अपने संविधान से फांसी की सजा खत्‍म करे भारत: ह्रयूमन राइट्स वॉच

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नई दिल्‍ली। निर्दोष लोगों की मौत के जिम्‍मेदार आतंकी अजमल आमिर कसाब को फांसी दिये जाने पर भले ही पूरे भारत ने इसे सही ठहराया हो लेकिन इस विषय पर ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशिया विंग की डायरेक्‍टर मीनाक्षी गांगुली का कहना है कि भारत को अपने संविधान से फांसी की सजा को हटा देना चाहिए। गांगुली का कहना है कि कसाब को फांसी देना इस मसले पर भारत के मत को दर्शाता है।

गौरतलब है कि कसाब को फांसी दिये जाने से एक दिन पहले ही भारत ने फांसी की सजा खत्‍म किये जाने के फैसले का संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ में विरोध किया था। उसके एक दिन बाद ही कसाब को फांसी दे दी गई। जिस पर मीनाक्षी गांगुली का कहना है कि भारत का यह फैसला मौत की सजा दिये जाने की सोच का समर्थन करने वाला है। भारत के अलावा संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ में मौत के फैसले का समर्थन करने वाले देशों में पाकिस्‍तान, अमेरिका, जापान, ईराक, ईरान, कुवैत और बांग्‍लादेश हैं। वहीं दुनिया के 110 देश ऐसे हैं जिन्‍होने फांसी की सजा को अपने संविधान से खत्‍म कर दिया है। इन देशों में फ्रांस, आस्‍ट्रेलिया, जर्मनी और रूस भी हैं।

मीनाक्षी गांगुली का कहना है कि किसी को मौत की सजा देने का पक्ष लेते समय भारत सरकार को उन राष्‍ट्रो से प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्‍होने अपने संविधान से इस सजा को बाहर कर दिया है। इस मसले पर पहले भी कई बार संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ में आवाज उठायी गयी है और हमेंशा ही उन देशों ने इसका विरोध किया है जो किसी न किसी समय आतंकवाद से पीडि़त रहे हैं।

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