मजबूत होगा, तभी बात बनेगी। अब पैसे से सत्ता और सत्ता से पैसा चल रहा है। जनता के नुमाइंदों को देश से सरोकार नहीं रहा। पहला दोष पार्टियों का है। गलत आदमी को टिकट देती हैं। दूसरी गलती हमारी है। गलत वोटिंग करते हैं। हमारे भाई शराब व नोट लेकर वोटिंग करते हैं। अब प्रतिज्ञा लो कि रिश्वत लेकर वोटिंग नहीं होगी। नया भारत बनाना है और लोगों को जगाना है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार गिराने की शक्ति जनता के हाथ नहीं आएगी, तब तक बात नहीं बनेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार गिराने के लिए जनांदोलन की बात गलत थी। जन आंदोलन चलाकर कई सरकार बदली। यह सोच अधूरी थी। संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन अब जरूरी है। यह काम साल डेढ़ साल का नहीं है। संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन तक काम करना होगा। इसके लिए सबसे जरूरी है संगठन का मजबूत होना। गांव स्तर तक संगठन को मजबूत करना होगा। इस दौरान सेवानिवृत्त आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह, टीम अन्ना के सदस्य मौलाना सूफी जिलानी, पूर्व सांसद संतोष भारती, योगी चंद्रपाल, रिटायर्ड आईजी सीआर कंसवा, सुरेंद्र मिचनाबादी, जगदीश चोपड़ा, लालचंद गोदारा, महेश पारिक, जगदीश सिंवर, पूर्व विधायक भागीराम, रामकीदास भाटिया आदि ने विचार रखे। मंच संचालन डा. राजकुमार सिवाच ने किया।












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