मप्र में बेहिसाब बढ़ी मंत्रियों की दौलत
विधानसभा में कांग्रेस के विधायक आरिफ अकील ने जानना चाहा था कि वर्ष 2003 और वर्ष 2008 के चुनाव के समय पेश किए गए ब्यौरे के मुताबिक मंत्रियों की चल अचल संपत्ति के साथ नकदी रकम में कितना बदलाव आया है। इस सवाल के सवाल जवाब में संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया है कि उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पास वर्ष 2003 में महज 96 हजार रुपये नकद थे जो वर्ष 2008 में बढ़कर एक करोड़ 73 लाख रुपये से ज्यादा हो गए हैं। इसी तरह पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव की जमा राशि 12 लाख 50 हजार से बढ़कर 46 लाख 59 हजार रुपये हुई है। वित्त मंत्री राघवजी के पास वर्ष 2003 में नौ लाख 33 हजार थे जो वर्ष 2008 में बढ़कर 19 लाख रुपये हो गए।
सरकार की ओर से पेश किए गए ब्यौरे के मुताबिक जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया की जमा राशि तीन लाख 31 हजार से बढ़कर 10 लाख को पार कर गई है। नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर के पास रकम चार लाख 78 हजार से बढ़कर 15 लाख 66 हजार हो गई है।
सरकार के आंकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा की जमा रकम एक लाख 21 हजार से बढ़कर नौ लाख 36 हजार हो गई है। वहीं आदिम जाति कल्याण मंत्री विजय शाह की नकदी तीन लाख 91 हजार से बढ़कर 42 लाख को पार कर गई है। इन मंत्रियों में स्कूली शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस ऐसी मंत्री है जिनकी जमा रकम पांच साल में कम हो गई है। इसके अलावा जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा की जमा रकम दोनों चुनाव के समय लगभग समान रही हैं।
आरिफ अकील का आरोप है कि प्रदेश के मंत्रियों की रकम में हुई कई गुना बढ़ोत्तरी बढ़ते भ्रष्टाचार का प्रतीक है। उन्होने कहा है कि पांच साल में कई गुना दौलत बढ़ना मंत्रियों और अफसरों के गठजोड़ का खुलासा करती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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