विस परिणाम : अब्दुल्ला की तीसरी पीढ़ी नेतृत्व करने को तैयार
उमर अब्दुल्ला के दादा व कश्मीर के प्रमुख नेता रहे शेख मुहम्मद अब्दुल्ला ने वर्ष 1938 में नेशनल कांफ्रेंस की स्थापना की थी और वर्ष 1947 में वह राज्य के प्रधानमंत्री बने थे।
उसके बाद वर्ष 1974 में वह राज्य के मुख्यमंत्री भी बने। वर्ष 1982 में उनकी मृत्यु हो गई।
बाद में उमर के पिता फारुक अब्दुल्ला वर्ष 1982, 1987 व 1996 में कुल तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री बने।
देश में नेहरू खानदान के बाद अब्दुल्ला खानदान ही ऐसा है, जिसकी तीसरी पीढ़ी राजनीति में उच्च पदों पर विराजमान है।
38 वर्षीय उमर अब्दुल्ला अपने परिवार की परंपरागत विधानसभा सीट गांदरबल से विजयी हुए हैं। इसके साथ ही वह 87 सदस्यीय विधानसभा में अपनी पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में पहुंचाने में कामयाब हुए हैं।
कश्मीरी पिता व ब्रिटिश मां के संतान उमर की पढ़ाई-लिखाई श्रीनगर के एक मिशनरी स्कूल में हुई है। उमर अपने मजबूत धर्मनिरपेक्ष विचारों व प्रगतिशील राजनीतिक विचारधारा के लिए जाने जाते हैं।
वर्ष 1998 में पहली बार वह लोकसभा के लिए चुने गए। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार में वर्ष 1999 में सबसे युवा (29 वर्ष) केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने शपथ ली थी।
फारुक अब्दुल्ला ने वर्ष 2001 में पार्टी की कमान उमर को सौंप दी।
वर्ष 2002 में उमर ने पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में गांदरबल सीट से चुनाव लड़ा। लेकिन उस समय वह ठीक उसी प्रतिद्वंद्वी से चुनाव हार गए थे, जिसे उन्होंने रविवार को पराजित किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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