Operation Sindoor Anniversary: ‘ भारत न भूलता है, न माफ करता है' ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल, देश ने ऐसे किया याद

Operation Sindoor Anniversary: आज पूरा देश 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) की पहली वर्षगांठ मना रहा है। ठीक एक साल पहले, 7 मई 2025 को भारतीय वायु सेना और सशस्त्र बलों ने सीमा पार जाकर आतंकवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और सटीक कार्रवाई की थी।

यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में निदोष पर्यटकों पर हुए बर्बर आतंकी हमले का 'अंतिम न्याय' था। इस मौके पर भारतीय वायु सेना, रक्षा मंत्रालय और सेना के शीर्ष अधिकारियों ने शहीदों और जवानों के साहस को याद करते हुए देश की सैन्य ताकत को सलाम किया।

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भारतीय वायु सेना का संदेश- भारत कभी नहीं भूलता

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय वायु सेना (IAF) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक और सख्त संदेश साझा किया। वायु सेना ने लिखा,"Justice served. Precise in action, eternal in memory-Operation Sindoor continues. India forgets nothing. India forgives nothing."

यानी, 'न्याय किया गया। कार्रवाई सटीक थी और इसकी याद हमेशा अमर रहेगी। ऑपरेशन सिंदूर जारी है। भारत कुछ नहीं भूलता और भारत कुछ माफ नहीं करता।' इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर #OperationSindoor ट्रेंड करने लगा और हजारों लोगों ने भारतीय सेना के साहस को सलाम किया।

Pahalgam Terror Attack: जिसने देश का खून खौला दिया

22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाया था, जिसमें 26 मासूम नागरिकों की जान चली गई थी। इस हमले ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी थी, बल्कि देश की एकता पर प्रहार करने की कोशिश की थी। इसके जवाब में भारत सरकार ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर की योजना बनाई।

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IAF Operation Sindoor: वो 72 घंटे जिसमें वायु सेना ने पाक के 9 आतंकी कैंपों का किया खात्मा

7 मई 2025 की सुबह, भारतीय लड़ाकू विमानों (राफेल, सुखोई-30 MKI और मिराज-2000) ने एलओसी पार कर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में छिपे आतंकियों के ठिकानों पर कहर बरपाया। भारतीय सेना ने बहावलपुर और पंजाब (पाकिस्तान) के उन इलाकों में भी स्ट्राइक की, जिन्हें अब तक सुरक्षित माना जाता था।

इस ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के 9 प्रमुख लॉन्च पैड्स और ट्रेनिंग कैंपों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्टों के अनुसार, इस सर्जिकल एयरस्ट्राइक में 100 से अधिक खूंखार आतंकी मारे गए थे। ऑपरेशन सिंदूर में भारत के स्वदेशी हथियारों स्वदेशी पराक्रम का जलवा दिखा था।ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल और आकाश (Akash) मिसाइल सिस्टम का बड़े पैमाने पर सफल उपयोग किया गया।

गौरतलब है कि, ऑपरेशन सिंदूर केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं था। भारत ने पहली बार कड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित करने का संकेत दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया था कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह नहीं छोड़ता, तब तक 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते'।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संदेश: आत्मनिर्भरता और संकल्प का प्रतीक

ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों के साहस को सलाम किया। उन्होंने कहा-"ऑपरेशन सिंदूर राष्ट्रीय संकल्प और तैयारी का एक शक्तिशाली प्रतीक है। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारे सशस्त्र बल निर्णायक कार्रवाई करने के लिए हमेशा तैयार हैं। यह ऑपरेशन आधुनिक सैन्य अभियानों के लिए एक बेंचमार्क है, जिसने सेवाओं के बीच बेजोड़ सटीकता और तालमेल का प्रदर्शन किया।"

उन्होंने आगे कहा कि यह ऑपरेशन भारत की 'आत्मनिर्भरता' की दिशा में बढ़ते कदमों का भी गवाह है, जहाँ हमारे स्वदेशी रक्षा तंत्र ने दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए।

'नया भारत' की सैन्य नीति का प्रतीक

विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की नई सुरक्षा नीति का प्रतीक बन गया है, जिसमें आतंकवादी हमलों का जवाब सीमित बयानबाजी नहीं बल्कि रणनीतिक कार्रवाई से दिया जाता है। यह ऑपरेशन केवल सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति और सुरक्षा तंत्र की क्षमता का भी प्रदर्शन माना गया। एक साल बाद भी ऑपरेशन सिंदूर देश की सामूहिक स्मृति में जिंदा है और यह संदेश देता है कि भारत अपने नागरिकों के खिलाफ हुए हमलों को कभी नहीं भूलता।

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