मध्य अवधि में विकास दर दो अंकों में पहुंच जाएगी : प्रधानमंत्री (राउंडअप)

पूर्ण योजना आयोग की यहां आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि वैश्विक मंदी के प्रभाव के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए पिछले दो साल खासतौर से मुश्किल भरे रहे। पिछले वर्ष खराब मानसून के कारण खाद्यान्न उत्पादन में आई गिरावट से स्थिति बद से बदतर हो गई।

प्रधानमंत्री ने कहा, "फिर भी हम पिछले दो वर्षों के दौरान सात प्रतिशत विकास दर बनाए रखने में सक्षम रहे हैं।" सिंह ने कहा कि अब लक्ष्य मध्य अवधि में 10 प्रतिशत विकास दर के लिए होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, "लेकिन उच्च विकास दर की बहाली को हल्के में नहीं लिया जा सकता।" सिंह ने इसके लिए अधोसंरचना विकास पर जोर दिया और इसमें निजी क्षेत्र की बड़ी भागीदारी की वकालत की।

सिंह ने कहा, "यदि हम कृषि उत्पादन में मदद करने वाली विभिन्न योजनाओं को ठीक से लागू करा लेते हैं तो कृषि उत्पादन में भी मजबूत वापसी की उम्मीद की जा सकती है।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "कृषि में चार प्रतिशत विकास दर हासिल करने का अच्छा मौका है।"

बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री कमलनाथ, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भी हिस्सा लिया।

बैठक के दौरान योजना आयोग की ओर से मध्य कालिक मूल्यांकन दस्तावेज पेश किया गया। इस दस्तावेज में कहा गया है, "11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान औसत विकास दर लक्षित नौ प्रतिशत के बदले 8.1 प्रतिशत होगी।"

दस्तावेज में कहा गया है, "12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अर्थव्यवस्था नौ प्रतिशत से अधिक की विकास दर हासिल करने की स्थिति में हो जाएगी।"

इस मूल्यांकन दस्तावेज पर अब राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) में चर्चा की जाएगी और जरूरी हुआ तो इसमें कुछ सुधार भी किया जाएगा। उसके बाद केंद्र और राज्य सरकारें इसकी सिफारिशों पर अमल करना शुरू कर देंगी।

इसके पहले योजना आयोग द्वारा ही आयोजित एक सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने अधोसंरचना पर नए सिरे से ध्यान देने का वादा किया। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था 8.5 फीसदी की दर से विकास करेगी और मध्य अवधि में बढ़ कर यह 10 फीसदी हो जाएगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विपरीत वैश्विक स्थिति में भी वर्ष 2008-2009 में देश की अर्थव्यवस्था 6.7 फीसदी की दर से आगे बढ़ी है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम वर्ष 2010-11 में 8.5 फीसदी की विकास दर की उम्मीद रखते हैं। मैं आशा करता हूं कि 2011-12 में हम नौ फीसदी विकास दर हासिल कर लेंगे।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि दो अंकों में विकास दर को हासिल करना असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अगली पंचवर्षीय योजना (2012-2017) में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में 500 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में निवेश के लिए वह केंद्रीय वित्त मंत्रालय और योजना आयोग से अपील करते हैं कि वे इस संबंध में योजना तैयार करें।

इस अवसर पर मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) में बुनियादी ढांचे के विकास के क्षेत्र में एक खरब डॉलर से अधिक के निवेश की जरूरत होगी।

बुनियादी क्षेत्र पर आधारित एक रिपोर्ट में अहलूवालिया ने कहा आरंभिक आकलन के अनुसार 12वीं पंचवर्षीय योजना में बुनियादी क्षेत्र में विकास के लिए 40.99 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि 9.95 फीसदी विकास दर हासिल करने के लिए इसकी जरूरत होगी।

मौजूदा पंचवर्षीय योजना की तुलना में 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान अधोसंरचना के क्षेत्र में दोगुना निवेश की जरूरत होगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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