आखिर राजनेता तिरंगे पर क्यों कर रहे हैं राजनीति?
भाजपा अपने आपको साबित करने में जुटी है कि उसकी नजर में हिंदू-मुसलमान सभी एक हैं, कश्मीर से कन्या कुमारी तक देश को एक बताने वाली भाजपा का पूरा ध्यान इस समय कश्मीर के लाच चौक पर है जहां वो तिंरगा फहराना चाहती है। जबकि केन्द्र सरकार को हालात बिगड़ने का डर है इसलिए वो भाजपा के इस तिरंगा यात्रा का विरोध कर रही है।
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मामला गर्माता जा रहा है, राजनीतिक बयान जारी है लेकिन कोई भी ऐसा नहीं जिसे वाकई में कश्मीर और कश्मीरवासियों की चिंता हैं। हमेशा दहशत के साये में जीने वाले कश्मीरवासियों के बारे में कोई नहीं सोच रहा। दोनों ही पार्टियों को अपने -अपने वोट की चिंता है। भाजपा का प्रयास अगर काम आया तो उसे आने वाले चुनावों में फायदा मिलेगा, लेकिन अगर उसका ये कदम फेल भी होता है तो भी फायदा उसी को होने वाला है क्योंकि हालात के पीछे कांग्रेस को दोषी ठहराया जायेगा।
गणतंत्र दिवस पर देश एक हुआ था, उसी बात को हम 26 जनवरी को याद करते हैं ताकि हर मुश्किल का सामना हम बहादुरी से कर सकें, लेकिन क्या अब की बार की ये 26 जनवरी को होता दिख रहा है, जब घाटी शांत है, तो उसे अशांत करने का हक इन राजनेताओं को किसने दिया? अगर वाकई में भाजपा को कश्मीर की इतनी चिंता है तो वो उस समय वहां क्यों नहीं गई जब घाटी आग उगल रही थी।
और अगर कांग्रेस कश्मीर वालों की हितैषी है तो उस समय वो लोग कहां थे जब कश्मीर में हालात बेकाबू हुए थे। आखिर कब तक हमारे राजनेता धर्म और तिरंगे पर राजनीति करते रहेंगे? इस बारे में आपका क्या कहना है, अपनी राय नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में दर्ज करायें।













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