Asha Bhosle: 'अच्छे गाने दीदी को, मुश्किल मुझे,' आशा भोसले ने किससे की थी बड़ी बहन लता मंगेशकर की शिकायत?

Asha Bhosle Death: भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सटाइल आवाज, आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की उम्र में सुरों का एक महायुग समाप्त हो गया है, लेकिन पीछे रह गई है उनकी वो जादुई आवाज जो सदियों तक फिजाओं में गूंजती रहेगी। लता मंगेशकर जैसी महान गायिका की छोटी बहन होने के बावजूद, अपनी एक अलग पहचान बनाना आशा ताई के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था।

आशा भोसले के करियर में एक दौर ऐसा भी था जब उनके हिस्से अक्सर वो गाने आते थे जिन्हें गाना दूसरों के लिए नामुमकिन होता था। अब जब आशा ताई हमारे बीच नहीं रहीं तो हमें अन्नू कपूर के एक शो का वो किस्सा याद आता है जब उन्होंने जिक्र किया था कि लगातार मुश्किल गाने मिलने के बाद आशा जी का दर्द आरडी बर्मन (पंचम दा) के सामने छलक पड़ा था।

Asha Bhosle RD Burman Lata Mangeshkar

'मैं मुश्किल संगीत कंपोज करना ही छोड़ दूंगा'

उन्होंने पंचम दा से कहा था, 'आप सभी सुरीले और अच्छे गाने तो दीदी (लता मंगेशकर) को दे देते हैं, और मेरे हिस्से सिर्फ वो मुश्किल धुनें आती हैं जिन्हें कोई और नहीं गा पाता।' इस शिकायत पर पंचम दा ने बड़ी सादगी से जो जवाब दिया, उसने संगीत के इतिहास को ही बदल दिया। उन्होंने कहा था, 'तुम हर तरह के गाने गा सकती हो, इसीलिए मैं ऐसी मुश्किल धुनें बनाता हूं। अगर तुम नहीं गाओगी, तो मैं कठिन संगीत कंपोज करना ही छोड़ दूंगा।'

जब एक गाने के लिए मिला '100 रुपये' का इनाम और छिड़ गई बात

आशा ताई ने न केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत, बल्कि 'वेस्टर्न टच' वाले गानों को भी एक नया आयाम दिया। 1966 की फिल्म 'तीसरी मंजिल' का गाना 'आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा' इसका जीवंत उदाहरण है। यह गाना इतना चुनौतीपूर्ण था कि आशा जी को इसके लिए लगातार 10 दिनों तक कड़ा रियाज करना पड़ा।

asha bhosle

अन्नू कपूर बताते हैं कि कड़ी मेहनत और लंबे रियाज के बाद जब यह गाना रिकॉर्ड हुआ, तो पंचम दा इतने गदगद हुए कि उन्होंने इनाम के तौर पर आशा जी को 100 रुपये का नोट दिया। आशा जी इस इनाम से बेहद खुश हुईं।

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एक पॉडकास्ट में आशा जी ने पंचम दा की यादें साझा की थीं। उन्होंने बताया कि पंचम दा को अपनी महानता का रत्ती भर भी घमंड नहीं था। आशा जी के शब्दों में, 'लोग पैसों के लिए मरते हैं, लेकिन अगर मैं उन्हें कोई हीरा भी देती, तो वो कहते थे-यह क्या है? पत्थर? इसकी जगह एक अच्छा गाना रिकॉर्ड करवाओ।' उनके लिए एक बेहतरीन रिकॉर्ड की कीमत किसी भी कीमती रत्न से कहीं बढ़कर थी।

वो अंतिम इच्छा जो गाते-गाते ही पूरी हुई

91 साल की उम्र में दिए अपने एक इंटरव्यू में आशा ताई ने अपनी सबसे बड़ी ख्वाहिश बयां की थी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा था, 'एक मां की इच्छा बच्चों की खुशी होती है, एक दादी की इच्छा पोते-पोतियों का सुख। लेकिन मेरी बस एक ही इच्छा है कि गाते-गाते ही मेरा दम निकले।'

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मात्र 3 साल की उम्र से संगीत की शिक्षा शुरू करने वाली और 82 वर्षों तक प्लेबैक सिंगिंग करने वाली आशा जी के लिए संगीत ही उनकी सांसें थीं। आज जब वे इस दुनिया से रुखसत हुई हैं, तो उनका यह संकल्प पूरा हुआ कि वे अपनी अंतिम सांस तक सुरों की साधना और अपने प्रशंसकों के दिलों से जुड़ी रहीं।

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