Asha Bhosle Movie: अभिनय की भी 'माई' थीं आशा भोसले, 79 की उम्र में इस मराठी फिल्म में मनवाया एक्टिंग का लोहा
Asha Bhosle Movie: आशा भोंसले के निधन के बाद आज पूरी दुनिया उनकी सुरीली विरासत को याद कर रही है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आशा ताई सिर्फ माइक के सामने ही जादू नहीं बिखेरती थीं, बल्कि उन्होंने सिल्वर स्क्रीन पर भी अपनी अदाकारी का ऐसा लोहा मनवाया था कि बड़े-बड़े दिग्गज कलाकार दंग रह गए थे।
संगीत की दुनिया में दशकों तक राज करने के बाद, आशा जी ने 79 साल की उम्र में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था। फिल्म का नाम था 'माई' (Mai), जो साल 2013 में रिलीज हुई थी। यह फिल्म आज भी दर्शकों की आंखों में आंसू ला देती है।

Asha Bhosle Film Mai: अल्जाइमर से जूझती मां का वो मार्मिक किरदार जिसने सबको रुला दिया
साल 2013 में रिलीज हुई फिल्म 'माई' एक इमोशनल ड्रामा है, जिसमें आशा भोसले ने अल्जाइमर (भूलने की बीमारी) से जूझ रही एक बुज़ुर्ग मां का किरदार निभाया था। 'माई' एक बेहद इमोशनल मराठी फिल्म है जिसे हिंदी में भी डब किया गया था। इस फिल्म में आशा भोंसले ने मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्होंने एक ऐसी बुजुर्ग मां का किरदार निभाया जो अल्जाइमर जूझ रही है।
कहानी मां और बच्चों के बीच बदलते रिश्तों की कड़वी सच्चाई को बयां करती है। जब 'माई' (आशा भोंसले) अपनी याददाश्त खोने लगती हैं, तो उनके अपने बेटे और परिवार के अन्य सदस्य उन्हें बोझ समझने लगते हैं और अकेला छोड़ देते हैं। ऐसे कठिन समय में उनकी बेटी (पद्मिनी कोल्हापुरे) समाज और अपने परिवार के खिलाफ जाकर अपनी मां का हाथ थामती है।
फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक बेटी अपनी उस मां का सहारा बनती है, जो धीरे-धीरे उसे भी भूलती जा रही है। आशा जी ने इस किरदार में इतनी सादगी और गहराई भर दी थी कि फिल्म देखते समय ऐसा कहीं नहीं लगा कि वे पहली बार कैमरे का सामना कर रही हैं।
Asha Bhosle ने सिलवर स्क्रीन पर एक्टिंग से छोड़ी अमिट छाप
फिल्म 'माई' केवल आशा जी के अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी बेहतरीन स्टार कास्ट के लिए भी जानी जाती है। आशा भोसले मुख्य भूमिका में थीं जिसमें उनकी बेटी के किरदार में पद्मिनी कोल्हापुरे थीं। अनुपम खेर और राम कपूर ने फिल्म में अहम भूमिकाएं निभाईं और कहानी को मजबूती दी।
आशा भोसले का नाम हमेशा एक महान गायिका के रूप में लिया जाएगा, लेकिन उनकी यह फिल्मी पारी भी उतनी ही खास रही। 'माई' में उनका अभिनय आज भी लोगों के दिलों को छूता है और यह दिखाता है कि असली कलाकार वही होता है, जो हर मंच पर अपनी छाप छोड़ जाए।
जब क्रिटिक्स ने भी झुकाया सिर
फिल्म के रिलीज के वक्त कई फिल्म समीक्षकों का मानना था कि आशा जी को इस फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड मिलना चाहिए था। उनकी सादगी, उनके चेहरे के हाव-भाव और भूलने की बीमारी से जूझते हुए एक मजबूर मां की बेबसी को उन्होंने जिस तरह पर्दे पर उतारा, उसने साबित कर दिया कि एक कलाकार कभी बूढ़ा नहीं होता।
आशा भोंसले ने 'माई' फिल्म के जरिए यह संदेश दिया था कि बुजुर्गों को केवल दवाई की नहीं, बल्कि बच्चों के साथ और प्यार की जरूरत होती है। आज जब हम आशा ताई को याद कर रहे हैं, तो उनकी यह फिल्म उनके बहुमुखी व्यक्तित्व (Versatile Personality) की एक खूबसूरत गवाह बनकर हमारे सामने खड़ी है।












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