कांग्रेस के प्रति देश की जनता में गुस्सा : रविशंकर प्रसाद

हरियाणा 18वां प्रदेश है जहां जनचेतना यात्रा पहुंची है। अब तक यात्रा ने लगभग 5500 किमी की यात्रा पूरी कर ली है और प्रतिदिन 300 किमी की यात्रा की जाती है। उन्होंने बताया कि अब तक जहां-जहां आडवाणी की रथयात्रा पहुंची है, वहां-वहां लोगों का अपार समर्थन मिला है। इसके पीछे भ्रष्टाचार व महंगाई सबसे बड़ा कारण है क्योंकि दोनों ही मुद्दों पर देश की जनता में गुस्सा है। उन्होंने कहा कि जब तक कांग्रेस की सत्ता देश में होगी, विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस नहीं आ सकता क्योंकि इस मामले में खुद कांग्रेस का दामन दागदार है।
प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री अर्थशास्त्री है, बावजूद इसके महंगाई बढ़ रही है और अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। टीम अन्ना पर हो रहे हमले के बारे में उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वालों को तंग कर रही है। जब बाबा रामदेव ने अनशन किया था तो उन पर पुलिस से हमला कराया गया। अब अन्ना हजारे, उनकी टीम सदस्यों व श्री श्री रविशंकर पर भी इस तरह के आरोप लगा रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की शुरू से फितरत रही है कि जो भी उसके खिलाफ मुंह खोलता है, उस पर आरएसएस का सहयोगी होने का आरोप लगा दिया जाता है। एक सवाल के जवाब में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हरियाणा में जब से हजकां के साथ गठबंधन हुआ है, एक नये जोश का संचार हुआ है। यह गठबंधन इसी मजबूती के साथ आगे बढ़ता रहेगा क्योंकि भाजपा जब किसी से दोस्ती करती है तो उसे पूरी ईमानदारी से निभाती है।
बिना बोले निकल गए आडवाणी
स्थानीय भाजपा इकाई की ओर से आज सुबह 9 बजे रेस्टहाउस में आडवाणी की प्रेसवार्ता का आयोजन रखा था मगर बाद में उसे समय का हवाला देते हुए रद्द कर दिया। मीडिया कर्मी रेस्टहाउस के बाहर इस उम्मीद में खड़े रहे कि शायद आडवाणी कुछ बोलेंगे मगर आडवाणी लगभग 10 बजे रेस्टहाउस से निकलकर बिना कुछ बोले अपने रथ में सवार हो गए।
उन्होंने सिर्फ हाथ हिलाकर समर्थकों का अभिवादन किया। शनिवार रात लालकृष्ण आडवाणी लगभग 10 बजे लालबत्ती चौक स्थित टाउन पार्क के सामने पहुंचे मगर वहां भी कार्यकर्ताओं को निराशा ही हाथ लगी। एक तो आडवाणी अपने रथ से बाहर नहीं आए और दूसरा रथ के अंदर से सिर्फ दो मिनट ही संबोधित किया। उस समय रथ में उनके साथ भाजपा नेताओं के साथ हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्रोई भी थे। लोग इस बात से मायूस हुए कि वे दो घंटे से आडवाणी के स्वागत के लिए वहां खड़े हुए थे, जबकि आडवाणी रथ से बाहर तक नहीं निकले।












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