नरेंद्र मोदी को है काम का नशा

Narendra Modi with his mother
नरेंद्र मोदी कहते हैं, “मुझे काम का अवसर मिले यह मेरा सौभाग्‍य होगा। मैं अपनी आत्‍मा उसमें रख देता हूं। हर अवसर अगले के लिए द्वार खोलता है।”

जो लोग मोदी के करीब रहकर काम कर चुके हैं, वो यह बात मानते हैं कि उन्‍हें काम करने का एक नशा है। बचपन से ही मोदी ने कड़ी मेहनत को महत्‍व दिया है। छात्र जीवन में भी वो काफी समर्पित भाव से पढ़ाई करते थे। संघ के प्रचारक बनने के बाद भी उनका व्‍यक्तित्‍व वैसा ही रहा। यही कारण था कि संघ और भाजपा में उन्‍हें कई महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारियां भी दी गईं।

काम का नशा तब और चढ़ा जब मोदी ने मुख्‍यमंत्री की गद्दी संभाली। जिम्‍मेदारियां ढेर सारी थीं। जो उन्‍होंने पहले दिन से संभाल लीं। वे पूरे-पूरे दिन काम करते। मंत्रियों, अधिकारियों के साथ बैठकें बाहर जाकर विकास कार्यों का जायजा लेना, आदि उनके काम का रुटीन बन चुका था।

मोदी के काम करने के तरीके की वजह से गुजरात की सरकार के क्रिया-कलाप में भी बड़ा परिवर्तन दिखाई दिया। वो लोगों के लिए रोल मॉडल बन गये। उन्‍होंने मेरिट के आधार पर अधिकारियों का तबादला व नियुक्तियां कीं। उन्‍हीं के प्रयासों से गुजरात ने कंप्‍यूटर तकनीकी को अपनाया और आगे चलकर उसे आईएसओ सर्टिफिकेट मिला, जो पहली बार किसी सरकारी महकमे को था।

विस्‍तृत विकास- जहां कोई पीछे नहीं छूटा

नरेंद्र मोदी कहते हैं, “लोगों की भागीदारी ही अच्‍छे शासन का अर्क है।”

गुजरात, जहां वोटबैंक की राजनीति ने सामाजिक तारों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था, वहां आगे बढ़ना काफी मुश्किल था। मोदी ऐसी सरकार देने के लिए काफी दृढ़ थे, जो मजबूत हो, स्‍थाई हो और एक-एक गुजराती के लिए हो। उनके बीच में कोई भेद-भाव नहीं हो। सच्‍चर कमेटी के साथ वार्ता में मोदी ने पूरे विश्‍वास के साथ कहा, “मेरी सरकार अल्‍पसंख्‍यकों के लिए काम नहीं करती। न ही यह बहुसंख्‍यकों के लिए काम करती है। यह सिर्फ 6 करोड़ गुजरातियों के लिए काम करती है।”

जब मोदी ने अपनी शक्ति को गांवों में लगाया और सूखी नदियों में पानी ले आये तब उससे सभी गुजराती लाभांवित हुए न कि किसी विशेष समाज या धर्म के लोग। उनके द्वारा चलाये गये अभियान जैसे- वन बंधु योजना, सागर खेदु योजना, गरीब समृद्धि योजना उन लोगों के जीवन में बड़ा परिर्वतन लायीं, जो विकास की धारा से अलग थे। मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी टीम में भी वही जोश भर दिया है, जो उनके खुद के अंदर है।

खुद से आगे सेवा

लोगों को प्रभावी शासन मुहैया कराने में कुलपक्षपा का डर हमेंशा विकास के आगे बाधा के रूप में आता है। लेकिन मोदी इस दानव से काफी दूर हैं। अपनी ईमानदारी और निष्‍पक्षता, वो निजी स्‍वार्थ या किसी प्रकार के वंश को आगे बढ़ाने की बातों से ऊपर उठ चुके हैं।

मुख्‍यमंत्री द्वारा प्राप्‍त उपहारों को अब राज्‍य कोष में जमा करना अब अनिवार्य कर दिया गया है, जोकि पहले कभी नहीं होता था। मोदी के आने से पहले 13 मुख्‍यमंत्री हुए, जिनहोंने 4.55 लाख रुपए जमा किया। लेकिन मोदी ने न केवल भारी संख्‍या में राशि जमा की, बल्कि उस धन को कन्‍या केलावनी निधि को दे दिया। यह धन विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा के लिए निर्धारित किया है। मोदी के इस कदम ने हर छात्रा और उनके माता-पिता के चेहरे पर मुस्‍कान दी। सद्भावना मिशन के दौरान मोदी ने छात्रों और शिक्षकों से विशेष मुलाकातें कीं।

यही कुछ विशेषताएं हैं, जो नरेंद्र मोदी को बाकियों से अलग करती हैं। मोदी जैसे व्‍यक्ति से आप बहुत कुछ सीख सकते हैं और प्रेरणा ले सकते हैं। आज की पीढ़ी जिसने स्‍वामी विवेकानंद को नहीं देखा वो नरेंद्र मोदी को देख सकते हैं। उनकी प्रतिभा, भारत के लिए साफ दृष्टिकोण और बिना थके काम करने की क्षमता किसी को भी प्रेरित करने के लिए काफी है।

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