गुजरात के विकास की धुन में नरेंद्र मोदी

गुजरात में पिछले विधानसभा चुनाव के ठीक पहले वो गुजरात में निवेश के संबंध में विदेश गये। किसी सामान्य राजनेता के लिए दोबारा सत्ता में आने को ज्यादा महत्व देते हैं, लेकिन मोदी ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने गुजरात में वापसी की बात को बिना सोचे राज्य के लिए निवेश लाने का प्रयास किया।
उनका समर्पण चुनाव परिणाम के रूप में दिखा। गुजरात में कोई क्षेत्र नहीं है, जहां विकास नहीं हुआ हो। वास्तव में गुजरात के किसी भी भाग में 25 किलोमीटर के दायरे में आपको कोई न कोई विकास कार्य होता जरूर दिखेगा। यह मोदी की कड़ी मेहनत के परिणाम हैं। उन्हीं की वजह से 1960 में पैदा हुए गुजरात को पहली बार दो संख्या वाला विकास मिला।
पूर्व में औद्योगिक निवेश में गुजरात कभी पहले स्थान पर नहीं आया था। लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। वास्तव में जब पूरे देश में निवेश का मौसम बदला तो गुजरात उसमें सबसे आगे था। जिस राज्य को कभी कृषि के नाम से नहीं जाना गया, वहां कृषि में 11 प्रतिशत वृद्धि हुई। खास बात यह है कि राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है।
वहां तमाम परिणाम हैं, जो एक दृष्टिकोण के साथ दयानीय नीतियों को ऊपर लायीं और 6 करोड़ गुजरातियों के विकास को अपना मकसद बनाया।
बड़े सपने देखो, सर्वोत्तम का लक्ष्य बनाओ
नरेंद्र मोदी कहते हैं- "सपने वो नहीं होते जो आप सोते वक्त देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।"
हार सफलता की कहानियों के पीछे सपने होते हैं, एक लक्ष्य होता है जो उसे आगे लेकर जाता है और अपनी क्षमता का 100 प्रतिशत देने के लिए प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आसमान ही सीमा है। यह उनका ही स्वप्न है, जो गुजरात के विकास का मॉडल आज पूरे विश्व में मशहूर है। उनका सपना था कि गुजरात का चौतरफा विकास हो और यह उन्हीं की मेहनत है, कि आज उनके कार्यकाल के साथ-साथ कई परियोजनाएं भी पूरी हो रही हैं।
वहीं बाकी के राज्यों में नदियों को जोड़ने की परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। मोदी ने यह कर दिखाया और गुजरात की नदियों को कनेक्ट कर दिया। वो भी ऐसी नदियों को जो सूखने की कगार पर थीं। आज नर्मदा बांध बहुत अच्छी तरह से काम कर रहा है। गुजरात में ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर कभी नहीं था, जो आज है।
नर्मदा बांध की कुछ विशेषताएं
2003 में नरेंद्र मोदी का सपना पूरा हुआ, जिसके अंतर्गत गुजरात वैश्विक व्यवसाय का हब बन गया। और तभी से वाइब्रेंट गुजरात शुरू हुआ। आर्थिक मंदी के पहले वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इंवेस्टर सम्मिट में 240 अमेरिकी डॉलर के एमओयू लाये, जिनकी वजह से देश में तेजी से विकास हुआ। मोदी के सपने के बगैर इसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था और न ही दुनिया भर के उद्यमि कभी गुजरात की तरफ देखते।












Click it and Unblock the Notifications