भारत में जोर पकड़ रहा है स्टेम सेल कोशिका बैंकिंग का कारोबार
नई दिल्ली, 28 दिसम्बर (आईएएनएस)। आपके गर्भस्थ शिशु के जीवन में रोग प्रतिरोधकता संबंधी, पैतृक व रक्त संबंधी रोगों से लड़ने का यदि कोई अचूक रास्ता निकल आए तो इससे मूल्यवान और क्या हो सकता है? जी हां, इसके लिए तमाम भारतीय नागरिक, स्टेम कोशिका के चमत्कार के इंतजार में हैं।
यूरोप की सबसे बड़ी स्टेम कोशिका बैंकिंग कंपनी क्रीयो-सेव के प्रबंध निदेशक वी.आर. चंद्रमौलि ने कहा, "300 लोग पहले से ही स्टेम कोशिका बैंकिंग के बारे में जानकारी के लिए हमारे संपर्क में हैं।"
यह कंपनी भारत में स्टेम कोशिका के क्षेत्र में व्यापार की बड़ी संभावनाएं महसूस करती है। यह कंपनी दिसंबर महीने में भारत में स्थापित किए गए 10 स्टेम कोशिका संग्रह बैंकों में एक करोड़ रुपए निवेश कर चुकी है।
रिलायंस लाइफ साइंसेस व चेन्नई की लाइफसेल जैसी भारत की दो कंपनियां पहले से ही स्टेम कोशिका बैंकिंग पर काम कर रही हैं। जन्म के समय जब नाभि रज्जु को काट कर बच्चे को मां से अलग किया जाता है, ठीक उसी समय नाभि रज्जु से निकलने वाले रक्त से स्टेम कोशिकाएं एकत्रित कर ली जाती हैं।
चंद्रमौलि ने आईएएनएस को बताया, "स्टेम कोशिका थिरैपी के जरिए मानव रोगों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव की संभावना है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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