नक्सल आंदोलन के अगुआ कानू सान्याल नहीं रहे (लीड-1)

सिलिगुड़ी, 23 मार्च (आईएएनएस)। नक्सल आंदोलन के संस्थापक सदस्य और प्रमुख नक्सली नेता कानू सान्याल का शव मंगलवार को उनके घर में लटका हुआ पाया गया। वह 78 वर्ष के थे। वह अविवाहित थे।

पुलिस के मुताबिक दार्जिलिंग जिले में अपनी झोपड़ी में सान्याल ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। लेकिन कोई यह नहीं बता सका कि आखिर सान्याल ने आत्महत्या क्यों की।

नक्सलबाड़ी गांव में 1967 में जिस कृषक आंदोलन से नक्सलवाद का उदय हुआ उस आंदोलन का नेतृत्व करने वालों में सान्याल अग्रणी थे। वह आंदोलन भारत सरकार के लिए चुनौती बन गया है।

चारु मजुमदार के दिशानिर्देश के तहत सान्याल ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्‍सवादी-लेनिनवादी (सीपीआई-एमएल) की स्थापना में मदद की थी।

बाद में भारत सरकार ने सीपीआई-एमएल के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी। लिहाजा पार्टी महासचिव मजुमदार का कोलकाता प्रेसीडेंसी जेल में जुलाई 1972 में निधन हो गया।

सिलिगुड़ी के ए.सी.कॉलेज से स्नातक रहे सान्याल को बार-बार जेल में बिताना पड़ा। उसके बाद उन्होंने 1980 के दशक में देश भर के बिखरे माओवादियों को एकजुट करने का निर्णय लिया।

कानू सान्याल के निधन पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मंगलवार को शोक जताया है। सान्याल ने एक समय इन दोनों पार्टियों का प्रखर विरोध किया था।

भाकपा के उप महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "नक्सलबाड़ी आंदोलन के शुरुआती दिनों में वह एक लोकप्रिय नेता हुआ करते थे। सशस्त्र संघर्ष की उनकी विचारधारा से हालांकि हम सहमत नहीं हैं, लेकिन उन्होंने वामपंथी आंदोलन में बड़ा योगदान किया।"

माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि सान्याल की मौत बहुत दुर्भाग्यपूण है। नक्सलियों के वर्तमान रुख के वह भी आलोचक थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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