मध्यम वर्गीय परिवार के लिए शहर में सपना होगा आशियाना

उद्योग जगत को उम्मीद थी कि बहुफसली जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी दी जाएगी। सरकार ने इस बारे में नियम में थोड़ी रियायत तो दी है, लेकिन उद्योग जगत का कहना है कि यह नाकाफी है। खास तौर पर उत्तर भारत के इलाकों में तो सुनियोजित तरीके से शहर बसाना नामुमकिन हो जाएगा। क्योंकि यहां की सभी जमीनें बहुफसली हैं। उद्योग जगत का कहना है कि पांच फीसदी में तो सिर्फ सड़क वगैरह बनाने का ही काम हो सकेगा। आवासीय कालोनियों का विकास तो नहीं हो सकेगा। क्रेडाई का यह भी कहना है कि इससे छोटे स्तर पर जमीन की बिक्री बढ़ेगी, जिससे बेतरतीब तरीके के शहरों का विकास होगा। वहीं उद्योग जगत के एक अधिकारी ने कहा कि बिल के कारण रीयल स्टेट का दायरा सीमित होगा जिससे सीमेंट, लोहे की बिक्री में कमी आएगी और मजदूरों को भी संघर्ष करना पड़ेगा।
आपको बता दें कि कल कैबिनेट ने भूमि अधिग्रहण बिल को मंजूरी दे दी। इस बिल में मुआवजा दरों में मूल मसौदे के मुकाबले कटौती की गई है। शहरी क्षेत्र में मुआवजा बाजार मूल्य से दो गुना होगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में इसे छह से घटाकर चार गुना कर दिया गया है। कानून बनने पर विधेयक के प्रावधान उन जमीनों पर भी लागू होंगे जिनका अधिग्रहण हो चुका है, पर कब्जा नहीं लिया गया है, या किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। 117 साल पुराने कानून की जगह लेने वाला यह बिल 7 सितंबर को संसद में पेश होगा।
हालांकि राहुल गांधी के छाप वाले इस बिल की कुछ बातों पर कई मंत्रियों को आपत्ति थी, जो पूर्व में मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के आग्रह और उद्योग संगठनों के दबाव में बहु फसली जमीन के अधिग्रहण के प्रावधान में ढील दी गई है, जबकि बहु फसली जमीन के अधिग्रहण पर पहले सख्त प्रतिबंध का प्रावधान किया गया था। मंत्रिमंडल द्वारा पारित विधेयक के मुताबिक, किसी भी गांव की पांच फीसदी से अधिक बहु फसली जमीन अधिग्रहीत नहीं की जाएगी।
कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने बताया कि राज्यों को अपना भूमि अधिग्रहण कानून बनाने की आजादी होगी। विधेयक के मसौदे में पहले जहां यह प्रावधान था कि किसानों की अधिग्रहीत जमीन पर पांच सालों के दौरान अगर प्रस्तावित परियोजना स्थापित नहीं हुई तो जमीन किसानों को वापस कर दी जाएगी। लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूर विधेयक में इसमें आमूलचूल परिवर्तन कर दिया गया है।












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