कौन हैं पाकिस्तान के 'अन्ना' मौलवी ताहिर उल कादरी?

पाकिस्तान में कादरी के आह्वान पर लाखों लोग इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। ट्रकों, रेलगाडि़यों, कारों और बसों में भर कर लोग इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, जहां वर्तमान सरकार को गिराने का दबाव बनाया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह आजादी के बाद पाकिस्तान की अब तक की सबसे बड़ी क्रांति है। तो चलिये हम आपको बताते हैं कि यह क्रांति लाने वाले कादरी कौन हैं?
कादरी वो मुस्लिम विद्वान हैं, जिन्हें इस्लाम से निकाला जा चुका है। उन्हें इस्लाम से इस लिये बाहर कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने यहूदी और ईसाई को अहल-ए-इमान बताया था यानी ईसाई और यहूदी भी मस्जिद में नमाज़ अदा कर सकते हैं। उनके इस बयान के बाद देश भर में उनका विरोध हुआ था। लेकिन जिन लोगों ने कभी कादरी का विरोध किया था, वही लोग आज उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस्लामाबाद तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा था कि एक दूसरे के पीछे नमाज़ अदा की जा सकती है, वह खुद भी ऐसा करते हैं।
19 फरवरी 1951 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित झंग में पैदा हुए कादरी पंजाबी सियाल परिवार से ताल्लुक रखते हैं। कादरी ने बचपन से ईसाई स्कूल में पढ़ाई की, लिहाजा उन्हें ईसाई धर्म का खासा ज्ञान है। उन्होंने विधि और इस्लाम की तालीम पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर से ली। उनहोंने सारी दुनिया में घूम-घूम कर इस्लाम की विचारधारा का प्रचार किया।
1987 में उन्होंने मिनाज-ए-कुरान की स्थापना की और उसके करीब एक दशक तक इस संस्था को अंतर्राष्ट्रीय पहचान देने में काम किया। कादरी ने एक राजनीतिक पार्टी का गठन भी किया। उनकी पार्टी का नाम है- पाकिस्तान आवामी तहरीक। उनकी संस्था 'मिनहाज-उल-क़ुरान इंटरनेशनल' का ध्येय इस्लामी विचार को ग़ैर-चरमपंथी दृष्टि से समझना-समझाना, शिक्षा पर ज़ोर देना और अन्य धार्मिक समुदायों के साथ शांतिपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना था।












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