भाजपा ने उठाया कृषि का मुद्दा, कहा संकट में किसान

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लखनऊ। फसलों का सही दाम न मिल पाने के कारण जहां किसान परेशान हैं वहीं सरकार अपने निजी लाभ के लिए बिचौलियों को संरक्षण दे रही है। भाजपा ने प्रदेश की मायावती सरकार को किसान विरोधी बताते हुए कहा है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान संकट में हैं।

भाजपा उपाध्यक्ष और प्रदेश चुनाव अभियान समिति के संयोजक कलराज मिश्र ने जन स्वाभिमान यात्रा के दौरान कहा कि सरकार के एजेन्डे से खेती और किसान गायब है। पूरे राज्य में खाद का संकट गहरा गया है और इसके लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार की नीतियां पूरी तौर पर जिम्मेदार हैं। श्री मिश्र ने कहा कि सरकारी गोदामों में अब भी प्रति बोरी 542.70 रुपये की दर से डीएपी है। उन्हीं गोदामों में 605 रुपये प्रति बोरी की डीएपी भी पड़ी है। मौजूदा समय में डीएपी 960 रुपये से 1200 रुपये तक पहुंच चुकी है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में जमाखोरी और काला बाजारियों को बढ़ावा देने की नीति के तहत भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। पिछले वर्ष केन्द्र सरकार ने यूरिया को छोड़कर सभी उर्वरकों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया है जिसके परिणाम स्वरुप खाद के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। इसकी समीक्षा होनी चाहिए कि आखिर सब्सिडी कम करने के पीछे कारण क्या है। बिचौलिये सरकारी संरक्षण में हावी है।

बाजार में अब तक साढ़े पांच लाख टन धान की आवक हो चुकी है। सरकार मात्र 70 हजार टन धान ही खरीद पायी है जबकि लक्ष्य 25 लाख टन खरीदने का है। भाजपा नेता ने इसे सरकार की सोच समझी साजिश बताते हुए कहा कि राज्य सरकार की बिचौलियों को लाभ पहुंचाने की कथित नीति जिम्मेदार है वहीं केन्द्र सरकार का उपेक्षा पूर्ण रवैया भी एक महत्वपूर्ण कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि गन्ने पर नया विवाद पैदा हो गया है। मुख्यमंत्री द्वारा गन्ने का नया मूल्य निर्धारित करने के कारण मिल मालिक अदालत जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा यदि सत्ता में आयेगी तो किसानों की इन तमाम समस्याओं का निदान किया जायेगा।

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