बिहार बाढ़ : राहत शिविरों में लौट रहा है बच्चों का जीवन
पटना, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। बाढ़ पीड़ित बच्चों की आंखों से भय का मंजर धीरे-धीरे निकल रहा है। राहत शिविरों में बच्चों ने अपनी अलग दुनिया बना ली है। बच्चे पढ़ाई करने के साथ-साथ गिल्ली-डंडा जैसे खेल का लुत्फ भी उठाने लगे हैं।
उजड़ने के दर्द और प्रलय के संत्रास से दूर इन बच्चों की दिनचर्या अब पीछे छोड़ आए गांवों की तरह होने लगी है। हालांकि इनसे जब उस मनहूस घड़ी के विषय में पूछा जाता है तो वे सिहर उठते हैं।
सहरसा के पटेल मैदान में बाढ़ पीड़ितों का एक गांव ही बस गया है। शिविर में रह रही मधेपुरा की आठ वर्षीय शालिनी को इस बात का मलाल है कि कई दिन बिना खेले बीत गए। अब वह खुश है और ग्रामीण लड़कियों में लोकप्रिय खेल 'कित-कित' खेलते हुए दिन काट रही है। उसने आईएएनएस को बताया, "यहां मेरे गांव की ही मेरी एक सहेली है। हम लोग एक साथ खेलते हैं।"
शिविर में बच्चों के कोलाहल से किसी के आने की खबर हो जाती है। बाढ़ की खौफनाक तस्वीरें इन बच्चों के स्मृति पटल पर अब धुंधली होती जा रही हैं। मधेपुरा के भैरकी प्राथमिक विद्यालय के छात्र नवीन के पास लिखने के लिए कॉपी और पेंसिल है। इससे वह काफी खुश है। उसने बताया, "अब मैं पढ़ाई शुरू करना चाहूंगा।"
शिविर में 'बिहार शिक्षा परियोजना' के अस्थायी विद्यालय खोले गए हैं। परियोजना के निदेशक राजेश भूषण ने बताया, "इस प्रयास से बच्चों के मन से बाढ़ की खौफनाक यादें मिटाई जा सकेंगी। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों में अब तक एक दर्जन से ज्यादा विद्यालय खुल चुके हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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