टीम अन्ना की लिस्ट में मनमोहन सिंह भ्रष्ट नंबर 1
ये हैं आरोप जो टीम अन्ना ने मनमोहन सिंह पर लगाये। यह कॉपी सीधे टीम अन्ना के कार्यालय से आयी है।
2006-2007 में तत्कालीन कोयला मंत्री श्री शिबू सोरेन जेल चले गए थे। नवंबर 2006 से मई 2009 तक प्रधनमंत्री खुद ही कोयला मंत्री थे। 2009 में श्री प्रकाश जायसवाल कोयला मंत्री बने।
देश का सबसे बड़ा कोयला घोटाला 2006-2010 के बीच हुआ। इस दौरान कोयले के ढेरों ब्लाक आनन-प़फानन में कौडि़यों के भाव में दे दिए गए। ये कोयले की खानें सिपर्फ 100 रूपये प्रति टन की रॉयल्टी के एवज में बांट दी गई। ऐसा तब किया गया जब कोयले का बाज़ार मूल्य 1800 से 2000 रुपये प्रति टन के मूल्य पर था। 2006 में माइंस और मिनरल एक्ट, डेवलपमेंट एंड रेग्युलेशन एक्टद्ध में संशोध्न का प्रस्ताव राज्यसभा में लाया गया था।
इस संशोधन प्रस्ताव के मुताबिक कोई भी ब्लॉक नीलामी करके ही निजी कंपनियों को दी जा सकती थी। इस कानून को संसद में चार साल तक लंबित रखा गया और जब तक यह कानून संसद में लंबित रहा तब तक कोयले की ढेरों खदानें सरकार ने बिना नीलामी के अपने चहेतों को मुफ्रत में दे दी। अनुमान के मुताबिक इससे देश को कई लाख करोड़ रूपये का घाटा हुआ।
कुछ साल पहले तक जहां हर साल 3 से 4 कोयले की खदानें आबंटित की जाती हैं वहां 2006 के बाद प्रधनमंत्री की देख-रेख में 22 से 24 खदानें आबंटित की जाने लगी। ये सारी खदानें सरकारी खजाने को ताक़ पर रखकर औने-पौने दाम पर आबंटित की गईं।
दुर्भाग्य की बात यह है कि इस मामले के जांच के आदेश तक नहीं दिए गए हैं। क्या नियमानुसार चलना ही मात्रा प्रधनमंत्री की जिम्मेदारी है? क्या ऐसे नियम जिनसे देश के सरकारी खजानें को लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान होता है, बदलना प्रधनमंत्री की जिम्मेदारी नहीं? क्यों उन्होंने अपनी इस जिम्मेदारी को अनदेखा किया? ये लाखों-करोड़ों रुपये न तो देश को मिले और न ही देशवासियों को - मिले तो चंद निजी कंपनियों को। क्या प्रधनमंत्री अब भी कहेंगे कि वे गुनेहगार नहीं हैं?
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