स्वदेशी इंजन वाले उपग्रह रॉकेट का अप्रैल में प्रक्षेपण
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) से सम्बद्ध एक अधिकारी ने यहां आईएएनएस को बताया, "अब तक हम रूस में निर्मित इंजनों का उपयोग करते थे।"
उन्होंने कहा कि पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर रहने वाले उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) से पहली बार देश में ही निर्मित इंजन जोड़ा गया है। अमेरिका, फ्रांस, जापान, रूस और चीन ने पहले ही अपने इंजन विकसित कर लिए हैं।
अगले सप्ताह उपग्रह प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-डी3 देश के आधुनिक संचार उपग्रह जीएसएटी-4 को लेकर जाएगा। वीएसएससी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर जानकारी दी कि उपग्रह प्रक्षेपण की सभी तैयारियां हो गई हैं और श्रीहरिकोटा से इसके प्रक्षेपण की तारीख एक सप्ताह के अंदर बता दी जाएगी।
इसरो के मुताबिक 49 मीटर ऊंचा जीएसएलवी-डी3 रॉकेट 414 टन भार उठाएगा। यह पृथ्वी से 36,000 किलोमीटर ऊपर स्थित कक्षा में जीएसएटी-4 को स्थापित करेगा।
वीएसएससी अधिकारी ने बताया कि एक अन्य उपग्रह यान, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी-15) के मई के पहले सप्ताह में प्रक्षेपण की तैयारियां भी पूरी हो गई हैं।
यह यान अपने साथ एक अल्जीरियाई उपग्रह, दो कनाडाई उपग्रहों के अलावा कर्नाटक के एक कॉलेज द्वारा निर्मित एक उपग्रह लेकर जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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