आकाश गंगा के परे मिला एक तारा
गार्चिग (जर्मनी), 28 मई (आईएएनएस)। जर्मनी के वैज्ञानिकों, जिन्हें दो बेहद प्रभावशाली दूरबीनों को एक सांचे में फिट करने का श्रेय जाता है, ने आकाश गंगा के परे एक तारे के बारे में व्यापक ब्यौरा जुटाने का दावा किया है।
यह पहला मौका है जब वैज्ञानिकों ने इस तारे के बारे में जानकारी जुटाने में कामयाबी हासिल की है। इस विशाल तारे की पहचान डब्ल्यूओएच जी 64 के रूप में की गई है। यह तारा ब्रह्मांड के 'लार्ज मैगेलेनिक क्लाउड' क्षेत्र में स्थित है। तारे की विशालता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह सूर्य से 2000 गुना बड़ा है और धरती से 163,000 प्रकाश वर्ष दूर।
डीपीए न्यूज एजेंसी के मुताबिक बोन स्थित 'मैक्स प्लैंक रेडियो-एस्ट्रोनोमी इंस्टीट्यूट' के कीचि ओहनाका ने इस शोध टीम का नेतृत्व किया। उनकी टीम ने म्यूनिक के उपनगरीय इलाके गार्चिंग स्थित 'यूरोपियन सॉदर्न ऑब्जर्वेटरी' (ईएसओ) के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर इस शोध को पूरा किया।
इन वैज्ञानिकों ने इस शोध के लिए आठ मीटर लंबी दो रिफ्लेक्टर दूरबीनों का इस्तेमाल किया। इनके मुताबिक यह तारा अपना 40 फीसदी द्रव्यमान खो चुका है और इस तरह इसके इर्द-गिर्द धूल का विशाल वलय तैयार हो गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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